उन्नाव. 500 शिक्षामित्र आत्महत्या कर चुके हैं और जो बचे हैं उनका जीवन बहुत ही कष्टकारी हो गया है। ऐसे अन्य कई शिक्षक हैं जो अवसाद की स्थिति में हैं। यह स्थिति तब है जब शिक्षामित्र स्नातक द्विवर्षीय BTC ट्रेन्ड हैं। इसके बाद भी उनका समायोजन उच्चतम न्यायालय के आदेश के बाद रद्द कर दिया गया है। यह कहना है उत्तर प्रदेश शिक्षामित्रों का जो उत्तर प्रदेश शिक्षामित्र संघ के जिला अध्यक्ष के नेतृत्व में शिक्षा मंत्री उत्तर प्रदेश शासन को ज्ञापन देने के लिए मुख्यालय स्थित PWD गेस्ट हाउस में एकत्र हुए। लेकिन शिक्षा मंत्री के मौके पर न पहुंचने के कारण निराश हो गए। इस मौके पर PWD गेस्ट हाउस में जिला कार्यक्रम अधिकारी के साथ ब्लॉक के सीडीपीओ भी मौजूद थे। शिक्षामंत्री के न आने से उन्हें राहत महसूस हुई, लेकिन शिक्षामित्र खासे निराश दिखे।
शिक्षामित्रों द्वारा दिए जाने वाले ज्ञापन में बताया गया था कि 25 जुलाई 2017 को माननीय उच्चतम न्यायालय के आदेश के बाद 1,72,000 शिक्षामित्रों का समायोजन निरस्त कर दिया गया है। शिक्षामित्रों का समायोजन निरस्त किए जाने के बाद से उनके परिवार का जीवन कष्ट में हो गया है। उन्होंने कहा है कि ऐसे समय जबकि उन्होंने लगभग 19 साल शिक्षक के रूप में अपनी सेवाएं विभिन्न विद्यालयों में दे चुके हैं। तमाम शिक्षामित्र उम्रदराज हो चुके हैं। अब उनके सामने कोई दूसरा विकल्प भी नहीं है।
सुधाकर तिवारी ने बताया कि वह 1999 से शिक्षामित्र के पद पर कार्यरत हैं। एनसीटीई के पैरा 4 में संशोधन कर उत्तराखंड के अनुरूप उसी पद पर समायोजित करके 4 साल का TET करने का समय दिया जाए। बेसिक में कार्यरत शिक्षामित्रों को मात्र 1 माह का वेतन मानदेय दिया गया है। अपने ज्ञापन में उन्होंने लगभग 6 महीने का मानदेय दिलाए जाने की मांग की है।
शिक्षामित्र संघ की मांग
शिक्षामित्र संघ ने अपने ज्ञापन में कहा है कि विकल्प के रूप में उन्हें उनके मूल विद्यालय में प्रतिस्थापित कर दिया जाए। जब तक कोई स्थाई व्यवस्था ना हो। समान कार्य समान वेतन दिया जाए। शिक्षामित्र संघ ने लिखा है कि विगत 17 वर्षों से शिक्षण कार्यों के साथ शासन के सारे महत्वाकांक्षी योजनाओं में विशेष रूप से शिक्षा मित्रों का योगदान रहता है। जो शासन के संज्ञान में हैं। उन्होंने कहा है कि उनके कार्यों को देखते हुए शिक्षक का सम्मान दिलाया जाए।
ये रहे मौजूद
इस मौके पर ज्ञान दीक्षित, गंगा बख्श सिंह, कुलदीप शुक्ला, रामेंद्र द्विवेदी, रामेंद्र सिंह, स्नेह सिंह, सर्वेश शर्मा, धर्मेंद्र , अनिल यादव आदि मौजूद थे। काफी लंबे इंतजार के बाद उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षामित्र संघ को जानकारी मिलेगी शिक्षा मंत्री सीधे शुक्लागंज निकल गई जिससे उन्हें निराशा हाथ लगी।