11 फ़रवरी 2026,

बुधवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

MBBS NEWS IN MP : ग्रामीण क्षेत्र में नहीें जाने पर डॉक्टरों को देने होंगे 10 लाख रुपए

एमबीबीएस के विद्यार्थियों से भरवाए जा रहे 10 लाख के बांड

3 min read
Google source verification
news

विदिशा। अटल बिहारी वाजपेयी शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय।

विदिशा। सरकार government के नियमानुसार एमबीबीएस MBBS की पढ़ाई करने के बाद कम से कम एक साल ग्रामीण क्षेत्र में डॉक्टरी करना अनिवार्य है। लेकिन ज्यादातर डॉक्टर ग्रामीण क्षेत्र में जाना पसंद नहीं करते। जिसके चलते ग्रामीण क्षेत्रों rural areas के स्वास्थ्य केंद्रों पर डॉक्टर्स का टोटा रहता है। इसी कमी को पूरा करने के लिए अटल बिहारी शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय में एमबीबीएस में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों से पढ़ाई पूर्ण करने के बाद ग्रामीण क्षेत्र में एक साल अनिवार्यत: डॉक्टरी करने के लिए 10 लाख रुपए के ग्रामीण सेवा बांड भरवाए जा रहे हैं। जिसके चलते अंचल में डॉक्टरी नहीं करने पर संबंधित को 10 लाख रुपए शासकीय खजाने में जमा करने होंगे।

दो वर्ष की सेवाएं देना अनिवार्य होगा

अटल बिहारी शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय से मिली जानकारी एमबीबीएस में प्रवेश लेने वाले अभ्यर्थियों से 10 लाख रुपए के बांड (बंध-पत्र) भरवाए जा रहे हैंं। जिसके अनुसार एमबीबीएस की पढ़ाई पूर्ण करने के बाद शासन द्वारा निर्दिष्ट स्थान पर एक साल डॉक्टरी करना होगी। इसके लिए .5 प्रतिशत की राशि का नोटराईजेशन भी करवाया जा रहा है। वहीं अन्य पिछड़ा वर्ग के छात्र, जो मेद्यावी विद्यार्थी योजना, मुख्यमंत्री जनकल्याण योजना का लाभ लेते हैं, तो उन्हें शासन द्वारा निर्दिष्ट स्थान पर दो वर्ष की सेवाएं देना अनिवार्य होगा।

सीट छोडऩे पर करने होंगे 30 लाख जमा
इन विद्यार्थियों से एक बांड और 30 लाख रुपए का भरवाया जा रहा है जिसके तहत यदि कोई विद्यार्थी चिकित्सा कॉलेज में प्रवेश लेने के बाद बीच में सीट छोड़कर चला जाता है, तो उसे 30 लाख रुपए जमा करने होंगे। क्योंकि ऐसे में पांच साल तक एक सीट रिक्त रह जाती है और सरकार को काफी नुकसान होता है। कॉलेज में प्रवेश लेने के बाद यदि कोई विद्यार्थी सीट छोडऩा चाहे तो द्वितीय काउंसलिंग के दो दिन के भीतर सीट छोड़ सकता है। इसके बाद छोडऩे पर नियम-शर्तों का उल्लंघन माना जाएगा।

किसी सामुदायिक केंद्र पर नहीं क्लास वन डॉक्टर
ग्रामीण क्षेत्रों के शासकीय अस्पतालों की स्थिति यह है कि जिले के सातों सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में से एक में भी क्लास वन डॉक्टर वर्षों से नहीं है। वहीं क्लास 2 डॉक्टर के तीन पद रिक्त है। इसी तरह जिले के 22 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में क्लॉस-2 डॉक्टर के 28 पद हैं। इनमें से 10 पद लंबे समय से रिक्त हैं। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि ग्रामीण क्षेत्रों में डॉक्टर्स की कितनी आवश्यकता है। डॉक्टर्स की कमी के कारण उपचार कराने के लिए ग्रामीणों को शहर की ओर रुख करना पड़ता है।

इनका कहना है
एमबीबीएस में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों से 10 लाख रुपए का ग्रामीण सेवा बांड भरवाया जा रहा है। जिसके तहत यदि पढ़ाई पूर्ण करने के बाद शासन द्वारा निर्दिष्ट स्थान पर विद्यार्थी एक साल डॉक्टरी नहीं करता है, तो उसे 10 लाख रुपए जमा करने होंगे। वहीं 30 लाख रुपए का बांड अचानक सीट छोड़े जाने की स्थिति में सरकार को होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए भरवाया जा रहा है।
- सुनील नंदेश्वर, डीन, अटल बिहारी शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय, विदिशा