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रहवासी क्षेत्र में मोबाईल टॉवर लगाने की तैयारी, नागरिक कर रहे विरोध

प्रशासन से की टॉवर नहीं लगाए जाने की मांग...

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मोबाइल टॉवर लगाने की तैयारी।

मोबाइल टॉवर लगाने की तैयारी।

सिरोंज। सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन को ठेंगा दिखाते हुए रहवासी क्षेत्र में मोबाइल कंपनी द्वारा टॉवर लगाने की तैयारी की जा रही है। जिसका विरोध स्थानीय नागरिक कर रहे हैं और विरोध स्वरूप प्रशासन को ज्ञापन भी सौंप चुके हैं।

मालूम हो कि कुछ दिन पूर्व भी नागरिकों ने इस टॉवर को लगाए जाने का विरोध किया था। कुछ समय के लिए काम बंद हो गया था, लेकिन फिर दोबारा इसके लगने की तैयारी की जा रही है। जिसके चलते क्षेत्र के नागरिक रविवार को फिर सीएमओ गिरीश श्रीवास्तव को टॉवर नहीं लगाए जाने की गुहार लगाते हुए ज्ञापन सौंपने पहुंचे।

इस दौरान क्षेत्र के कैलाश श्रीवास्तव, मनीष निगम, बब्लू रघुवंशी, भानूसिंह, सौभाग्यसिंह, रघुनंदन सहित बड़ी संख्या में वार्ड वासी मौजूद रहे। भूपत रघुवंषी ने कहा कि कोर्ट के आदेश के बावजूद रहवासी क्षेत्र में नियमों को ताक पर रखकर टॉवर लगाए जाने का काम किया जा रहा है। इससे गंभीर बीमारियां फैलने का खतरा क्षेत्र में बढ़ेगा।

अधिकारियों पर आरोप
वार्डवासियों ने अक्रोष जताते हुए स्थानीय अधिकारियों पर समाजवाद के आरोप लगाते हुए कहा कि जिस भूमि में टावर खड़ा किया जा रहा है उसका सपोर्ट प्रशासनिक अधिकारी कर रहे हैं। भूपतसिंह रघुवंशी ने बताया कि एसडीएम टावर स्थल पर आए थे। उन्होने कहा कि टावर तो यहीं लगेगा आप अपने मकानों के दस्तावेज बताइए।

कोर्ट के आदेश का भी नहीं डर
सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के अनुसार किसी भी आबादी क्षेत्र में 100 मीटर की दूरी पर मोबाइल टावर लगाया जाता है। स्थानीय रहवासियों का कहना है कि मोहल्ले में मनीष जैन के प्लॉट में टावर लगाया जा रहा है। जो कि मोहल्ले के बीचों बीच स्थित है। इससे आसपास के घरों में रेडिएशन का खतरा अधिक बड़ जाएगा।

नागरिकों का कहना है कि जब सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कहा है कि आबादी वाले क्षेत्र में टॉवर नहीं लगाया जाएगा, इसके बावजूद कम्पनी यहां टावर कैसे लगा सकती हैं। वार्डवासियों ने मोहल्ले के बीचों बीच में टावर लगाए जाने का विरोध करते हुए प्रशासन से रोक लगाने की मांग की है।

इलेक्ट्रोमैग्रेटिक किरणें हैं खतरनाक
मालूम हो कि मोबाइल टॉबर से निकलने वाली इलेक्ट्रोमैग्रेटिक वेव्स कैंसर का कारण बनती है। इस रेडिएशन से जानवरों पर भी असर पड़ता है। यही वजह है कि जिस एरिया में मोबाइल टावरों की संख्या अधिक होती है, वहां पक्षियों की संख्या कम हो जाती है। मोबाइल टॉवर के 300 मीटर एरिया में सबसे ज्यादा रेडिएशन होता है।

एंटेना के सामने वाले हिस्से में सबसे ज्यादा तंरगे निकलती हैं। जाहिर है, सामने की ओर ही नुकसान भी ज्यादा होता है। टॉवर के एक मीटर के एरिया में 100 गुना ज्यादा रेडिएषन होता है। टॉवर पर जीतने ज्यादा एंटेना लगे होंगे, रेडिएशन भी उतना ही ज्यादा होगा।

इनका कहना है
नगर की आबादी वाले क्षेत्र में यदि मोबाइल टावर लगाने की अनुमति हमने नहीं दी। पूर्व में भी हम इसका कार्य रूकवा चुके हैं।
- गिरीष श्रीवास्तव, सीएमओ, सिरोंज

कोर्ट के आदेशों का उल्लघन किया जा रहा है। नगर पालिका ने कार्य रूकवा दिया था। लेकिन एसडीएम साहब आए थे टावर का बोले यहीं लगेगा हमें अपने मकानों को दस्तावेज दिखाने को कहा है।
- भूपतसिंह रघुवंशी, वार्डवासी, सिरोंज

नियम की बात करें तो सभी टावर अनलीगल हैं। फिर तो सबको हटना चाहिए। मेरे पास तो आवेदन आया था इसलिए मैने दिखवाया। यदि वार्ड के लोगो का आवेदन आएगा तो उसे भी दिखवाउंगा।
- संजय जैन, एसडीएम, सिरोंज