श्रीराम कथा सुनने उमड़ रही श्रद्धालुओं की भीड़...
शमशाबाद@अनिल कुमार सोनी की रिपोर्ट...
युवा मंच द्वारा आयोजित संगीतमयी नौ दिवसीय श्रीराम कथा में कथा के दौरान कथा वाचक पंडित गोवर्धन शास्त्री महाराज ने कहा कि रामायण हमें जीवन जीने की कला सिखाती है।
उन्होंने कहा कि जीवन का सूत्र है कि शुभ कार्य तुरंत करना चाहिए और अशुभ कार्य कल के लिए छोड़ देना चाहिए। लेकिन हम लोग इसका विपरीत करते हैं। राजा दशरथ से भी यही भूल हो गई थी। जब प्रभु राम के राजतिलक की बात आई तो गुरु वशिष्ठ ने यह कार्य आज ही करने के लिए कहा था, लेकिन राजा दशरथ ने कह दिया था कि आज नहीं कल राजतिलक करेंगे।
उन्होंने कहा कि प्रभु राम को वनवास कैकई के कारण नहीं हुआ। बल्कि राम वन गमन के कई कारण थे। एक तो राज्याभिषेक को कल के लिए टाल दिया था।
दूसरा कारण था राजा दशरथ द्वारा गुरु वशिष्ठ का अपमान करना। नाथ सकल सुख साथ तुम्हारे, शरत बिफल बिन बदन तुम्हारे दोहे के माध्यम से माता सीता को वन में साथ ले जाने के लिए श्रीराम से करने वाले तर्कों का वर्णन किया गया। उन्होंने कहा कि देश्, धर्म और संस्कृति की रक्षा के लिए भारतीय महिलाओं ने अपनी गोद सूनी की। माथे का सिन्दूर अपने हाथ से मिटाया। भगवान का हृदय मां जैसा होता है।
इधर, अहमदपुर में श्रीमद्भागवत कथा में हुआ कृष्ण जन्मोत्सव
अहमदपुर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन रविवार को भगवान कृष्ण का जन्मोत्सव श्रद्धालुओं द्वारा हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस दौरान फूलों की वर्षा की गई और दूध, दही, मिश्री का प्रसाद वितरित किया गया। इस दौरान जिला पंचायत अध्यक्ष तोरण सिंह दांगी, जनपद अध्यक्ष प्रतिनिधि रणधीर सिंह ने कथा वाचक किशोरी निधी दीदी को पगड़ी पहनाकर स्वागत किया। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।
सिरोंज में संगीतमयी श्रीराम कथा सुनने उमड़ रही भीड़
ग्राम इमलानी में चल रही संगीतमयी श्रीराम कथा में रविवार को कथा वाचक साध्वी सुगनाजी ने कहा कि भगवान श्रीराम ने रावण रूपी विपत्ति को दूर करने के लिए धनुष उठाया। मानव जाति के कल्याण के लिए भगवान श्रीराम ने मानव रूप धारण किया। क्योंकि सत्य की राह पर चलकर ही चरित्र निर्माण होता है।
उन्होंने कहा कि रामचरित्र मानस के रचियता गोस्वामी तुलसीदास ने प्रभु राम को ही सृष्टि का रचियता कहा है। तुलसीदास कहते हैं कि सीताराम दो भिन्न नाम होते हुए भी अभिन्न हैं। साध्वी ने कहा कि जीवन में कभी भी सीधी राह से भटकना नहीं चाहिए।
सत्य की राह पर चलकर चरित्र निर्माण होता है। वेदों में लिखा है कि बुद्धि रूपी चांद से तर्क रूपी ग्रहण को हटाओ तर्क का आश्रय न लें। बुद्धि पर पड़े बाल रूपी जाल को हटा देें। उन्होने कहा कि तुलसीदास कहते हैं कि भगवान शिव भी प्रभु श्रीराम का आश्रय लेते हैं। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।