टोंक. बीसलपुर बांध का गेज शुक्रवार सुबह 315.50 आरएल मीटर होने पर बांध के गेट खोले जाने की प्रक्रिया शुरू की गई। बांध के गेट खोलने से पहले परियोजना अधिकारियों ने एक घंटे तक हूटर बजा कर चेतावनी जारी की। वहीं इससे पहले बनास नदी क्षेत्र के गांवों में अलर्ट जारी कर दिया गया था। बीसलपुर बांध से छोड़े जाने वाला पानी बनास से चम्बल नदी एवं चम्बल नदी से गंगा नदी होते हुए बंगाल की खाड़ी में जाता है।
बांध बनने के बाद पहली बार 2001 में 311आरएल मीटर का भराव हुआ। वहीं 2004, 2006, 2014, 2016 व 2019 में पूर्ण जलभराव 315.50 आरएल मीटर होने के बाद बनास नदी में पानी की निकासी करनी पड़ी है। वहीं 2010 में बांध बनने के बाद सबसे कम गेज 298.67 आरएल मीटर दर्ज किया गया है, जिससे बांध पूर्ण रूप से सूखने के कगार पर पहुंच गया था।
शिलान्यास: 25 जनवरी 1985
निर्माण कार्य शुुरू: 1987 में
निर्माण पूरा हुआ: 1996 में
लागत: करीब 300क्र करोड़
कैचमेंट एरिया: लगभग 28 हजार 800 वर्ग किमी
कुल जलभराव क्षेत्र: 21 हजार 300 हेक्टेयर भूमि जलमग्न
पूर्ण रूप से डूब क्षेत्र: कुल 68 गांव
कुल जलभराव क्षमता: 315.50 आरएल मीटर
टोंक.
बीसलपुर बांध से वर्तमान में राज्य की करीब एक करोड़ की आबादी की प्यास बूझा रहा है। बांध बनने के बाद से लगातार अजमेर शहर के साथ ही जिले के गांव कस्बों में जलापूर्ति चालु है। वहीं 2009 से जयपुर शहर में पेयजल दिया जा रहा है। 2018 से टोंक देवली उनियारा शहरों में जलापूर्ति चालु कर दी गई। इसके बाद जिले के 438 गांव व कस्बों में जलापूर्ति हो रही है। अभी बांध से रोजाना 480 एमएलडी पानी जयपुर शहर, 330 एमएलडी अजमेर, 52 एम एल डी मालपुरा-दूदू,53 एमएलडी चाकसू व 50 एम एल डी बीसलपुर टोंक उनियारा पेयजल परियोजना के तहत देवली, टोंक व उनियारा शहरों व इससे जुड़े 436 गांव व कस्बों में पानी दिया जा रहा है।
जयपुर, अजमेर, टोंक व भीलवाड़ा की लाइफ-लाइन है बांध
अभी बांध से रोजाना 480 एमएलडी पानी जयपुर शहर, 330 एमएलडी अजमेर, 52 एम एल डी मालपुरा-दूदू, 53 एमएलडी चाकसू व 50 एम एल डी को दिया जा रहा है