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सुख-समृद्धि के लिए आया महालक्ष्मी पर्व

महाराष्टियन समाज में जेठानी-देवरानी के रूप में महालक्ष्मी पूजा की परंपरा

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सुख-समृद्धि के लिए आया महालक्ष्मी पर्व

सुख-समृद्धि के लिए आया महालक्ष्मी पर्व

विदिशा. महाराष्टि्यन समाज में शनिवार से तीन दिवसीय महालक्ष्मी पर्व उत्साह से शुरू हो गया।घर-परिवार में सुख समृद्धि की कामना से महाराष्टियन समाज में यह पर्व श्रद्धाभाव से मनाया जाता है। इस दौरान ऐसा माना जाता है कि महालक्ष्मी और गौरी जो कि जेठानी-देवरानी के रूप में हैं, वे अपने मायके आती हैं। ऐसे में मायके में बेटी की जो आवभगत होती है उसी तरह के भाव से महालक्ष्मी की सेवा हर घर में की जाती है और फिर तीसरे दिन उनको विभिन्न व्यंजनों के भोग लगाकर विदा किया जाता है।आरएमपी नगर निवासी शिवानी अन्वेकर ने बताया कि हमारे परिवारों में महालक्ष्मी पूजा की यह परंपरा कई पीढि़यों से चली आ रही है। महालक्ष्मी पर्व के लिए घर को भी सजाया जाता है। तीन दिन तक वििभन्न आयोजन और व्यंजन बनते हैं और फिर तीसरे दिन विसर्जन होता है। शिवानी बताती हैं कि दरअसल माता लक्ष्मी और गौरी को ज्येष्ठा-कनिष्ठा यानी जेठारी-देवरानी के रूप में पूजा जाता है। वे अपने बच्चों के साथ तीन दिन के लिए अपने मायके आती हैं, इस दौरान पूरा परिवार खुशी खुशी उत्साह से उत्सव मनाता है, महालक्ष्मी का हर तरह से ख्याल रखा जाता है और उनकी सेवा की जाती है। मायके आने की खुशी में उनके लिए रोजाना अलग-अलग तरह के पकवान बनाए जाते हैं, भोग लगाते हैं, उनका श्रंगार करते हैं और पूजा की जाती है। तीन दिन में पहले दिन उनकी अगवानी कर स्थापना की जाती है, दूसरे दिन महाभोग लगाया जाता है और तीसरे दिन हल्दी-कुमकुम के साथ उनकी विदाई की जाती है। उनकी पूजा से घर-परिवार के सुख समृद्धि और खुशी का माहौल रहता है।