
विदिशा। अस्तित्व की लड़ाई में उलझे सम्राट अशोक अभियांत्रिकीय संस्थान में अब सरकार सीधे हस्तक्षेप के मूड में है। यह पहला मौका है जब तकनीकी शिक्षा मंत्री ने एसएटीआई डिग्री और पॉलीटेक्निक की बीओजी की बैठक बुलाई है। यह बैठक 22 नवम्बर को होना है।
यकीनन राज्य शासन के इस आदेश से बीओजी के सचिव प्रतापभानु शर्मा द्वारा किए गए, बीओजी के पुनर्गठन को बल मिला है और अब संस्थान की बीओजी की इस बैठक की अध्यक्षता ज्योतिरादित्य सिंधिया की जगह तकनीकी शिक्षा राज्य मंत्री करेंगे।
मप्र शासन के तकनीकी शिक्षा मंत्रालय के अपर सचिव डॉ. एमआर धाकड़ ने एसएटीआई डायरेक्टर और पॉलीटेक्निक प्राचार्य को १५ नवम्बर को पत्र जारी किया है। पत्र में इस बात का स्पष्ट जिक्र है कि ७ नवम्बर को मंत्री ने अपनी टीप में लिखा है कि विभिन्न तथ्यों के संबंध में बैठक आयोजित की जाए, इसलिए राज्यमंत्री की अध्यक्षता में एसएटीआई की बीओजी की बैठक २२ नवम्बर को होगी।
पत्र में कहा गया है कि एसएटीआई की बीओजी में राज्यमंत्री को अध्यक्ष बनाया गया है। सोसायटी में लगातार विवाद चल रहे हैं। प्रकरण लंबित हैं। अंतरिम राहत दी गई है। संस्थान में सोसायटी के संबंध में चल रहे विवादों और कानूनी पहलू का परीक्षण कराया गया है। संस्थान में सोसायटी के संबंध में चल रहे विवाद एवं कानूनी पहलू की रिपोर्ट देने और वैधानिक रूप से सही पाए जाने पर यह बैठक बुलाई जा रही है।
राज्य शासन ने डायरेक्टर से बायलॉज अनुसार सोसायटी के प्रथम गठन से आज तक हुए विभिन्न परिवर्तनों सहित बीओजी के गठन उपरांत बैठकों की जानकारी 7 दिन में तथ्यों सहित शासन को उपलब्ध कराने के लिए भी कहा है।
दो-दो बीओजी, दोनों कर रहे बैठकें
संस्थान में पूर्व से ज्योतिरादित्य सिंधिया के चेयरमेनशिप वाली बीओजी अस्तित्व में थी। इसके सचिव प्रतापभानु शर्मा थे। लेकिन कुछ माह पहले एसएटीआई में हुए विवाद, कर्मचारियों की हड़ताल और प्रतापभानु के फैसलों से नाराज ज्योतिरादित्य ने प्रतापभानु के अधिकार छीन लिए थे। इसके बाद ११ जनवरी 2017 को प्रतापभानु शर्मा ने बीओजी के सचिव की हैसियत से बैठक बुलाकर नई बीओजी गठित कर ली। इसमें प्रतापभानु ने ज्योतिरादित्य सिंधिया को सीधी चुनौती देते हुए बीओजी चेयरमैन पद से हटाकर तकनीकी शिक्षा मंत्री को चेयरमैन बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसकी जानकारी ज्योतिरादित्य को मिलते ही, उनके पक्ष की ओर से इस बीओजी को नकार दिया गया और सिंधिया के चेयरमैनशिप वाली बीओजी को ही सही मानकर मई 2017 में उसकी बैठक भी कर ली। अब तकनीकी शिक्षा मंत्री ने बीओजी की बैठक बुलाकर यह स्पष्ट कर दिया है कि शासन ने प्रतापभानु द्वारा बुलाई बैठक अनुसार गठित बीओजी को मान्यता दे दी है।
सोसायटी की गर्वनिंग बॉडी में शर्मा का पलड़ा भारी
उधर महाराजा जीवाजीराव एज्यूकेशन सोसायटी की पांच सदस्यीय गर्वर्निंग बॉडी में भी प्रतापभानु शर्मा का पलड़ा भारी है। इस बॉडी में ज्योतिरादित्य सिंधिया अध्यक्ष, मोतीलाल बोरा उपाध्यक्ष, प्रतापभानु शर्मा सचिव के अलावा डॉ. पद्म जैन और तकनीकी शिक्षा मंत्री सदस्य हैं। इस मान से देखा जाए तो यदि मोतीलाल बोरा भी ज्योतिरादित्य के साथ हैं तो भी डॉ. जैन और तकनीकी शिक्षा मंत्री सहित खुद प्रतापभानु मिलाकर तीन लोग उनके पक्ष में हैं, जबकि ज्योतिरादित्य के साथ वे खुद और मोतीलाल बोरा ही रह जाते हैं।
कॉलेज टेकओवर करने की दिशा में कदम
शासन द्वारा बीओजी की बैठक बुलाए जाने को जानकारों द्वारा कॉलेज को शासनाधीन करने की प्रक्रिया का पहला कदम माना जा रहा है। फिलहाल यह भी माना जा रहा है कि जिस तरह अब तक जीएसआईटीएस इंदौर का संचालन हो रहा है उसी तरह अब एसएटीआई का संचालन भी होगा, क्योंकि वहां की बीओजी के चेयरमैन भी तकनीकी शिक्षा मंत्री ही हैं। ऐसे में कॉलेज की कई समस्याएं भी हल होने की उम्मीद है।
ऐसी किसी बैठक की जानकारी मुझे नहीं है। बीओजी के चेयरमैन ज्योतिरादित्य सिंधिया ही हैं। मंत्री को किसी ने गलत जानकारी दी होगी। जब उन्हें पूरी बात मालूम पड़ेगी तो वो अपने आप कहेंगे कि ये क्या गलत काम करा रहे हैं। बैठक होगी तो सूचना आएगी।
-एनके मोदी, रिटायर्ड जस्टिस
Published on:
16 Nov 2017 07:33 pm
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