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खेल और खिलाडिय़ों को तरसता सिरोंज का स्टेडियम

2012 में स्वीकृत, 2014 में तैयार, 2020 में खेल विभाग को सौंपा पर खेल अब तक नहीं

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खेल और खिलाडिय़ों को तरसता सिरोंज का स्टेडियम

खेल और खिलाडिय़ों को तरसता सिरोंज का स्टेडियम

विदिशा. खेलों को महत्व देने की खूब बात हो रही है। ओलंपिक में भारत के बेहतर प्रदर्शन से उम्मीदें और बढ़ गई हैं, लेकिन छोटे शहरों की ओर देखने वाला कोई नहीं। अधिकांश खिलाड़ी छोटे शहरों से ही निकलकर चमकते हैं, लेकिन उन्हें सुविधाएं देने के नाम पर हमेशा सरकारी मशीनरी रेंगती सी ही दिखती है। सिरोंज में भी तत्कालीन मंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा के समय 2011-12 में स्वीकृत हुआ खेल स्टेडियम ऐसी ही उदासीनता का शिकार हो रहा है। 2012 में स्वीकृति के बाद 64 लाख रुपए की लागत से 2014 में यह बनकर तैयार हुआ। फिर छह साल तक लावारिस से पड़ा रहा और किसी तरह 2020 में खेल विभाग को सौंपा गया। लेकिन खेल विभाग भी डेढ़ वर्ष में इसमें एक खिलाड़ी को भी खेलने के लिए प्रवेश नहीं दिला सका। पूरा स्टेडियम समतलत नहीं हो सका है। अब विभाग बजट का रोना रोता दिख रहा है।


प्राप्त जानकारी के अनुसार तत्कालीन मंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा ने 2011-12 में सिरोंज में खेल सुविधाएं मुहैया कराने की मंशा से खेल स्टेडियम स्वीकृत कराया था। करीब दो हेक्टेयर जमीन पर भैरव पठार पर इसका निर्माण किया गया और 2014 में यह बनकर तैयार हुआ। बनकर तैयार क्या हुआ, एक छोटा सा भवन परिसर में बना और चौतरफा बाउंड्री कर एक गेट लगा दिया गया और कुछ सीढिय़ां बनाकर दर्शकों के बैठने का इंतजाम कर दिया गया। लेकिन इसके बाद करीब छह साल तक निर्माण एजेंसी और ख्ेाल विभाग के बीच खींचतान के चलते इसे खेल विभाग को हैंडओवर नहीं किया जा सका। बताया गया है कि 2020 में यह खेल स्टेडियम खेल एवं युवा कल्याण विभाग को सौंपा गया है। लेकिन जब से यह खेल विभाग के अधीन आया है तब से भी यहां खेल गतिविधियों के लिए कोई मौका तलाशने का भी काम नहीं हुआ। प्रेक्टिस के लिए किसी खिलाड़ी को स्टैडियम में प्रवेश करने का भी मौका नहीं दिया गया। इतना ही नहीं मैदान का समतलीकरण भी नहीं हो सका है। पूरा मैदान ऊबड़-खाबड़ और बेतरतीब सा पड़ा है। अंदर कहीं लंबी घास है तो कहीं आग से घास जलाई हुई दिखती है। कहीं कंकड़ और पत्थरों के ढेर हैं तो कहीं समतलीकरण के नाम पर छोटे-छोटेे टीले से दिखाई देते हैं। यहां न कोई देखने वाला है और न ही खिलाडिय़ों को प्रवेश देने वाला।


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सिरोंज स्टेडियम हमें हैंडओवर कर दिया गया है, लेकिन वहां अभी स्टॉफ नहीं मिला है, इसलिए खेल गतिविधियां शुरू नहीं हो पा रही हैं। मैदान का समतलीकरण सहित कुछ अन्य कार्य भी होना है, उसके लिए जब बजट मिलेगा तभी काम हो पाएगा।
-पूजा कुरील, जिला खेल अधिकारी विदिशा

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खेल स्टेडियम पूर्व मंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा ने स्वीकृत कराया था। लेकिन उसमें अब तक सुविधाएं ही नहीं हैं तो उपयोग कैसे होगा? मैंने विधानसभा में भी इस पर सवाल किया था, इसके लिए राशि स्वीकृत है, काम पूरा कराकर विभाग को यहां खेल गतिविधियां शुरू कराना चाहिए।
-उमाकांत शर्मा, विधायक सिरोंज