
उमेश मेनारिया/उदयपुर . बर्ड विलेज मेनार की आबोहवा स्थानीय व प्रवासी पक्षियों सहित दुर्लभ पक्षियों को भी रास आ रही है। अक्सर कम दिखाई देने वाले परिंदों को भी यहां देखा जा रहा है। गुरुवार को मेनार आए पक्षीविदों ने धण्ड तालाब के पास खेत में लाल मुनिया (रेड अवाडवट) को देखा। वाइल्ड लाइफ फोटोग्राफर उत्तम पेगु, डॉ. दुर्गेश शर्मा, विजेंद्र प्रकाश परमार ने बताया कि पक्षी दर्शन के दौरान लाल मुनिया को देखा गया। बताया गया कि यह छोटे समूहों में घास के बीच खाने निकलती है। पहले लाल मुनिया आमतौर पर देखी जाती थी, लेकिन काफी समय से ये कम दिखने लगी है।
वन्यजीव विशेषज्ञ बताते हैं कि देशभर में पाई जाने वाली मुनिया में उदयपुर सम्भाग में ब्लैक थोर्टेट मुनिया और वाइट रम्पड मुनिया नहीं देखी गई। राजस्थान में इंडियन सिल्वर बिल, ब्लैक हेडेड मुनिया, रेड मुनिया, ग्रीन मुनिया और स्केली ब्रस्टेड मुनिया प्रजातियां पाई जाती है। रेड मुनिया अक्सर कम दिखाइ देने वाली प्रजाति की और शर्मिली होती है। यह गोरैया के आकार की सुर्ख लाल रंग और चमकीली तिकौनी छोटी चोंच वाला, आकर्षक पक्षी है। यह कुछ विशिष्ट प्रकार की घास के बीजों को खाती है। मंद-मंद कलरव करती है। आमतौर पर पानी वाली जगहों, घास के मैदानों, गन्ने के खेतों के आस-पास व झीलों के किनारे घास में रहती है।
READ MORE : VIDEO : पढ़िए एक अंधे पिता की तीन नेत्रहीन संतानें और सरकारी संवेदनहीनता की पोल खोलने वाली यह कहानी…
रेड मुनिया का दिखना सुखद
वन्यजीव विशेषज्ञ डॉ. सतीश शर्मा ने बताया कि अपेक्षाकृत लाल मुनिया कम दिखाई देती है। पहले ये आसानी से खेतों में दिख जाती थी। इसका दिखाई देना क्षेत्र के लिए सुखद पहलू है। गन्ना की फसल और अन्य विशिष्ट प्रजाति की घास भी कम हो रही है। इसी से खेतों में लाल मुनिया का आवास कम होने लगा है। जलाशयों के सिकुडऩे से संकट बन रहा है। — डॉ. सतीश शर्मा, वन्यजीव विशेषज्ञ