उदयपुर. मेवाड़ के लोग प्रकृति के प्रति संवेदनशील हैं। गांवों में अपनी परंपराएं जीवित रखी हुई हैं। पेड़ों में भी संवेदनाएं होती है। किसी एक पेड़ से दोस्ती करो और अपने सुख-दुख की बातें करो। उनसे आपको पॉजिटिव एनर्जी प्राप्त होगी। सौ पेड़ लगाकर छोड़ने से बेहतर है, दो पेड़ लगाकर उनकी देखभाल की जाए।