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पांच साल पहले खुले VIDISHA MEDICAL COLLEGE की मान्यता खतरे में

फैकल्टी और सुविधाओं की कमी के कारण ZERO YEAR रहने का खतरा

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पांच साल पहले खुले VIDISHA MEDICAL COLLEGE की मान्यता खतरे में

पांच साल पहले खुले VIDISHA MEDICAL COLLEGE की मान्यता खतरे में

विदिशा. अटल बिहारी वाजपेयी शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय की शुरुआत 2018 में हुई थी, लेकिन पांच साल बाद ही अब इस चिकित्सा महाविद्यालय की मान्यता को लेकर खतरा गहरा गया है। फरवरी-मार्च में ही नेशनल मेडिकल काउन्सिल का विदिशा मेडिकल कॉलेज में दौरा होना है और मान्यता के लिहाज से इस दौरे का बहुत महत्व है। कॉलेज में इस निरीक्षण में फैकल्टी और उपकरणों समेत अन्य सुविधाओं पर ही ज्यादा फोकस होता है और इसी के आधार पर स्नातक के प्रथम वर्ष की मान्यता का नवीनीकरण और स्नातकोत्तर की उपाधि शुरू करने की मान्यता मिलने की उम्मीद रहती है। लेकिन इस बार फैकल्टी और उपकरणों के लिहाज से यह मान्यता मिलने में बाधा महसूस की जा रही है। लेकिन लोकल कॉलेज प्रबंधन के हाथ मे कुछ नहीं। यदि समय रहते शासन ने कॉलेज की खामियों को पूरा नहीं किया तो संभव है कि पांच साल पहले ही शुरू हुए इस मेडिकल कॉलेज में इस बार जीरो ईयर रह जाए।

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अबिवा शासकीय मेडिकल कॉलेज विदिशा

कब शुरू हुआ था कॉलेज- 2018 में

-अभी कितने छात्र-छात्राएं- 840

क्या सुविधाएं हैं-अस्पताल संचालित है, आईपीडी संचालित है, ऑपरेशन होते हैं।

क्या नहीं है- ब्लड बैंक नहीं है, सीटी स्कैन नहीं है, एमआरआई सुविधा नहीं है।

ओपीडी प्रतिदिन- करीब 800-900 मरीज प्रतिदिन।

रेफर प्रति माह- करीब 50-60 मरीज प्रति माह।

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पहले ही कम थे, अब चार और चले गए डॉक्टर

मेडिकल कॉलेज में पहले ही विभिन्न श्रेणी के चिकित्सकों की कमी थी। लेकिन अब शासन स्तर से लिए गए निर्णय से चार और विशेषज्ञों को अन्यत्र भेज दिया गया है, इससे व्यवस्थाएं तो प्रभावित हो ही रही हैं, सबसे बड़ा खतरा कॉलेज के मान से फैकल्टी के न होने का भी खड़ा हो गया है, जिससे एनएमसी की मान्यता पर असर पड़ सकता है। माना जा रहा है कि अभी कॉलेज में मानकों के विपरीत करीब 30 प्रतिशत पद फैकल्टी के खाली हैं, जो स्नातक प्रथम वर्ष की मान्यता के साथ ही स्नातकोत्तर की मान्यता के लिए बाधा बन सकते हैं।

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एमआरआई और ब्लड बैंक तक की सुविधा नहीं

मेडिकल कॉलेज को संचालित हुए पांच साल हो गए, लेकिन अब तक यहां एमआरआई और ब्लड बैंक की सुविधा तक उपलब्ध नहीं हो सकी है। सीटी स्कैन की कहानी ही और है। मशीन आने के बाद टेंडर कैंसिंल करने और दोबारा से फिर टेंडर कैंसिल कर देने से यह मशीन झमेले में फंस गई और इस बीच जिला अस्पताल में सीटी स्कैन सुविधा शुरू कर दी गई। अब मेडिकल कॉलेज को सीटी स्कैन के लिए जिला अस्पताल पर आश्रित रहना पड़ रहा है। उधर एमआरआई और ब्लड बैंक की सुविधा न मिलने से मेडिकल कॉलेज के मानकों सहित मरीजों को मिलने वाली स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो रही हैं।

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इन विशेषज्ञों को भेजा प्रतिनियुक्ति पर

विदिशा मेडिकल कॉलेज के अिस्थ रोग विशेषज्ञ डॉ अतुल को भोपाल, डॉ विपिन मिश्रा को सतना, स्त्री रोग विभाग की डॉ सौम्या तिवारी को सतना तथा मेडिसिन विभाग के डॉ अरविंद चौहान को भोपाल गांधी मेडिकल कॉलेज में प्रतिनियुक्ति पर भेजा गया है। यही कारण है कि पहले से फैकल्टी की कमी से जूझते विदिशा मेडिकल कॉलेज के सामने मुश्किलें खड़ी हो गई हैं। खासकर उस समय जब कॉलेज स्थापित होकर सुचारू रूप से चलने की िस्थति में आने को है।

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वर्जन...

मेडिकल कॉलेज के चार चिकित्सकों को प्रतिनियुक्ति पर भेजा गया है। इससे समस्या तो है। यह भी सही है कि एमआरआई जैसी सुविधाएं अभी शुरू नहीं हो पाई हैं। लेकिन हमें भरोसा है कि सरकार समय रहते व्यवस्थाएं जुटा लेगी और एनएमसी का दौरा निर्विघ्न पूरा होगा।

-डॉ सुनील नंदीश्वर, डीन मेडिकल कॉलेज विदिशा।

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