
विदिशा। जिला स्तरीय किसान सम्मेलन में भावांतर योजना के प्रमाणपत्र बांटे जाना थे। मंडी परिसर में आयोजित इस समारोह में किसानों को उद्यानिकी मंत्री के हाथों प्रमाणपत्र दिए जाने का कहकर बुलाया गया था। लेकिन मंत्री इस कार्यक्रम में आने की बजाय भोपाल के राज्य स्तरीय कार्यक्रम में चले गए और यहां किसान उनका इंतजार करते रह गए। बाद में विधायक, कलेक्टर और अंत्योदय समिति के जिला उपाध्यक्ष ने प्रमाणपत्र बांटे।
मंडी परिसर में भावांतर योजना को लेकर दोपहर 12 बजे से आयोजन रखा गया था। किसानों को तीन बसों और कुछ जीपों में भरकर बुलवाया गया था। मुख्य अतिथि के रूप में उद्यानिकी मंत्री सूर्यप्रकाश मीणा को यहां मौजूद होना था, लेकिन वे नहीं आए। मंत्री का इंतजार करने के बाद 1.15 बजे कलेक्टर अनिल सुचारी ने जिला अंत्योदय समिति के उपाध्यक्ष मनोज कटारे और मंडी अध्यक्ष मिथलेश सम्मरवार के साथ मिलकर कार्यक्रम शुरू करा दिया।
यहां एडीएम एचपी वर्मा ने भावांतर योजना के बारे में जानकारी दी। अंत्योदय समिति के उपाध्यक्ष कटारे ने भावांतर योजना की सराहना करते हुए मुख्यमंत्री के इस कदम को किसान हितैषी बताया। इस दौरान मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के भोपाल में दिए जा रहे भाषण का लाइव प्रसारण किसानों के लिए किया गया। इसी दौरान विधायक कल्याण सिंह भी आ पहुंचे। कार्यक्रम के बाद किसानों को अतिथियों ने भावांतर योजना के भुगतान प्रमाणपत्र प्रदान किए।
तुम्हारा भुगतान नहीं होने दूंगा...
कार्यक्रम शुरू होने के पहले तक अधिकारियों को यह पता था कि 12.30 बजे तक उद्यानिकी मंत्री आ जाएंगे। करीब 12 बजे एक अधिकारी करीब 50 किसानों के बीच बैठे थे। वे बार-बार मंच की व्यवस्था सुधारने और वहां सजावट करने को कह रहे थे, लेकिन कोई ध्यान नहीं दे रहा था। इस पर वे झल्लाते हुए बोले कि- कितनी बार कह रहा हूं कि मंच की व्यवस्था सुधारो। नहीं करोगे तो मैं भुगतान नहीं होने दूंगा।
प्रतीक स्वरूप 4 किसानों को भुगतान पत्र
जिले में दिसम्बर माह में अपनी उपज बेचने वाले 15743 किसानों को भावांतर राशि का भुगतान होना है। यह भुगतान 26 करोड़ 31 लाख 50 हजार 591 रूपए है। लेकिन समारोह में प्रतीक स्वरूप मात्र 4 किसानों को भावांतर भुगतान योजना के प्रमाणपत्र वितरित किए गए।
जिले से गईं 500 बसें
भोपाल के राज्य स्तरीय कार्यक्रम में प्रदेश भर से लोगों को ढोने के लिए बसों का इंतजाम किया गया था। विदिशा जिले से 25 हजार लोगों को भोपाल पहुंचाने का लक्ष्य था। इसके लिए 500 बसों की जरूरत थी। डीटीओ गिरजेंश वर्मा के मुताबिक विदिशा की डेढ़ सौ बसें अधिग्रहीत की गईं, जबकि बाकी बसों का इंतजाम रीवा, सतना, टीकमगढ़, सतना, छतरपुर और कटनी से किया गया।
Published on:
13 Feb 2018 08:57 am
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