वाराणसी. सदी के सबसे लंबे खग्रास चंद्र ग्रहण पर काशी के गंगा तटों पर पूरी रात जमी रही भक्तों की टोली। रात भर चला भजन-कीर्तन व पूजा पाठ। स्पर्श काल से लेकर मोक्ष काल तक हर भक्त चंद्रमा पर पड़े इस दारुण दुःख को हरने की कमाना करता रहा। अल सुबह जैसे ही ग्रहण काल पूर्ण हुआ भक्तों ने हर हर महादेव का उद्घोष किया और गंगा स्नान के पश्चात दीप दान और भगवान भाष्कर को अर्घ्य दान किया। फिर निकले तो ग्रहण के पश्चात पंडा, पुरोहित और इस मौके पर खास डोम को द्रव्य, वस्त्र, अन्न दान किया गया।
पूरी रात चला भजन कीर्तन
104 साल बाद पड़े इस चन्द्रग्रहण पर शुक्रवार और शनिवार की पूरी रात श्रद्धालुओ का जमावड़ा घाट पर लगा रहा। गंगा तट पर पहुंचे भक्तों ने परंपरागत रूप से तीन बार गंगा स्नान किया। मान्यताओं के तहत पहले स्पर्श काल का स्नान, फिर मध्य काल और अंत में मोक्ष काल के पश्चात। इधर रात ढलती रही और उधर भक्तों के गंगा तट पर पहुंचने का सिलसिला लगा रहा। घाट पर तिल रखने को जगह नहीं बची थी। बता दें कि शुक्रवार की देर रात 11.54 बजे चन्द्र ग्रहण लगा। ग्रहण लगने के बाद घाटो पर मौजूद श्रद्धालु वैदिक मंत्रों और राम नाम का जप करने में तल्लीन हो गए। क्या पुरुष, क्या महिला, क्या वृद्ध, यहां तक कि सदी की इस अद्वितीय खगोलीय घटना के साक्षी बनने के लिए युवाओं की भी लंबी फौज घाटों पर रात भर जमी रही। एक वक्त वो भी आया जब आकाश गंगा में बिल्कुल ही अंधेरा छा गया और यह काल भी तकरीबन एक घंटे का रहा। इस वक्त श्रद्धालुओं की चंद्रमा को लेकर व्यथा देखने काबिल थी। हर कोई ऐसा ध्यानमग्न दिखा कि मानों में विपदा उन पर ही आन पड़ी हो।
लगभग चार घंटे तक रहा ग्रहण
लगभग 4 घंटा लंबा इस ग्रहण का मोक्ष शनिवार की भोर में 3.49 बजे हुआ। इसके बाद गंगा घाटो पर स्नान पूजन का सिलसिला शुरू हो गया जो पौ फटने तक जारी रहा। गंगा स्नान के बाद भक्तों ने वहीं घूम रहे डोम परिवार को दान दिया। पंडों से संकल्प आदि ले कर उन्हें भी द्रव्य दान कर आगे बढ़े। अब शनिवार से सावन माह भी प्रारम्भ हो गया। ऐसे में ग्रहण से मुक्ति के बाद भक्तों का कारवां बाबा विश्वनाथ के जलाभिषेक के लिए निकल पड़ा।
4.30 बजे हुई काशी विश्वनाथ की मंगला आरती
चन्द्र ग्रहण के चलते शनिवार को श्री काशी विश्वनाथ की मंगला आरती निर्धारित समय से एक घंटे विलंब से 4.30 बजे शुरू हुई जो 5.30 बजे तक चली। इसके बाद बाबा का दरबार आम भक्तों के लिए खोल दिया गया। ग्रहण स्नान-दान करने से निवृत्त हो कर भक्त भोर से ही कतारबद्ध थे। धीरे-धीरे वो बाबा दरबार पहुंचे और काशी विश्वनाथ को जल, माला, फूल प्रसाद अर्पित किया। इस दौरान हर-हर महादेव के नारे से पूरा मंदिर प्रांगण गुंजायमान रहा। भक्तों ने इसके साथ ही काशी के अन्य देवालयों में भी दर्शन-पूजन किया।
भक्तो से पटा रहा शहर
चंद्र ग्रहण मोक्ष पर गंगा स्नान के लिए कावरिया शिविर के अलावा कैंट, सिटी स्टेशन, काशी स्टेशन एवं बस स्टेशन पर भी बाहर से आए तमाम श्रद्धालु ठहरे थे। दशाश्वमेध एवं शीतला घाट पर अधिक भीड़ रही। प्रमुख घाटों पर बैरिकेडिंग की गई थी। यातायात नियंत्रण की वजह से लोग घाट वाले मार्ग पर पैदल जा रहे थे।