राज्य के डिग्री इंजीनियरिंग कॉलेजों की हालत बिना विद्यार्थियों के दयनीय हो गई है। स्वनिर्भर के साथ-साथ अब तो सरकारी और अनुदानित कॉलेजों को भी विद्यार्थी नहीं मिल रहे हैं। रिक्त पड़ी 34 हजार से अधिक सीटों को भरना नामुमकिन सा हो गया है। सरकारी और अनुदानित 2900 सीटों को भरने के लिए प्रवेश समिति ने विशेष राउंड भी आयोजित किया। जिसमें 5500 विद्यार्थी ने सहमति दिखाई थी, लेकिन सिर्फ 747 विद्यार्थियों ने ही प्रवेश लिया। इस विशेष राउंड के बाद भी सरकारी कॉलेजों में 2200 सीटें खाली पड़ी हैं।