
श्रीगंगानगर. शहर में एकत्रित होने वाले कचरे के निस्तारण को लेकर नगर परिषद की ओर से प्रस्तावित कचरा प्लांट तो सर्वे टीम को नहीं मिला लेकिन नेतेवाला में इस प्लांट के लिए आरक्षित की भूमि पर सिर्फ चारदीवारी देख हैरानगी जताई। नगर परिषद प्रशासन ने चक 6 जेड के ग्रामीणों की ओर से हाइकोर्ट में दायर याचिका में नेतेवाला में प्लांट लगाने के बारे में जवाब पेश किया था। सर्वे टीम ने नेतेवाला में प्लांट भूमि पर अस्थायी गोशाला देखकर उसकी फोटोग्राफी कर दिल्ली भिजवाई है। इधर, स्वच्छता सर्वेक्षण-2024 के लिए दिल्ली से आई टीमों ने शहर के पांच वार्डों में औचक निरीक्षण किया। इन टीमों ने घरों और दुकानों पर जाकर वहां लोगों से कचरा उठाव की प्रक्रिया जानी। इस टीम ने वार्ड 44,45, 51, 61, 62 में पानी निकासी, कचरा पात्र से नियमित कचरे का उठाव, लोगों से गीले व सूखे कचरे के निस्तारण से संबंधित लोगों से फीडबैक लिया। इस बीच, चक 6 जेड ए के डंपिंग प्वाइंट पर कचरे का निस्तारण करने के लिए करीब दो साल पहले 11 सितंबर 22 को कलक्ट्रेट परिसर में तत्कालीन जिला कलक्टर रुक्मणि रियार की मौजूदगी में नगर परिषद और संयुक्त संघर्ष समिति के बीच सहमति बनी थी। इसमें दो महीने में कचरा निस्तारण के लिए एक मशीन खरीद कर स्थापित करनी थी लेकिन यह मशीन अब तक स्थापित नहीं की गई है। शहर के 65 वार्डों से रोजाना 86 टन कचरा निकलता है। केन्द्र सरकार ने स्वच्छ भारत मिशन शहरी योजना के तहत ठोस कचरा प्लांट लगाने के लिए डीएलबी को अधिकृत किया था। हालांकि स्वायत्त शासन विभाग जयपुर ने गुजरात की फर्म मैसर्स डीएच पटेल को चार करोड़ 66 लाख रुपए का वर्क ऑर्डर किया था। इस ठेका कंपनी ने प्लांट लगाने की प्रक्रिया बीच में ही रोक दी। इस प्रक्रिया के अटकने से शहर का नंबर केन्द्र सरकार की स्वच्छता रैकिंग में नहीं आ रहा।
जिला कलक्टर बोलीं: इसलिए नहीं लग रहा प्लांट
इधर, जिला कलक्टर डॉ. मंजू का कहना है कि कचरा प्लांट लगाने के लिए टेंडर भी जारी हुए लेकिन राज्य प्रदूषण बोर्ड से अब तक इस प्लांट लगाने के लिए एनओसी नहीं मिली है। इस एनओसी के लिए पत्र व्यवहार किए गए हैं। वहीं जिले के प्रभारी मंत्री सुमित गोदारा का कहना था कि सरकार के स्तर पर इस मामले को लेकर संज्ञान लिया जाएगा। गोदारा ने दावा किया कि राज्य प्रदूषण बोर्ड से एनओसी मिलने के उपरांत यह प्लांट लगाने में देर नहीं करेंगे।