उदयपुर जिले की कोटड़ा तहसील में सेई नदी एवं साबरमती नदी पर चक सांडमारिया और बुझा गांव में 2554.23 करोड़ की लागत से बांध प्रस्तावित है। बांध निर्माण को रोकने और निरस्त कराने की मांगों को लेकर स्थानीय जनप्रतिनिधियों सहित 10 ग्राम पंचायतों के सैकड़ों ग्रामीण ढोल बजाते हुए सोमवार को कोटड़ा उपखंड कार्यालय पहुंचे। यहां उपखंड कार्यालय का घेराव करते हुए अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ गए।
झाड़ोल विधायक बाबूलाल खराड़ी एवं कोटडा़ के पूर्व प्रधान मुरारीलाल बुम्बरीया का कहना है कि प्रस्तावित बांध को रोकने और निरस्त कराने को लेकर विधानसभा में भी मुद्दा उठाया है। इसके अलावा कई बार जिला कलक्टर एवं मुख्यमंत्री को ज्ञापन दे चुके हैं लेकिन किसी भी प्रकार का आश्वासन नहीं मिला है।
धरना प्रदर्शन के दौरान झाड़ोल विधायक बाबूलाल खराड़ी, कोटड़ा प्रधान सुगना देवी खैर, पूर्व प्रधान मुरारीलाल बुम्बरीया, पूर्व उप प्रधान जमना लाल बुम्बरीया, एडवोकेट हिम्मत तावड़, देवीलाल तराल, सामाजिक कार्यकर्ता सुरेश खैर, मांडवा सरपंच जीजा देवी,बाखेल सरपंच देवीलाल बुम्बरीया, कुकावास सरपंच रविन्द्र, झेड सरपंच अली चंद, कोदरमाल सरपंच प्रतिनिधि निर्मल कुमार बुम्बरीया, धधमता सरपंच भामा राम खेर, खजुरिया सरपंच विष्णु बुम्बरीया सहित ग्रामीण मौजूद रहे।
आदिवासियों को विस्थापित होना पड़ेगा
बुझा का नाका एवं चक सांडमारिया बांध का यदि निर्माण होता है, तो यहां से 10 ग्राम पंचायतों के करीबन 35 से 40 हजार गरीब आदिवासियों को विस्थापित होना पड़ेगा। यहां रहने वाले आदिवासियों के पास मुश्किल से एक बीघा से लेकर पांच बीघा तक ही जमीन है। गरीब लोग इसी से अपनी आजीविका चला रहे हैं। पूर्व में भी सेई बांध निर्माण के दौरान हजारों परिवारों को विस्थापित होना पड़ा है।
दस ग्राम पंचायतों के लोग बारी-बारी से बैठेंगे धरने पर
धरना प्रदर्शन के दौरान जनप्रतिनिधियों एवं ग्रामीणों ने बांध निर्माण रोकने और निरस्त कराने को लेकर मुख्यमंत्री और उच्च अधिकारियों से अपील की है। प्रस्तावित बांध निरस्त करने का आदेश जब तक लिखित में नहीं मिलता है, तब तक दस ग्राम पंचायतों के लोग बारी-बारी से पंचायत वार हर दिन उपखंड कार्यालय के सामने अनिश्चित कालीन धरना प्रदर्शन करेंगे।