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प्रकृति और शिल्प के अनुपम सौंदर्य का प्रतीक मालादेवी मंदिर

यहां प्रकृति और शिल्प के अनूठे संगम का नजारा देखने को मिलता है

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प्रकृति और शिल्प के अनुपम सौंदर्य का प्रतीक मालादेवी मंदिर

प्रकृति और शिल्प के अनुपम सौंदर्य का प्रतीक मालादेवी मंदिर

विदिशा. जिला मुख्यालय से 38 किमी दूर स्थित ग्यारसपुर में खड़ी पहाड़ी के दक्षिणी पश्चिमी दिशा की ओर पहाड़ी के किनारे पर बना मालादेवी मंदिर शिल्प का अनुपम नमूना है। प्रतिहारकालीन माना जाने वाला यह मंदिर मालवदेव द्वारा निर्मित माना जाता है। संभव है कि उनके नाम पर ही इसे मालवदेव और फिर अपभ्रंश करके मालादेवी मंदिर कहलाने लगा। बाहरी ओर से मंदिर अत्यंत सुसज्जित है। मंदिर की दीवारों पर सुंदर अलंकरण है। कीर्तिमुख, देवी-देवता, यक्ष-यक्षिणी आदि भी दीवारों पर अंकित हैं। यह मंदिर नवीं शताब्दी का माना जाता है। लेकिन शिल्प के साथ ही यहां से प्राकृतिक खूबसूरती को निहारना भी बेहद सुकून भरा लगता है। ऊपर पहाड़ी से दिखाई देने वाला सौंदर्य, जंगल, आसपास फैले खेतों की हरियाली, तालाब और आसमानी अंदाज देखते ही बनता है। दरअसल यहां प्रकृति और शिल्प के अनूठे संगम का नजारा देखने को मिलता है। मालादेवी मंदिर के रास्ते में ही भव्य हिंडोला तोरणद्वार है जिस पर भगवान विष्णु के दशावतार के दर्शन होते हैं। पुरातनकाल मेें यहां विशाल विष्णु मंदिर रहा होगा, जिसका अब ये तोरणद्वार ही बचा है। ग्यारसपुर में ही बाजरा मठ और अठखंबा भी दर्शनीय है।