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राखड़ के परिवहन में नियम-कायदे नजरअंदाज, खुले वाहनों में हो रहा परिवहन

प्रशासन, पुलिस व कंपनी साधे है चुप्पी, वायु प्रदूषण से राहत की कवायद हवाहवाई

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सिंगरौली. वायु प्रदूषण का सबब बने विद्युत उत्पादक कंपनी से निकलने वाले राखड़(फ्लाईऐश) के परिवहन में मनमानी जारी है। राहत को लेकर जारी दिशा-निर्देश को नजरअंदाज किया जा रहा है। नतीजा वायु प्रदूषण के चलते होने वाली फजीहत पूर्व की भांति बरकरार है। वस्तुस्थिति भयावह है। इसके बावजूद प्रशासन, पुलिस व कंपनी के अधिकारी चुप्पी साधे हुए हैं। जिम्मेदारों की खामोशी के चलते स्थानीय लोगों के साथ बाहरी लोग भी वायु प्रदूषण का दंश झेल रहे हैं।

फ्लाईऐश परिवहन के चलते होने वाले प्रदूषण से लोगों को राहत मिले। इस मंसा से नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल की ओर से गाइडलाइन जारी की गई है। सडक़ मार्ग से परिवहन की स्थिति में जारी गाइड लाइन पर अमल कराने को लेकर जिला प्रशासन की ओर से निर्देश जारी किया गया है, लेकिन राखड़ के परिवहन में लगे ट्रांसपोर्टर निर्देश पर अमल करने की जरूरत नहीं समझ रहे हैं। राखड़ परिवहन में उनकी ओर से खुलेआम मनमानी की जा रही है। राखड़ का परिवहन बंद वाहन में हो, ये सबसे मुख्य निर्देश है। इसी पर अमल नहीं किया जा रहा है।

हर रोज निकल रहे 200 से अधिक वाहन

राखड़ परिवहन में लगे 200 से अधिक वाहन वायु प्रदूषण का सबब बन रहे हैं। बलियरी व शाहपुर फ्लाईऐश डैम में राखड़ लोड करने के लिए खुले वाहनों की लंबी कतार लग रही है। ट्रांसपोर्टर ओवरलोड वाहनों को तिरपाल से ढक कर केवल खानापूर्ति कर रहे हैं। नतीजा परिवहन के दौरान राखड़ का मलबा वाहन से सडक़ पर गिरता है और सूखने के बाद राख की धूल उडकऱ लोगों की सांसों में समाती है।

ये निर्देश हैं जारी, नहीं हो रहा पालन

– राखड़ का परिवहन कैप्सूल वाहन जैसे बंद वाहनों में करना है, लेकिन ट्रांसपोर्टर परिवहन में ट्रक, डंपर, हाइवा व टिपर जैसे खुले वाहनों को लगा रखे हैं।

– राखड़ का परिवहन करने वाले वाहन किसी भी स्थिति में ओवर लोड नहीं हो, लेकिन शत-प्रतिशत वाहन ओवरलोड होकर खदान से निकलते हैं।

– निर्देश है कि राखड़ के परिवहन में लगे वाहनों से मलबा सडक़ पर नहीं गिरना चाहिए। ओवरलोड होने के चलते पूरे रास्ते मलबा सडक़ पर बिखरता है।

– परिवहन के लिए रूट और समय भी निर्धारित करने का निर्देश है, लेकिन वाहनों द्वारा पूरे समय राखड़ का परिवहन किया जा रहा है।

– राखड़ के परिवहन में एसडीएम की ओर से नियमित निगरानी की जाएगी, लेकिन कई महीनों से एक भी वाहन पर कार्रवाई नहीं की गई है।

राखड़ के उपयोग का है निर्देश

दरअसल राखड़ का परिवहन उसके अधिक से अधिक उपयोग की मंसा से किया जा रहा है। राखड़ से होने वाले प्रदूषण से राहत के लिए फ्लाईऐश का उपयोग हाईवे के निर्माण, फ्लाईऐश व सीमेंट फैक्ट्रियों करना है। इस उद्देश्य से कंपनियां 300 किलोमीटर दायरे तक नि:शुल्क राख उपलब्ध करा रही हैं, लेकिन मनमानी के चलते प्रदूषण से राहत के लिए शुरू कवायद ही प्रदूषण का सबब बन गई है।

वर्जन –

राखड़ का परिवहन बंद वाहनों में करना है। किसी भी स्थिति में वाहन ओवरलोड नहीं होने चाहिए। लगातार मिल रही वायु प्रदूषण की शिकायत और दुर्घटनाओं से राहत के लिए निर्देश जारी किया गया है। सभी को निर्देश का पालन करना अनिवार्य है। इस संबंध में संबंधित अधिकारियों से बात की जाएगी।

चंद्रशेखर शुक्ल, कलेक्टर सिंगरौली।