
वाराणसी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र में विधानसभा चुनाव 2017 के बाद भाजपा ने भले ही मेयर का चुनाव जीत लिया हो, नगर निगम सदन में बहुमत भी हासिल कर लिया हो, जिला पंचायत अध्यक्ष का पाला बदलवा कर वहां भी अपना कब्जा करने की कोशिश की हो। लेकिन विपक्ष के आगे उनकी एक नहीं चल रही। निगम चुनाव के बाद से जहां कहीं भी चुनाव हुआ हर जगह बीजेपी को मुंहकी खानी पड़ी है। बहुमत होते हुए भी वो मनचाहा काम नहीं करा पा रहे। इसी कड़ी में मंगलवार को हुए नगर निगम कार्यकारिणी चुनाव में भी बीजेपी बहुमत हासिल करने से चूक गई। नतीजा विपक्ष सत्ता पक्ष को बराबरी पर रोकने में कामयाब हो गया।
पांच साल, सात महीने बाद नगर निगम कार्यकारिणी का गठन
आखिर पांच साल और सात महीने बाद मंगलवार को नगर निगम कार्यकारिणी का गठन हो गया। वह भी निर्विरोध। बता दें कि नगर निगम की पिछले सदन में पूरे पांच साल तक कार्यकारिणी का गठन नहीं हो सका था। मामला ऐसा पेंचीदा फंसा कि हाईकोर्ट तक गया लेकिन कोई हल नहीं निकला। जनवरी 2018 में इस नए नगर निगम सदन के गठन के बाद भी सात महीने बीत गए, इस बीच सदन के तीन अधिवेशन हुए जिसमें से पहला अधिवेशन जहां केवल शपथ ग्रहण तक सीमित रहा तो दूसरा श्रद्धाजलि सभा में तब्दील हो गया। तीसरे अधिवेशन में ऐसा हंगामा हुआ कि पार्षदों को जेल तक की हवा खानी पड़ी। लेकिन विपक्ष ने अपने आंदोलनों के मार्फत इस कदर दबाव बनाया कि बहुमत वाली भाजपा को समझौते के लिए राजी होना ही पड़ा।
12 सदस्यों की कार्यकारिणी में 06-06 पर हुआ समझौता
इसे विपक्ष की जीत ही कहेंगे कि जिस नगर निगम के 90 पार्षदों में भाजपा के 40 पार्षद, तीन विधायक, तीन एमएलसी हों वहां विपक्ष ने 21 कांग्रेस, 14 सपा, दो बसपा और 13 निर्दलों तथा एक एमएलसी के बूते कार्यकारिणी की छह सीटों पर कब्जा बना लिया। इसमें कांग्रेस ने सबसे ज्यादा तीन, सपा ने दो और एक निर्दल प्रत्याशी को कार्यकारिणी में जाने का मौका मिला है। राजनीति गलियारों में इसे विपक्ष की जीत माना जा रहा है।
ये हैं कार्यकारिणी के सदस्य
भाजपा- राजेश यादव, पूर्णमांसी गुप्ता, नरसिंह दास, सुरेश चौरसिया, वंदना सिंह और संदीप त्रिपाठी।
कांग्रेस- रमजान अली, मो. सलीम और रेशमा परवीन।
सपा-प्रशांत सिंह व गोपाल यादव।
निर्दल- अजीत सिंह।
सदन की कार्रवाई से पूर्व विपक्ष ने दिया धरना
बता दें कि कार्यकारिणी गठन के लिए होने वाले चुनाव की खातिर बुलाई गई नगर निगम सदन की चौथी बैठक 11 बजे से शुरू होनी थी। बैठक इस बार टाउनहॉल में हुई। लेकिन बैठक से पहले ही पहुंचे विपक्षा पार्षद और टाउनहॉल सभागार के सामने धरने पर बैठ गए। वे पिछली सदन की कार्रवाई के दौरान हुए हंगामे के चलते दर्ज मुकदमा वापस लेने की मांग कर रहे थे। वे अड़े थे कि पहले नगर निगम प्रशासन उनके ऊपर से फर्जी मुकदमें हटाए। इस बीच जैसे ही मेयर मृदुला जायसवाल पहुंची तो नारेबाजी शुरू हो गई। ऐसे में मेयर मृदुला और नगर आयुक्त डॉ नितिन बंसल धरनारत पार्षदों के पास पहुंचे और सदन की कार्यवाही आरंभ करने में सहयोग की अपील की। लेकिन पार्षद अपनी मांग पर अड़े रहे। फिर यह तय हुआ कि सदन की कार्यवाही शुरू होने के बाद पहले यह मुद्दा रखा जाएगा उसके बाद ही कार्यकारिणी के गठन की कार्यवाही शुरू होगी। इस पर विपक्षी पार्षद मान गए। तकरीबन 11.20 बजे पीठासीन अधिकारी मेयर जायसवाल ने बैठक की कार्यवाही आरंभ करने की घोषणा की। इसके बाद विपक्ष की ओर से प्रस्ताव आया कि पहले नगर निगम प्रशासन पार्षदों पर दर्ज मुकदमे वापस लिए जाएं। इस पर पीठासीन अधिकारी ने नगर आयुक्त को मुकदमे वापास लेने की कार्रवाई शुरू करने का निर्देश दिया जिसका विपक्षी पार्षद ने समर्थन किया।
सभी 12 निर्विरोध निर्वाचित
फिर मेयर ने कार्यकारिणी गठन की कार्यवाही शुरू करने का निर्देश दिया। सभी दलों से नाम आमंत्रित किए गए। तकरीबन आधे घंटे के भीतर ही सभी दलों ने अपने-अपने नाम दिए। 12 सदस्यीय कार्यकारिणी के लिए 12 ही नाम आए ऐसे में पीठासीन अधिकारी ने सभी को निर्विरोध निर्वाचित घोषित किया।
पुख्ता रही सुरक्षा व्यवस्था
नगर निगम की पिछली बैठक में हुए हंगामे के मद्देनजर इस बार सुरऱक्षा के पुख्ता बंदोबस्त किए गए थे। टाउनहॉल के भीतर केवल पास धारकों को ही जाने दिया जा रहा था। गेट पर ही पुलिस मेटल डिटेक्टर से चेक करके ही लोगों को अंदर जाने दे रही थी।
