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अनोखा है बांसकुली का महाकाली दरबार, मुस्लिम भक्त गाते हैं आरती

इस वर्ष नवरात्र और मोहर्रम पर्व एक साथ शुरू हो रहे हैं। जहां हिंदु ताजिएदारी करेंगे तो वहीं मुस्लिम भक्त माता की आरती करेंगे।

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Amazing is Baansculis Mahakali Durbar, Muslim devotees sing aarti

Amazing is Baansculis Mahakali Durbar, Muslim devotees sing aarti

विदिशा। यह तीसरा साल है जब मोहर्रम और नवरात्र पर्व एक साथ आ रहे हैं। इन दस दिनों के दौरान एक बार फिर देश की गंगा जमुनी संस्कृति देखने को मिलेगी। विदिशा के बांसकुली महाकाली मंदिर में उस समय अदभुत छटा बिखरी जब रईस अहमद अपने बैंड के साथ स्वयं द्वारा रचित भजन और आरती पेश करने यहां पहुंचे। रईस ऐसा पहली बार नहीं कर रहे हैं बल्कि वे हर साल माता के आरती गाकर भक्तें को भाव विभोर करते हैं।

मिसाल है माता का यह दरबार
विदिशा में बांसकुली का महाकाली दरबार कई मामलों में अपने आप में अनौखा है। इस सबसे पुराना मंदिरा माना जाता है और यहां पिछले 61 वर्ष से महाकाली की स्थापना हो रही है। इस दरबार की खास बात यह है कि यहां आरती का आयोजन मुस्लिम समाज के रईस अहमद द्वारा किया जाता है। महाकाली की आरती के लिए आजाद बैंड के संचालक रईस अहमद ने खुद उनकी आरती लिखी है और वे पूरे साजों के साथ खुद आरती गाकर महाकाली भक्तों को भाव विभोर करते हैं।

इस बार आकर्षक झांकी
इस बार दरबार में करीब 20 फीट ऊंचा पहाड़ बनाकर उसके दोनों ओर से झरने का दृश्य बनाया गया है। झरने के बीच मां महाकाली की भव्य प्रतिमा विराजित की गई। यह प्रतिमा शहर की ऐसी प्रतिमा है जिससे भक्तों की नजरें हटाए नहीं हटतीं। महाकाली को 10 किलो चांदी के गहने धारण कराएं गए हैं। भारी संख्या में दर्शनार्थी महाकाली दरबार में पूरे नौ दिन दर्शन को पहुंचते हैं।

1956 में हुई थी पहली बार स्थापना
शहर के बांसकुली इलाके में महाकाली का दरबार नवरात्र में लगने वाले पांडालों में सबसे पुराना माना जाता है। दरबार से वर्षों से जुड़े प्रशांत सिरभैया बताते हैं कि 1956 में सागर से आए कुन्दनलाल सोनी ने यहां काली प्रतिमा की स्थापना शुरू कराई थी। उनके साथ देवीलाल सिरभैया, छोटेलाल सोनी, टीकाराम प्रजापति आदि ने यहां झांकी की शुरुआत की थी। खुद कुन्दलाल सोनी ने अपने हाथों से महाकाली की प्रतिमा बनाकर स्थापित करते थे।

होते रहे बदलाव
पिछले चार वर्ष से यहां महाकाली की प्रतिमा का आकार बढ़ा है, यह प्रतिमा सात फीट की जगह अब 12 फीट की बनने लगी है। भव्यता भी बढ़ी है। यहां महाकाली को 10 किलो चांदी के गहने धारण कराए जाते हैं। इस बार दरबार में करीब २० फीट ऊंचा पहाड़ बनाकर उसके दोनों ओर से झरने का दृश्य बनाया गया है। झरने के बीच मां महाकाली की भव्य प्रतिमा विराजित होगी।