
खस्ताहाल होने लगा कम्पोजिट भवन
विदिशा. नव निर्मित कंपोजिट भवन के निर्माण में बड़ी लापरवाही बरती गई है। जिसके चलते इसके शुरु होने से पहले ही यह खस्ताहाल होने लगा है और दीवारों में बड़ी-बड़ी दरारें आ जाने के कारण भवन का पिछला हिस्सा धराशायी होने की कगार पर आ गया है।
भवन के पीछे की तरफ दीवार में मोटी-मोटी दरारें आ गई हैं। स्थिति यह है कि आधा दर्जन से अधिक प्लर क्रेक हो गए हैं। भवन में भी कई जगह दरारें आ रहीं हैं, जिन्हें ठेकेदार द्वारा रंगाई-पुताई कर ढांकने का प्रयास किया जा रहा है। 'पत्रिकाÓ ने सोमवार को जब कंपोजिट भवन का मुआयना किया, तो कुछ ऐसे दृश्य कई जगह नजर आए।
आगे आकर्षक, पीछे खस्ताहाल
भवन का आगे का हिस्सा तो देखने में बड़ा ही खूबसूरत नजर आता है। बकायदा आकर्षक कांच लगाए गए हैं और आकर्षक लुक दिया गया है। लेकिन भवन के जस्ट पीछे की तरफ जैसे ही जाएंगे, तो भवन निर्माण में बरती गई कोताही साफ नजर आ जाएगी।
जमीन से सटकर ही दीवार में करीब आधा फीट मोटी लम्बी-लम्बी दरारें आ गई हैं। कुछ दरारों को तो सीमेंट-बजरी का मसाला लगाकर ढंकने का प्रयास किया गया है। वहीं वहीं कुछ दरारें इतनी मोटी हैं कि मसाला लगने के बाद भी वे दोबारा दिखने लगीं हैं। वहीं आधा दर्जन से अधिक पिलर भी जमीन में नीचे इतने धस गए हैं कि बीच में मोटी-मोटी दरारें आ गईं हैं।
पीछे की तरफ की लगभग पूरी दीवार में ही जगह-जगह छोटी-बड़ी दरारें आ गई हैं। इसी प्रकार पीछे से दायीं तरफ की दीवारों में भी दरारें आ रहीं हैं और कुछ जगह तो जमीन का बेसमेंट ही चटक गया है। ऐसे में भवन के पीछे की तरफ का हिस्सा कभी भी धसकने का खतरा मंडराने लगा है। वहीं भवन के भीतर भी जगह-जगह छोटी-बड़ी दरारें नजर आ जाएंगीं।
साढ़े तीन करोड़ का फर्नीचर आना शेष
इस कंपोजिट भवन का निर्माण कार्य करीब चार साल से अधिक समय से चल रहा था। सरकारी रिकार्ड के अनुसार अब तक भवन निर्माण का कार्य लगभग पूर्ण हो चुका है। इस पर अब तक करोड़ों रूपए खर्च हो चुका है। वहीं करीब साढ़े तीन करोड़ रूपए की लागत से यहां फर्नीचर लगाया जाना शेष है। इसके साथ ही कुछ ऊपरी कार्य बचे हैं। अधिकारियों के अनुसार लगभग एक-डेढ़ माह में सभी विभाग इस भवन में शिफ्ट हो जाएंगे।
सभी दफ्तर रहेंगे एक ही भवन में
मालूम हो कि इस कंपोजिट भवन में कलेक्टर, एडीएम के दफ्तर सहित सभी सरकारी विभागों के दफ्तर रहेंगे। एक ही भवन में सभी सरकारी कार्यालय होने से सभी को सुविधा होगी। नागरिकों को एक दफ्तर से दूसरे दफ्तर जाने के लिए यहां-वहां नहीं भटकना पड़ेगा।
वहीं कलेक्टर द्वारा भी विभिन्न विभागों पर एक साथ एक ही जगह से निगरानी की जा सकेगी। वहीं कलेक्टर दफ्तर भी कंपोजिट भवन में होने से अन्य विभागों के अधिकारी-कर्मचारी भी काम में लापरवाही नहीं बरत पाएंगे।
कंपोजिट भवन में दरारें आने लगीं हैं, तो यह गलत है। मामले की जांच कराई जाएगी और निर्माण कार्य में लापरवाही बरतने वाले संबंधितों पर कार्रवाई की जाएगी।
- रविशंकर राय, एसडीएम, विदिशा
Published on:
03 Jul 2018 09:07 am
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