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जानिए….कलक्टर के आने से कैसे आती है रौनक, सहकार गोष्ठी में एक अफसर ने कैसे बांधे तारीफों के पुल

https://www.patrika.com/hanumangarh-news/ हनुमानगढ़. अंतरराष्ट्रीय सहकारिता दिवस पर शनिवार को जंक्शन स्थित प्राथमिक मल्टीपरपज सहकारी समिति लिमिटेड में सहकार गोष्ठी का आयोजन किया गया। केन्द्रीय सहकारी बैंक, कृभको व प्राथमिक मल्टीपरपज सहकारी समिति लिमिटेड के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित गोष्ठी में वक्ताओं ने सहकारिता की उपयोगिता व इसके महत्व पर प्रकाश डाला। अतिथियों ने प्राथमिक मल्टीपरपज सहकारी समिति में कस्टम हायरिंग सेंटर का उद्घाटन भी किया।  

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जानिए….कलक्टर के आने से कैसे आती है रौनक, सहकार गोष्ठी में एक अफसर ने कैसे बांधे तारीफों के पुल
-सहकारिता दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में विधायक चौधरी विनोद कुमार ने प्रत्येक छह महीने में सहकारी समितियों की ऑडिट करवाने की दी सलाह
-जंक्शन मंडी स्थित प्राथमिक मल्टीपरपज सहकारी समिति में कस्टम हायरिंग सेंटर का किया उद्घाटन
हनुमानगढ़. अंतरराष्ट्रीय सहकारिता दिवस पर शनिवार को जंक्शन स्थित प्राथमिक मल्टीपरपज सहकारी समिति लिमिटेड में सहकार गोष्ठी का आयोजन किया गया। केन्द्रीय सहकारी बैंक, कृभको व प्राथमिक मल्टीपरपज सहकारी समिति लिमिटेड के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित गोष्ठी में वक्ताओं ने सहकारिता की उपयोगिता व इसके महत्व पर प्रकाश डाला। अतिथियों ने प्राथमिक मल्टीपरपज सहकारी समिति में कस्टम हायरिंग सेंटर का उद्घाटन भी किया। विधायक विनोद कुमार ने कहा कि पहले किसानों को लोन लेने में बहुत दिक्कत आती थी लेकिन सोसाइटियों से लोन मिलने पर कृषि उत्पादकता बढ़ी। कुछ सहकारी समितियों में गड़बड़ी हुई। लिहाजा इन पर अंकुश रखना भी जरूरी है। किसानों का विश्वास प्राप्त करने के लिए सहकारी समितियों का प्रत्येक छह महीने में ऑडिट हो। किसान जिस कार्य के लिए लोन लें, पैसा उसी में खर्च करें। उन्होंने किसानों को बचत की आदत डालने की बात भी कही। भूमि विकास बैंक के सचिव पीथदान चारण की प्रशंसा करते हुए विधायक ने कहा कि यह बैंक बंद होने के कगार पर आ गया था लेकिन अब सचिव ने इसे राजस्थान में नंबर वन पर ला दिया है। बीते बरसों में केन्द्रीय सहकारी बैंक के वसूली में नंबर वन रहने पर पीठ थपथपाई। कस्टम हायरिंग सेंटर को लेकर कहा कि कृषि के महंगे उपकरण हर कोई नहीं खरीद पाता। यह काम भी साल में दो-तीन बार आते हैं।
ऐसे में कस्टम हायरिंग सेंटर से बहुत कम किराए पर किसानों को कृषि उपकरण मिल सकेंगे। इसका बड़ा लाभ किसानों को मिलेगा। उन्होंने राज्य सरकार द्वारा चलाई जा रही चिरंजीवी स्वास्थ्य बीमा योजना समेत विभिन्न योजनाओं का लाभ उठाने का भी आह्वान किया। जिला कलक्टर नथमल डिडेल ने कहा कि इस जिले ने सहकारिता के क्षेत्र में बहुत अच्छा कार्य किया है। किसानों के प्रति राज्य सरकार की संवेदनशीलता इसी से देखी जा सकती है कि सरकार ने किसान कल्याण कोष की राशि को 2 हजार करोड़ से बढ़ाकर 5 हजार करोड़ कर दिया। कृषि बजट अलग से पेश किया गया। 11 छोटे छोटे मिशन की घोषणा की। इसमें उर्वरकता, बीज, खाद, सिंचाई, कृषि उपकरण इत्यादि किसानी के हर पहलू को कवर किया गया है। कृषि बजट को प्रत्येक किसान तक पहुंचाने के लिए कार्यशाला की जा रही है। कस्टम हायरिंग सेंटर एक अच्छा कॉन्सेप्ट है जिससे छोटे किसानों को बड़ा लाभ मिलेगा। मुख्यमंत्री किसान ऊर्जा मित्र योजना अंतर्गत 46 हजार कृषि कनेक्शनों में से 9 हजार उपभोक्ताओं के बिल शून्य आए। बिजली बिल में 50 यूनिट मुफ्त बिजली घोषणा अंतर्गत जिले के करीब ढाई लाख बिजली उपभोक्ताओं में से 38 हजार उपभोक्ताओं के बिल शून्य आए।
गोष्ठी में केन्द्रीय सहकारी बैंक के एमडी दीपक कुक्कड़ ने कहा कि समग्र विकास की भावना से सहकारिता विभाग का स्टॉफ लगातार काम करता रहा है। आधुनिक समय में इसकी प्रासंगिकता पर सवाल उठते रहे हैं। लेकिन इसकी उपयोगिता किसी से छिपी नहीं है। इसलिए केंद्र व राज्य सरकार दोनों इसे लेकर गंभीर हो रही है। उन्होंने कहा कि देश की ६३००० पैक्स को डिजिटल करने की तैयारी चल रही है। इस कार्य पर २५०० करोड़ खर्च होंगे। इसमें १५०० करोड़ केंद्र सरकार देगी। इससे तेरह करोड़ किसानों को लाभान्वित किया जाएगा। सहकारिता विभाग के उप रजिस्ट्रार अमीलाल सहारण ने कहा कि कलक्टर डिडेल के आने से रौनक सी आ गई है। चना खरीद का उदाहरण देते हुए कहा कि कलक्टर के प्रयासों से जिले में ८० करोड़ की चना खरीद हुई। समर्थन मूल्य पर खरीद होने से ११ करोड़ के भावांतर का लाभ किसानों को मिला।


बदल सकते हैं खेती की सूरत
जिला कलक्टर नथमल डिडेल ने पानी का सदुपयोग करने व प्रत्येक घर में बारिश के पानी को सहेजने के लिए टांका बनाने की बात कही। उन्होंने कहा कि आसमान से अमृत बरस रहा है। लेकिन हम बड़े मकान बनाने के बावजूद टांका सिस्टम नहीं बनाते। सचेत करते हुए कहा कि प्राकृतिक संसाधन सीमित हैं। नहरी पानी की तरफ इशारा करते हुए कहा कि किसानों को भी भविष्य को समझते हुए खेती कार्य करने की आवश्यकता है। हनुमानगढ़ जिले को अन्न का कटोरा बताते हुए कहा कि सहकारिता को समझकर किसान खेती की सूरत बदल सकते हैं।
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