
राजसमंद . शिक्षक बच्चों के भविष्य को चमकाता है, लेकिन यदि वह भामाशाह बन विद्यालय को भी स्वरूप देने लगे तो तरक्की की रफ्तार दोगुनी हो जाती है। राजसमंद जिले के लवाणा के राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय में कार्यरत शारीरिक शिक्षक मनोज हाड़ा स्कूल का कायापलट कर चुके हैं।
जिले का लवाणा स्थित राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय क्षेत्र में आदर्श विद्यालय के रूप में अपना नाम बना चुका है। निजी स्कूलों के विद्यार्थी भी यहां शिक्षा लेना चाहते हैं। कारण है, स्कूल का कायापलट होना और इस कायापलट के पीछे हैं, स्कूल के शारीरिक शिक्षक मनोज हाड़ा। मनोज शिक्षक की भूमिका निभाने के साथ-साथ भामाशाह के रूप में विद्यालय विकास में लगे हैं। वे स्कूल को आधुनिक सुविधाएं देने के अलावा विद्यार्थियों की खेल प्रतिभा निखारने के लिए अतिरिक्त समय भी देते हैं। जिससे स्कूल के ग्यारह खिलाडिय़ों का चयन राज्यस्तर पर हुआ है। पिछले साल एक छात्रा का राष्ट्रीय स्तर पर भी चयन हुआ था।
कांकरोली निवासी पीटीआई मनोज हाड़ा वर्ष दो हजार तेरह से लवाणा स्कूल में कार्यरत हैं। राउप्रावि, लवाणा के प्रधानाध्यापक सोहनलाल कुमावत बताते हैं कि समर्पित भाव से सेवा करने वाले मनोज ने स्कूल को आकर्षक बनाने के लिए अब तक पंद्रह लाख रुपए खर्च कर दिए हैं। उन्होंने स्कूल में मुख्यद्वार, सौर ऊर्जा प्लांट सरीखी सुविधाएं विकसित की तो स्कूल में बगीचे से लेकर पंखे-एलईडी, फर्नीचर, कूलर आदि की व्यवस्था भी की।
खिलाडियों को प्रोत्साहन
खिलाडिय़ों को प्रोत्साहित करने के लिए अपने स्तर पर ही पूरी खेल सामग्री लाए तो जूता चप्पल रखने के लिए बड़ा स्टैंड लगवाया। स्कूल में पानी का स्थाई समाधान करते हुए मोटर तथा पाइप लाइन डलवाई, विद्यालय के कमरों का रंगरोगन करवाया। सेंसरयुक्त शौचालय भी लगवाए।
खेल प्रतियोगिताएं भी कराई
मनोज अपने स्तर पर स्कूल में जिला स्तरीय खेल प्रतियोगिताएं आयोजित कराने के काम भी करते हैं। वे खेल के प्रति विद्यार्थियों में उत्साह बनाए रखने के लिए स्कूल समय के अलावा सुबह-शाम खिलाडिय़ों को प्रशिक्षण देते हैं। जिसके चलते आज स्कूल में हॉकी, फुुटबॉल, वॉलीबॉल की बेहतरीन टीमें हैं जो प्रदेश स्तर पर नाम कमा रही हैं।
स्टाफ और गांववासियों को श्रेय
स्कूल के लिए अपने प्रयासों से मनोज क्षेत्र में एक नजीर बन चुके हैं। मनोज इस विकास का श्रेय स्कूल स्टाफ और गांववासियों को देते हैं। उनका मानना है कि सबके साथ मिलकर ही विकास हो पाता है।
राजसमंद से अश्विनी प्रताप की रिपोर्ट