
Sri Ganganagar: छापेमारी के दौरान दुकान के बाहर तैनात पुलिस (फोटो- पत्रिका)
श्रीगंगानगर। रायसिंहनगर शहर में बीते मंगलवार एक सीए के कार्यालय में आयकर विभाग की टीम की छापेमारी के बाद अरबों रुपए के फर्जी विदेशी रेमिटेंस घोटाले का पर्दाफाश हुआ है। आयकर विभाग के अनुसार फर्जी दस्तावेजों के आधार पर 815 करोड़ रुपये से अधिक की रकम विदेश भेजे जाने का मामला सामने आया है। विभाग की जांच के आधार पर चार्टर्ड अकाउंटेंट शेरिल गुप्ता के खिलाफ धोखाधड़ी और कथित फर्जी प्रमाण-पत्र जारी करने के आरोप में आयकर विभाग (जांच) श्रीगंगानगर के उप निदेशक कन्हैया लाल मीना की ओर से शुक्रवार को पुलिस में मामला दर्ज करवाया है।
18 अगस्त को जयपुर से पहुंची आयकर विभाग की टीम ने पुरानी धान मंडी स्थित मैसर्स शेरिल गुप्ता एसोसिएट के कार्यालय पर सर्वे किया था। सर्वे में पाया गया कि सीए शेरिल गुप्ता ने वित्तीय वर्ष 2021-22, 2022-23 और 2023-24 के दौरान कुल 1674 फॉर्म 15 सीबी जारी किए। विभाग के अनुसार इनमें से 1405 फॉर्म 15सीबी का डेटा डाउनलोड किया जा सका, जिससे पता चला कि 56 अलग-अलग रेमिटर कंपनियों और व्यक्तियों के जरिए 8 अरब 15 करोड़ 52 लाख 13 हजार 553 रुपए विदेश भेजे गए हैं। बाकी 269 फॉर्म 15 सीबी का डेटा डाउनलोड न हो पाने से विभाग को आशंका है कि घोटाले की रकम इससे भी ज्यादा हो सकती है।
फॉर्म 15 सीबी वह अनिवार्य प्रमाण पत्र है, जो भारत से बाहर पैसा भेजने से पहले चार्टर्ड अकाउंटेंट द्वारा यह प्रमाणित करने के लिए दिया जाता है कि संबंधित रकम पर टैक्स देनदारी क्या है और डीटीएए का लाभ सही है या नहीं।
आईआईएफ रिपोर्ट में 56 एंटिटी को शेल या बोगस बताया गया है। इनका नेटवर्क कर्नाटक, केरल, महाराष्ट्र, गुजरात, दिल्ली, गोवा, हिमाचल, पंजाब और राजस्थान तक फैला है। जांच में कई कंपनियां या तो आयकर रिटर्न दाखिल नहीं कर रही थीं या कम टर्नओवर दिखा रही थीं, जबकि फ्रेट, शिपिंग और सॉफ्टवेयर सेवाओं के नाम पर विदेशों में बड़ी रकम भेजी गई।
रिपोर्ट के अनुसार सबसे बड़ा मामला बेंगलुरु के अरशद खान से जुड़ा है। उसके जरिए 990 ट्रांजेक्शन में 610.55 करोड़ रुपए विदेश भेजे गए। केरल के कोच्चि में एक ही पते से संचालित दो एंटिटी के जरिए 44.63 करोड़ और 28.17 करोड़ रुपए भेजे गए। गुजरात की एल कॉमेटिडो मरीन शिपिंग ने 39.96 करोड़ रुपए विदेश भेजे। इसके अलावा मुंबई, कांगड़ा, भुवनेश्वर और गुरुग्राम की कंपनियां भी संदिग्ध लेन-देन में शामिल बताई गई हैं।
आयकर विभाग के अनुसार नियम 37 बीबी के तहत विदेश में भुगतान भेजने के लिए फॉर्म 15 सीबी जारी करते समय चार्टर्ड अकाउंटेंट को रेमिटर और विदेशी प्राप्तकर्ता के बीच हुए करार, बिल, बही-खाते तथा टीडीएस की दर की गहन जांच करनी होती है। आरोप है कि संबंधित सीए ने इन जरूरी दस्तावेजों की जांच किए बिना ही प्रमाण पत्र जारी कर दिए। वहीं सर्वे के दौरान लिए गए बयान में आरोपी सीए ने कथित तौर पर स्वीकार किया कि उसने दस्तावेज और बही-खाते देखे बिना प्रमाण पत्र जारी किए।
विभाग का आरोप है कि यह काम अवैध आर्थिक लाभ के लिए किया गया। आयकर विभाग के मुताबिक बिना टीडीएस काटे और वास्तविक सेवा के अभाव में विदेशों में रकम भेजना भारतीय रिजर्व बैंक के प्रावधानों तथा एफईडी मास्टर डायरेक्सन का उल्लंघन है।
आयकर विभाग का आरोप है कि गलत प्रमाणपत्रों के आधार पर विदेश में रकम भेजी गई, जिससे देश के विदेशी मुद्रा भंडार को नुकसान हुआ। एफआईआर में भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4), 234, 229 और 3(5) के तहत कार्रवाई की गई है। इस मामले में 21 अगस्त को रायसिंहनगर थाने में सीए और 56 अन्य लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई गई।
Updated on:
22 Aug 2026 10:33 pm
Published on:
22 Aug 2026 10:33 pm
