मिर्जामुराद/वाराणसी. बिना किसी शासकीय पद पर आसीन हुए अपने कद को ऊंचाई दी। ह्रदय से क्रांतिकारी इस व्यक्तित्व का सार्वजनिक जीवन में उच्च स्थान था। ये बातें और किसी के लिए नहीं बल्कि लोकनायक जयप्रकाश नारायण के लिए कही जा रही हैं जिनकी आज यानी 11 अक्टूबर को जयंती मनाई जा रही है। समाजवाद और सर्वोदय के प्रबल समर्थक होने के साथ-साथ जयप्रकाश जी की संसदीय प्रजातंत्र में पूरी निष्ठा थी। प्रभुसत्ता वाद के विरुद्ध लोकतंत्र की रक्षा के लिए उनके संपूर्ण क्रांति के आह्वान ने भारतीय राजनीति में नए युग का सूत्रपात किया। जेपी ने न सिर्फ अपने परिवार और अपने परिजनों को संस्कार देने का काम किया बल्कि उन्हें अपनी माटी से जुड़े रहने को भी प्रेरित किया। जेल से भागकर सशस्त्र क्रांति शुरू की। किसान, भूदान, छात्र और सर्वोदय सहित कई आंदोलन किए।
इतना ही नही, आपातकाल के दौरान उन्होंने देश भर में लोकसमितियों का गठन किया। इसका उद्देश्य समाज सेवा और लोगों को हक व हुकूक के लिए जागरूक करना था। उनको आजादी का मकसद बताना था। देश में लोकशाही का निर्माण करना था। ये बातें गुरुवार को वाराणसी के नागेपुर गांव में आयोजित जेपी जयंती पर लोकसमिति के संयोजक नंदलाल मास्टर ने कही। वह जेपी की विरासत विषयक विचार संगोष्ठी को संबोधित कर रहे थे। यह गोष्ठी नागेपुर के लोक समिति आश्रम पर आयोजित की गई थी।
इस मौके पर ग्रामीणों ने जेपी चित्र पर माल्यार्पण और दीप जलाकर उनको नमन किया। साथ ही गांधी व जेपी के जीवन पर आधारित प्रमुख घटनाओं पर पोस्टर प्रदर्शनी भी लगाई गई। लोक समिति कार्यकर्ताओं ने आपातकाल के दौरान गाए गए प्रसिद्ध गीत जयप्रकाश का बिगुल बजा तो जग उठी तरुणाई है…, तिलक लगाने तुम्हे जवानों क्रान्ति द्वार पर आयी है…, गाकर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।
कार्यक्रम में अनीता, सीमा, मनीष, गुलाब सोनी, सरिता, पंचमुखी, मधुबाला, अमित, श्यामसुन्दर, सुनील, विद्या, मनजीता,शमा बानो आदि मौजूद रहे। खास बात यह कि जेपी की जयंती पर नागेपुर और आसपास के गांवों के स्कूली बच्चों की तादाद अच्छी खासी रही। संचालन रामबचन जी ने किया।