8 जनवरी 2026,

गुरुवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

होम

video_icon

शॉर्ट्स

catch_icon

प्लस

epaper_icon

ई-पेपर

profile_icon

प्रोफाइल

बेतवा का कटाव रोकने अब सामाजिक वानिकी ने उठाया बीड़ा

नदी के दोनों किनारों का हो रहा सर्वे, हजारों पौधे रोपकर कटाव रोकने की कोशिश

2 min read
Google source verification
बेतवा का कटाव रोकने अब सामाजिक वानिकी ने उठाया बीड़ा

बेतवा का कटाव रोकने अब सामाजिक वानिकी ने उठाया बीड़ा

विदिशा. बेतवा नदी के बढ़ते कटाव और खतरे को देखते हुए अब सामाजिक वानिकी और पर्यावरण वानिकी के माध्यम से कटाव रोकने के लिए नदी तट के दोनों ओर सघन पौधरोपण करने की तैयारी है। करीब दस किमी के दायरे में इसके लिए सर्वे किया जा रहा है और फिर प्रोजेक्ट बनाकर सामाजिक वानिकी के रिसर्च और डेवलपमेंट विभाग को भेजा जाएगा।

बेतवा के रंगई घाट से लेकर चरणतीर्थ घाट तक के क्षेत्र में दोनों ओर पिछले कुछ वर्षों में नदी का कटाव तेजी से बढ़ता जा रहा है। आशंका है कि यदि इसी तरह कटाव बढ़ता रहा और इसे रोकने के प्रयास नहीं हुए तो आगामी वर्षों में नदी अपना रास्ता बदल सकती है। यदि ऐसा हुआ तो शहर और बस्तियों को काफी नुकसान होना तय है। बेतवा उत्थान समिति इसके लिए लगातार प्रयास करती आ रही है, शासन-प्रशासन के नुमाइंदों को भी समिति ने कई बार अवगत कराया है, लेकिन उसे आशातीत सफलता नहीं मिली। ऐसे में अब सामाजिक वानिकी की रेंजर पिंकी रघुवंशी ने बेतवा के इस कटाव को रोकने के लिए पहल शुरू की है। उन्होंने बेतवा की इस समस्या का निराकरण करने के लिए पूरी स्थिति से अपने पीसीसीएफ रिसर्च एंड डेवलपमेंट को अवगत कराया और फिर उनकी सहमति से वे नदी किनारों के सर्वे में जुट गई हैं। रेंजर पिंकी रघुवंशी कहती हैं कि काम बड़ा है लेकिन कुछ बेहतर हो सके, इस मंशा से करना ही है।

---

अतिक्रमण, ईंट भट्टे और खेत बनेंगे बाधा

सामाजिक वानिकी या पर्यावरण वानिकी के माध्यम से नदी किनारे करीब दस किमी के दायरे में हजारों पौधे रोपने की योजना है, जिससे मिट्टी के कटाव को रोका जा सके। लेकिन इस मुहिम में सबसे बड़ी बाधा नदी तट पर बड़ी तादाद में लगे ईंट भट्टे और खेती के लिए किया जा रहा खनन बाधा बनेगा। इन अतिक्रमणकारियों ने वर्षों पुराने वृक्षों को काटने में भी संकोच नहीं किया, फिर इनसे नए पौधे बचाने की उम्मीद करना भी आसान नहीं है। इनसे सामाजिक वानिकी भी निपट नहीं सकेगा। ऐसे में राजस्व और पुलिस की टीम के माध्यम से इन पर कार्रवाई की जाना आवश्यक है तभी नया पौधरोपण सफल हो सकेगा।

---

बांस-अर्जुन जैसे पौधों को प्राथमिकता

बेतवा के किनारों पर अधिकतर बांस और अर्जुन के पौधे रोपे जाने की तैयारी है। ये दोनों ही पौधे मिट्टी का कटाव रोककर मिट्टी को बांधे रखने का काम करते हैं। प्रोजेक्ट बड़ा है, इसमें सामाजिक वानिकी के साथ ही बेतवा उत्थान समिति और प्रशासन की भी सहभागिता आवश्यक होगी। सर्वे पूरा होने पर पता चलेगा कि बेतवा के इस दायरे के दोनों किनारों पर लगभग कितने पौधे लग सकेंगे और कहां उन्हें मवेशियों से सुरक्षित करने की जरूरत पड़ेगी।

----

वर्जन...

मुझे बेतवा उत्थान समिति के लोगों ने बताया था कि बेतवा का कटाव लगातार बढ़ रहा है, हर स्तर पर प्रयास कर चुके हैं लेकिन कोई ध्यान नहीं दे रहा है। इसके बाद मैंने कुछ स्थानों पर खुद जाकर देखा और अपने वरिष्ठ अधिकारियों को अवगत कराया। मुझे खुशी है कि वरिष्ठ अधिकारियों ने इसे गंभीरता से लेकर प्रोजेक्ट बनाने को कहा है। सबके प्रयास से कुछ अच्छा हो पाया तो यह हम सबकी सफलता होगी।

-पिंकी रघुवंशी, रेंजर, सामाजिक वानिकी विदिशा

---

पिछले कुछ सालों में बेतवा का कटाव तेजी से बढ़ा है। यही हाल रहा तो आगे आने वाले वर्षो में बेतवा अपना रास्ता बदल लेगी और यह स्थिति भयावह होगी। ऐसे में जरूरी है कि बेतवा किनारों पर सघन पौधरोपण किया जाए। हर स्तर पर प्रयास करने के बाद अब सामाजिक वानिकी की पहल से कुछ काम होने की उम्मीद जागी है।

-अतुल शाह, अध्यक्ष बेतवा उत्थान समिति विदिशा