
किले और नवाबी अतीत के साथ सीताफल से है हैदरगढ़ की पहचान
गांव-हैदरगढ़
पंचायत- हैदरगढ़
तहसील-ग्यारसपुर
आबादी-5000
हैदरगढ़। पहाड़ी पर बने सत्रहवीं शताब्दी के गौड़ वंशी किले के साथ ही नवाब हैदरअली के समय की तत्कालीन रियासत, पहाड़ों से बहते झरने और घने जंगल के साथ ही स्वादिष्ट और बहुतायत होने वाले सीताफल के लिए जिले भर में हैदरगढ्ऱ की पहचान है। मृगेन्द्रनाथ का प्रसिद्ध स्थान और झरना भी यहीं है। विदिशा से करीब 60 किमी दूर बसे इस गांव को कस्बे का दर्जा दे दिया गया, जिससे 60 गांव जुड़े हैं, करीब 52 जातियां यहां रह रहीं हैंं। किला अब खंडहर हो गया लेकिन उसकी बुर्जें अब भी अतीत की कहानी सुनाती हैं। नवाबी रियासत चली गई, लेकिन उनका महल और वंशज अब भी यहां हैं। गांव बड़ा है, विदिशा से गांव तक अच्छी डामर रोड है, हायरसेकंडरी स्कूल है, गौ शाला है और तालाब भी है। हालांकि मुख्य बाजार के काफी हिस्से पर अतिक्रमण है। नलजल योजना है, लेकिन पाइपलाइन जगह-जगह से लीकेज है। पहाड़ों से उतरकर गली मोहल्लों में पहुंचने वाले पानी की निकासी का कोई इंतजाम नहीं है। फिर भी बारिश के दिनों में यहां का प्राकृतिक सौंदर्य देखने लायक है।
ये है गांव की ताकत...
-. अच्छा जंगल, पहाड़, झरने और प्राकृतिक सौंदर्य।
-50 से ज्यादा जातियां एक साथ मिलजुल कर रहती हैं।
-जिला मुख्यालय से गांव तक अच्छी सडक़ है।
-नलजल योजना है, पानी की किल्लत नहीं है।
-यहां के सीताफल की जिले में खूब मांग है।
ये है गांव की कमजोरी...
-उपतहसील की घोषणा 2013 में हुई, क्रियान्वयन नहीं हुआ।
-कन्या हाइस्कूल की कमी है।
-मानोरा से हैदरगढ़ का मार्ग बदहाल है।
-पानी की निकासी के साधन अपर्याप्त हैं।
-मृगेंद्रनाथ का 2 किमी रास्ता बहुत खराब है।
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ये हैं गांव के गौरव...
हैदरगढ़ के पूरनलाल विश्वकर्मा सहकारी बैंक के प्रबंधक रहे हैं, उनके पुत्र नवीन विश्वकर्मा वकील हैं। पूर्व सरपंच गुलाबचंद्र भावसार के पुत्र सुप्रज्ञ भावसार मुंबई में इंजीनियर हैं। शिक्षक उमेश शर्मा के पुत्र हेमंत शर्मा बंैगलूरू और भीष्म शर्मा पुणे में फार्मासिस्ट के रूप में कार्यरत हैं।
Published on:
25 Sept 2020 09:04 pm
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