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काशी का अस्तित्व बचाने को विश्वनाथ मंदिर के महंत ने भरी हुंकार, कमिश्नर पर लगाया साजिश का आरोप
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काशी का अस्तित्व बचाने को विश्वनाथ मंदिर के महंत ने भरी हुंकार, कमिश्नर पर लगाया साजिश का आरोप

कहा, जुहू और मैरीन बीच बना कर कर अय्याशी का अड्डा बनाना चाहते हैं कमिश्नर। राष्ट्रपति, सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस, पीएम, सीएम को भेजा पत्र।

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वाराणसी. श्री काशी विश्वनाथ और गंगा के मिलन के उद्देश्य से बनाई गई विश्वनाथ कॉरीडोर योजना को काशी विश्वनाथ मंदिर के महंत राजेंद्र तिवारी ने काशी के अस्तित्व को मिटाने की साजिश करार दिया है। यही नहीं उन्होंने इसके लिए सीधे तौर पर कमिश्नर नितिन रमेश गोकर्ण को जिम्मेदार ठहाराया। कहा कि वह विश्वनाथ मंदिर परिक्षेत्र को जुहू और मरीन बीच की तरह अय्याशी का अड्डा बनाना चाहते हैं। बताया कि इस परियोजना के विरोध में उन्होंने राष्ट्रपति, सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस, प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को तीन दिन पहले ही पत्र भेज कर काशी का वजूद मिटने से रोकने की मांग की है। उन्होंने चेतावनी भी दी कि अगर उनके मांग पत्र पर सार्थक सुनवाई नहीं हुई तो काशी में वजूद के लिए बड़ा जनांदलोन शुरू किया जाएगा। तिवारी गुरुवार को पराड़कर स्मृति भवन में मीडिया से मुखातिब थे। उन्होंने आशंका जताई कि ये सारी जाजिश काशी को अयोध्या बनाने की है ताकि चौड़ा रास्ता हो और भारी भीड़ काशी में 1992 की कहानी दोहराई जा सके, क्योंकि अयोध्या प्रकरण पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के बाद बीजेपी के पास कोई एजेंडा नहीं होगा। इसी के तहत ये अधिकारी बीजेपी के एजेंट के रूप में काम कर रहे हैं।

उन्होंने बताया कि विश्वनाथ कॉरीडोर के नाम पर समूची काशी को मिटाने की साजिश की जा रही है। पहले ही विश्वनाथ मंदिर परिसर विस्तार के नाम पर 23 भवन व 29 दुकानें ध्वस्त की जा चुकी हैं। इनमें से ज्यादातर मामले में उच्च न्यायालय से स्थगनादेश भी जारी है लेकिन कोर्ट के आदेश को नजरंदाज कर इन भवनों और दुकानों को जमींदोज किया गया जो न्यायालय की अवमानना का मामला बनता है। बताया कि नई विश्वनाथ कॉरीडोर परियोजना के तहत क्षेत्र के कुल 274 मकान जमीदोंज किए जाने प्रस्तावित हैं। ये प्राचीन भवन गिरा दिए गए तो एक तरह से काशी का वजूद ही मिट जाएगा। श्रीविश्वनाथ मंदिर के महंत ने कहा कि विश्वनाथ कॉरीडोर परियोजना कमिश्नर नितिन रमेश गोकर्ण की उपज है, पूर्व में भी जब वह बनारस के कमिश्नर थे तभी यह परियोना उन्होंने बनाई थी, तब भी हम लोगों ने इसका विरोध किया था। उनके तबादले के बाद परियोजना ठंडे बस्ते में डाल दी गई थी लेकिन जब वह दोबारा कमिश्नर बन कर आए तो उन्होंने पुरानी फाइल निकलवाई और अब तो उस पर सीएम योगी आदित्यनाथ और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की मुहर भी लगवा चुके हैं। लेकिन यह परियोजना लागू हुई तो काशी का अस्तित्व ही मिट जाएगा।

उन्होंने बताया कि मंदिर के अधिग्रहण के बाद मंदिर परिसर के सौंदर्यीकरण और विस्तार के नाम पर पहले ही ताड़केश्वर व रानी भवनी मंदिर परिसर के शिवलिंग व मूर्तियों को ध्वस्त कर उन्हें कूड़े की तरह नाले में फिकवा दिया गया था जिसे हम लोगों ने केदारघाट के पास से निकलवाया जबकि कहा गया था जिन मूर्तियों और शिवलिंग को हटाया जा रहा है उनकी दोबारा प्राण प्रतिष्ठा कराई जाएगी। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। ऐसे ही कई पुराने काशीवासियों से जबरन उनकी आवास उनकी संपत्ति औने-पौने दाम में हथिया ली गई लेकिन उसके लिए विश्वनाथ मंदिर फंड से मोटी रकम की हेराफेरी भी की गई। बताया कि काशी विश्वनाथ मंदिर व ज्ञानवापी परिक्षेत्र के निवासी केदारनाथ व्यास के साथ भी ऐसा ही हुआ। पहले उनसे उऩकी संपत्ति दान में मांगी गई, फिर उसका दाम लगाने की कोशिश की गई फिर हाल ही में अचानक उनका आवास जमींदोज कर उन्हें वृद्धाश्रम में डाल दिया गया। कहा कि ज्ञानवापी मस्जिद के नीचे के तहखाने की पूरी संपत्ति के स्वामी केदारनाथ व्यास हैं।

महंत तिवारी ने न्यास परिषद के अध्यक्ष अशोक द्विवेदी, कमिश्नर नितिन रमेश गोकर्ण, तत्कालीन मुख्य कार्यपालक अधिकारी श्याम नारायण त्रिपाठी, जिलाधिकारी योगेश्वर राम मिश्र पर श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में बडे पैमाने पर भ्रष्टाचार और अनैतिक कृत्य, दुर्व्यहार के आरोप भी लगाए। कहा कि मंदिर के अधिग्रहण के पूर्व यहां करोड़ों की तादाद में श्रद्धालु आते थे। उनके यहां रहने, खाने, दर्शन कराने आदि की व्यवस्था स्थानीय पंडा-पुरोहित करते रहे। मंदिर की पूजा पद्धति वैदिक रीति रिवाजों के साथ तत्कालीन महंत परिवार द्वारा की जाती रही। मंदिर में होने वाली सभी आरती, भोग की व्यवस्था तत्समय महंत परिवार द्वारा की जाती रही और सुदृढ़ परंपरा का निर्माण वर्षों की नियमित पूजन पद्धति के माध्यम से स्थापित हुआ। ऐसी पूजन पद्धति एवं आरती की व्यवस्था संपूर्ण भारत में कहीं नहीं है। उन्होंने खेद प्रकट करते हुए कहा कि काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास परिषद में तत्कालीन मुख्य कार्यपालक से लेकर कमिश्नर और अध्यक्ष न्यास परिषद तक आकंठ भ्रष्टाचार में लिप्त हैं। उन्होंने मंदिर के चढ़ावे का दुरुपयोग करने का आरोप भी लगाया। महंत तिवारी ने काशीवासियों, पंडा-पुजारियो, क्षेत्रीय समाज की ओर से श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में व्याप्त भ्रष्टाचार की स्वतंत्र गुप्तचर इकाई से जांच कराने की मांग भी की है।

उन्होंने कहा कि मंदिर से सीधे मां गंगा का दर्शन करने की योजना समाजवादी पार्टी के शासन काल की कुत्सित योजना को भाजपा सरकार ने मंजूरी दे दी है। सनातन धर्म का रक्षक होने का दावा करने वाली प्रदेश सरकार ने यह जानते हुए भी कि मंदिर के आस-पास का क्षेत्र हजारों साल पुरानी सभ्यता को समेटे है को जमींदोज करने का निर्णय लिया है। कहा कि जो काम मुगल शासक नहीं कर पाए वो काम अब हिंदुत्व का रक्षक होने का दंभ भरने वाली प्रदेश सरकार पीएम नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र में करने जा रही है। यह तब हो रहा है जब प्रधानमंत्री कई बार कह चुके हैं कि काशी का विकास और उसका सौंदर्यीकरण उसके पुरातन स्वरूप को अक्षुण्ण रखते हुए किया जाएगा। आरोप लगाते हुए तिवारी ने कहा कि इसका असर कहीं न कहीं से 2019 के लोकसभा चुनाव पर पड़ना तय है।

उन्होंने कहा कि उच्च न्यायालय इलाहाबाद में दाखिल पीआईएल कौटिल्य सोसाइटी बनाम उत्तर प्रदेश सरकार व अन्य में न्यायालय ने स्पष्ट आदेश दे रखा है कि गंगा जी के हाईएस्ट फ्लड लेबल से 200 मीटर दूर तक किसी भी प्रकार का नव निर्माण नहीं हो सकता, इस आदेश की जानकारी केंद्र व राज्य दोनों ही सरकारों को है, बावजूद इसके दशाश्वमेध क्षेत्र में जम्मू कोठी था गेस्ट हाउस जो विश्वनाथ मंदिर न्यास ले रखा है उसमें नव निर्माण कराया जा रहा है। उन्होंने सवाल किया कि क्या यह न्यायालय की अवमानना नहीं है। यही नहीं हाईकोर्ट इलाहाबाद का यह भी मानना है कि काशी के पौराणिक महत्व वाले हेरिटेज भवनों से किसी प्रकार की छेड़-छाड़ न की जाए ताकि काशी की धरोहर, संस्कृति अक्षुण्ण बनी रहे। ऐसे में जिन सैकड़ों वर्ष पुराने भवनों को न्यास ने बल पूर्वक अधिग्रहीत अथवा रजामंदी से ले लिया है और उन्हें गिरा दिया है, क्या वह उस भूमि पर नव निर्माण उच्च न्यायालय के आदेश के विपरीत नहीं। न्यायालय के आदेशों का उल्लंघन नहीं।