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श्रीगंगानगर मंडी भाव: चीनी-गुड़ के दामों में उछाल, स्टॉक की कमी से मंडियों में बढ़ी टेंशन; जानें रेट में तेजी की वजह

पिछले एक महीने से चीनी और गुड़ की कीमतों में लगातार तेजी दर्ज की जा रही है, जिससे आम जनता पर आर्थिक बोझ बढ़ गया है। चीनी के दामों में 15 से 17 रुपए प्रति किलो और गुड़ में 22 से 25 रुपए प्रति किलो तक की बढ़ोतरी हुई है। इसका मुख्य कारण चीनी मिलों में स्टॉक की कमी और गन्ने का एथेनॉल उत्पादन में इस्तेमाल होना है।
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चीनी-गुड़ के दाम में उछाल, स्टॉक की कमी से बढ़ी चिंता (फोटो पत्रिका नेटवर्क)

मिर्जेवाला (श्रीगंगानगर): पिछले एक महीने से चीनी और गुड़ के भाव में लगातार तेजी देखने को मिल रही है। आमजन की जेब पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ रहा है। बढ़ते दामों के बोझ को लेकर श्री गुड़ शुगर परसेंट संगठन, श्रीगंगानगर के अध्यक्ष कालीचरण अग्रवाल ने बताया कि इस अवधि में चीनी के भाव में करीब 15 से 17 रुपए प्रति किलो तथा गुड़ के भाव में 22 से 25 रुपए प्रति किलो तक की बढ़ोतरी हुई है।

उन्होंने बताया कि वर्तमान में एल-साइज चीनी का थोक भाव करीब 6250 रुपए प्रति क्विटल चल रहा है। वहीं, महाराष्ट्र की स्मॉल साइज चीनी करीब 5,400 से 5,500 रुपए प्रति क्विंटल तथा अन्य चीनी 6,100 से 6,200 रुपए प्रति क्विंटल के भाव में बिक रही है। जीएसटी, मंडी टैक्स सहित अन्य खर्च जुड़ने से उपभोक्ताओं तक पहुंचते-पहुंचते कीमत और बढ़ जाती है।

मिलों में स्टॉक की कमी का मुख्य कारण

अग्रवाल के अनुसार, चीनी के भाव बढ़ने का प्रमुख कारण चीनी मिलों में स्टॉक की कमी है। इस वर्ष सरकार को दिए गए चीनी उत्पादन के आंकड़ों में वास्तविक उत्पादन की तुलना में अधिक उत्पादन बताया गया। सरकार की ओर से चीनी मिलों में उपलब्ध स्टॉक का 15 अगस्त तक भौतिक सत्यापन करवाया गया था, लेकिन इसकी आधिकारिक रिपोर्ट अभी सार्वजनिक नहीं हुई है। व्यापारियों से मिल रही जानकारी के अनुसार, आगामी नवंबर तक चीनी की उपलब्धता को लेकर स्थिति चिंताजनक है। यदि स्टॉक की कमी बनी रही तो आने वाले दिनों में बाजार भाव पर दबाव बढ़ सकता है।

गन्ने के एथेनॉल में इस्तेमाल से भी घटी चीनी की उपलब्धता

अग्रवाल ने बताया कि गन्ने के उत्पादन में कमी के साथ ही इस वर्ष गन्ने का एक हिस्सा करीब तीन महीने तक एथेनॉल उत्पादन में इस्तेमाल किया गया। इससे चीनी उत्पादन के लिए उपलब्ध गन्ने की मात्रा प्रभावित हुई और मिलों में चीनी का स्टॉक अपेक्षाकृत कम रह गया। उन्होंने इसे मौजूदा तेजी का एक प्रमुख कारण बताया।

अक्टूबर में शुरू हो सकता है नया पिराई सत्र

चीनी मिलों का नया पिराई सत्र सामान्यतः अक्टूबर के अंतिम सप्ताह से नवंबर के बीच शुरू होता है और करीब छह से आठ महीने तक चलता है। वहीं, छोटी चीनी मिलें करीब तीन से चार महीने तक संचालित होती हैं। अग्रवाल के अनुसार, सरकार ने घोषणा की है कि नए सत्र में करीब तीन महीने तक गन्ने का इस्तेमाल एथेनॉल के लिए नहीं किया जाएगा और गन्ने से चीनी उत्पादन को प्राथमिकता दी जाएगी। मौजूदा स्टॉक की कमी की भरपाई के लिए सरकार चीनी मिलों को अक्टूबर के मध्य से ही शुरू करवाने की तैयारी कर रही है।

हालांकि, मिलों में श्रमिकों की उपलब्धता भी चुनौती है, क्योंकि बड़ी संख्या में श्रमिक दीपावली के बाद पहुंचते हैं। व्यापारियों और उपभोक्ताओं की नजर अब सरकार की भौतिक सत्यापन रिपोर्ट और नए चीनी पेराई सत्र की शुरुआत पर टिकी है। इन दोनों के बाद ही बाजार में चीनी की वास्तविक उपलब्धता और आगामी भावों की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

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