18 अगस्त 2026,

मंगलवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

खजूर की खेती को सरकार का सहारा,पौधों की सप्लाई ने दिया झटका

श्रीगंगानगर को 1878 और हनुमानगढ़ को केवल 230 पौधे मिले हैं। इसके मुकाबले पाली को 6057 और बाड़मेर को 3040 पौधे आवंटित किए गए हैं। जालौर में 713, जैसलमेर में 50, बीकानेर में 49 और झुंझुनूं में सात पौधे दिए गए हैं, जबकि अजमेर को एक भी पौधा नहीं मिला।
2 min read
Google source verification
Sri Ganganagar: A date palm sapling planted in a farmer's field

Sri Ganganagar: A date palm sapling planted in a farmer's field

  • श्रीगंगानगर.रेगिस्तान की जमीन पर खजूर की खेती किसानों के लिए नई उम्मीद बनकर उभर रही है। श्रीगंगानगर-हनुमानगढ़ में पुराने बागों में उत्पादन और बाजार में बेहतर भाव मिलने के बाद किसान अब खजूर का रकबा बढ़ाने की तैयारी में हैं। खेत तैयार हैं,किसानों ने आवेदन कर दिए हैं और नए बाग लगाने की योजना भी बना ली है,लेकिन टिश्यू कल्चर पौधों की कमी ने इस विस्तार की रफ्तार थाम दी है। गुणवत्तापूर्ण पौधों की मांग लगातार बढ़ रही है,लेकिन उपलब्धता उसके मुकाबले काफी कम है। इसका सीधा असर नए बागों पर पड़ रहा है। कई किसानों को पर्याप्त संख्या में पौधे नहीं मिल पा रहे हैं। ऐसे में सरकारी स्तर पर खजूर खेती को बढ़ावा देने के प्रयासों के बावजूद पौधों की कमी किसानों के सामने बड़ी बाधा बन गई है।उद्यान विभाग के आंकड़ों के अनुसार प्रदेश के नौ जिलों में कुल 11,396 टिश्यू कल्चर पौधों का आवंटन किया गया है। इनमें श्रीगंगानगर को 1878 और हनुमानगढ़ को केवल 230 पौधे मिले हैं। इसके मुकाबले पाली को 6057 और बाड़मेर को 3040 पौधे आवंटित किए गए हैं। जालौर में 713, जैसलमेर में 50, बीकानेर में 49 और झुंझुनूं में सात पौधे दिए गए हैं, जबकि अजमेर को एक भी पौधा नहीं मिला।

श्रीगंगानगर में मांग दोगुने से अधिक

  • श्रीगंगानगर में पौधों की कमी की स्थिति और गंभीर है। जिले में ऑफटाइप पौधों के स्थान पर 3810 टिश्यू कल्चर पौधों की मांग की गई थी, लेकिन इसके मुकाबले 1878 पौधों की ही आपूर्ति मिलेगी। इसके अलावा 50 से अधिक किसानों की करीब 80 हेक्टेयर क्षेत्र की फाइलें नए खजूर बाग लगाने के लिए लगी हुई हैं। ऐसे में पर्याप्त पौधे नहीं मिलने से कई किसानों की बाग लगाने की योजना अटक रही है।हनुमानगढ़ में भी खजूर खेती के प्रति किसानों का रुझान बढ़ा है, लेकिन यहां महज 230 पौधों का आवंटन हुआ है। किसानों का कहना है कि सरकार खेती को प्रोत्साहित कर रही है, ऐसे में पौधों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करना भी जरूरी है।

ऑफटाइप के बाद टिश्यू कल्चर पर भरोसा

  • खजूर किसानों को पहले ऑफटाइप पौधों के कारण नुकसान उठाना पड़ा था। अब टिश्यू कल्चर पौधों को बेहतर गुणवत्ता और उत्पादन के लिहाज से उम्मीद की नजर से देखा जा रहा है। बरही, खलास और मेडजूल जैसी किस्मों की मांग बढ़ रही है। हालांकि शुरुआती तीन-चार साल उत्पादन नहीं मिलने और तकनीकी देखरेख की जरूरत के कारण यह लंबी अवधि का निवेश है।

प्रदेश में पौधों का आवंटन

  • कुल 11,396 पौधे9 जिले
  • जिला पौधे
  • पाली 6057बाड़मेर 3040
  • श्रीगंगानगर 1878जालौर 713
  • हनुमानगढ़ 230जैसलमेर 50
  • बीकानेर 49झुंझुनूं 7
  • अजमेर 0

पत्रिका व्यू--पौधे नहीं तो बाग कैसे बढ़ेंगे?

  • जब किसान खजूर का रकबा बढ़ाने को तैयार हैं और सरकार भी इस खेती को प्रोत्साहित कर रही है,तो मांग के अनुरूप टिश्यू कल्चर पौधों की आपूर्ति क्यों नहीं बढ़ाई जा रही? खेत तैयार हैं, किसान तैयार हैं, लेकिन पौधों की कमी नए बागों के रास्ते में दीवार बन गई है। समय पर आपूर्ति नहीं बढ़ी तो रेगिस्तान में आकार ले रही खजूर क्रंति की रफ्तार धीमी पड़ सकती है।

वर्जन

  • जिले में 3810 टिश्यू कल्चर पौधों की मांग थी, जबकि 1878 पौधों की आपूर्ति मिलेगी। इसके अलावा 50 से अधिक किसानों की करीब 80 हेक्टेयर क्षेत्र की फाइलें नए खजूर बाग लगाने के लिए लगी हुई हैं। मांग के अनुरूप पौधों की आपूर्ति नहीं हो पा रही है।
  • -कविता स्वामी, सहायक निदेशक (उद्यान), श्रीगंगानगर

बड़ी खबरें

View All

श्री गंगानगर

राजस्थान न्यूज़

ट्रेंडिंग