
आवासीय योजना के 80 प्रतिशत घरों में छत नहीं
विदिशा। आवासीय योजना के हितग्राहियों की परेशानी को लेकर कांगे्रस ने कलेक्टे्रट परिसर में प्रदर्शन किया। इस दौरान कांगे्रस नेताओं के अलावा बड़ी संख्या में गरीब हितग्राही भी शामिल रहे। कांगे्रस नेताओं का कहना है कि आवासीय योजनाओं के हितग्राहियों को किस्तें नहीं मिल रही। उन्हें किस्तों के लिए परेशान किया जा रहा। करीब 80 प्रतिशत लोगों के घरों की छत नहीं बन पाई इससे आने वाली बारिश में यह हितग्राही कैसे रह पाएंगे।
सुबह आचार्य कॉलोनी, करैयाखेड़ा मार्ग, आमवाली कॉलोनी, बंटीनगर, मोहनगिरी, हरिपुरा, शंकरटीला, सुभाषनगर, आज्ञाराम कॉलोनी, जतरापुरा आदि क्षेत्रों से बड़ी संख्या में आवासीय योजना के पीडि़त हितग्राही एकत्रित होने लगे थे। इस दौरान मोहनगिरी निवासी नारायणसिंह विश्वकर्मा ने बताया कि दो किस्त मिल चुकी पर तीसरी किस्त नहीं मिलने से घर की छत रह गई। इसी तरह उर्मिला सेन के आवास के लिए सिर्फ एक ही किस्त मिल पाई है। निहालसिंह किरार को छह माह में एक भी किस्त नहीं मिल पाई।
नारेबाजी कर सौंपा।
इस दौरान हितग्राहियों एवं कांगे्रस नेताओं ने नारेबाजी करते हुए एडीएम एचपी वर्मा को आवास योजना के बड़ी संख्या में भरे गए आवेदनों के साथ ज्ञापन सौंपा। इस दौरान कांगे्रस नेताओं ने शहर में आवास योजना एवं गरीबों को पट्टा देने के लिए जिला प्रशासन की ओर से सर्वे कराने व हितग्राहियों को दूसरी व तीसरी किस्तें उपलब्ध कराने की मांग की गई। प्रदर्शन के दौरान जिला महिला कांगे्रस अध्यक्ष प्रियंका किरार, कांगे्रस नेता बसंत जैन, मोहरसिंह रघुवंशी, रमेश तिवारी, बंटी सक्सेना, रवि कपूर, अनुज लोधी, रामराज दांगी एवं बड़ी संख्या में हितग्राही मौजूद रहे। प्रदर्शन को देखते हुए यहां भारी पुलिस बल के अलावा सीएसपी भारतभूषण शर्मा, सिविल लाइन थाना टीआई संजय चौकसे भी मौजूद रहे।
400 से अधिक गरीबों ने भरे फार्म
इस दौरान कांगे्रस नेताओं आवासीय योजनाओं के आए इन हितग्राहियों से आवेदन भरवाए। इन आवेदनों में उन्हें अब तक मिली किस्तों की जानकारी भरवाई गई। आवासहीनों को पट्टे दिए जाने के आवेदन भी भरवाए गए। कांगे्रस नेताओं ने बताया कि इस दौरान करीब 450 आवेदन जमा हुए हैं। इस दौरान इंका नेता शशांक भार्गव, अजय कटारे आदि ने कहा कि शहर में 30 हजार भवनों की जरूरत है, जबकि चार वर्ष में सिर्फ 2700 भवन ही मंजूर हुए हैं। वे भी किस्त नहीं मिलने से अधूरे हैं। करीब 80 प्रतिशत भवनों की छत नहीं डल पाई और लोगों को खुले आसमान के नीचे रहना पड़ रहा है।
Published on:
9 Jun 2018, 5:30 PM IST
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