
US Visa (Representational Photo)
अमेरिका (United States of America) में डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) के प्रशासन ने अब तक H-1B वीज़ा से जुड़े नियमों में समय-समय पर कई बदलाव किए हैं। पिछले साल ट्रंप प्रशासन ने इस वीज़ा के लिए 1 लाख डॉलर का शुल्क भी तय किया था, जिसके बाद कई लोगों खासतौर पर भारतीय नागरिकों की मुश्किलें बढ़ गई थीं। हालांकि अब अमेरिका इस नियम में बदलाव की तैयारी में है।
अमेरिका अब H-1B वीज़ा पर लगने वाले 1 लाख डॉलर के शुल्क को हटाने की तैयारी में है। अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में हाल ही में एक महत्वपूर्ण द्विदलीय विधेयक पेश किया गया। इस विधेयक में H-1B वीज़ा पर लगने वाले भारी-भरकम शुल्क को हटाने का प्रस्ताव है।
इस विधेयक के ज़रिए H-1B वीज़ा पर लगने वाले शुल्क को हटाकर विदेशी हेल्थकेयर और अन्य पेशेवरों के लिए वित्तीय बाधाओं को दूर करना है। यह विधेयक डॉक्टरों, नर्सों और अन्य विदेशी स्वास्थ्यकर्मियों के लिए लागू 1,00,000 डॉलर के भारी-भरकम शुल्क को माफ करने का प्रस्ताव पेश करता है। अमेरिकी सांसदों के एक समूह द्वारा पेश इस विधेयक का मुख्य लक्ष्य उन अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों पर पड़ने वाले आर्थिक दबाव को कम करना है, जो विदेशी पेशेवरों पर निर्भर हैं। एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर यह शुल्क हटता है, तो स्टाफ की कमी से जूझ रहे अमेरिकी अस्पतालों के लिए विदेशी डॉक्टरों और नर्सों की नियुक्ति आसान और किफायती हो जाएगी। इससे भारतीयों को फायदा होगा।
गौरतलब है कि H-1B वीज़ा पर यह विवादित शुल्क पिछले साल ट्रंप प्रशासन ने लागू किया गया था। इसके तहत अमेरिकी नियोक्ताओं को प्रत्येक नए कुशल विदेशी कर्मी की नियुक्ति पर एक लाख डॉलर का भुगतान करना अनिवार्य था। यह नियम अमेरिकी अस्पतालों के लिए एक बड़ी परेशानी बन गया है, क्योंकि विदेशी स्टाफ के अभाव में उन पर वित्तीय बोझ बढ़ता जा रहा है।
ट्रंप प्रशासन को उम्मीद थी कि H-1B वीज़ा पर 1 लाख डॉलर का शुल्क लगाने से उन्हें वित्तीय रूप से काफी फायदा होगा। हालांकि उनका यह फैसला फायदेमंद नहीं, बल्कि नुकसानदायक बन गया क्योंकि इसका खामियाजा अमेरिका को भुगतना पड़ रहा है। अमेरिका में मध्यम आकार की कंपनियों और परामर्श फर्मों ने इस भारी वीज़ा शुल्क का भुगतान करने के बजाय नौकरी के प्रस्ताव रद्द कर दिए हैं, कार्यभार ग्रहण करने की तिथियों में देरी की है या अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भर्ती पूरी तरह से रोक दी है। इस वजह से अमेरिका को 2 करोड़ डॉलर से ज़्यादा का नुकसान हो चुका है।
Updated on:
20 Mar 2026 06:43 am
Published on:
20 Mar 2026 06:38 am
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