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आपातकाल के बाद सक्रीय राजनीति में आईं थी सुषमा स्वराज, देश के इस राज्य से था खास रिश्ता

गजब की याददाश्त... बोली थीं- आप देखना एक दिन चुपचाप चली जाऊंगी... मतदाताओं से भाई-बहन का रिश्ता... AIIMS की दी थी सौगात...

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सुषमा स्वराज / Sushma Swaraj

भोपाल। भाजपा ( bjp ) की कद्दावर नेता व पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ( sushma swaraj ) का मंगलवार 06 अगस्त, 2019 को निधन हो गया। वह 67 वर्ष की थीं।


मंगलवार को सुषमा स्वराज ( Sushma Swaraj ) को सीने में दर्द की शिकायत के बाद एम्स में भर्ती किया गया था। निधन से 3 घंटे पहले सुषमा स्वराज ( Sushma Swaraj ) ने एक ट्वीट में कश्मीर से अनुच्छेद 370 ( Article 370 ) हटाए जाने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ( Narendra Modi ) को बधाई दी थी।


इससे पहले 2019 के लोकसभा चुनावों में सुषमा स्वराज ( Sushma Swaraj ) चुनाव से इनकार कर दिया था। राजनीति में सशक्त महिला नेता के रूप में पहचान बनाने वालीं पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ( Sushma Swaraj ) ने 21 नवंबर 2018 को इंदौर में लोकसभा चुनाव नहीं लडऩे का ऐलान किया था। उन्होंने राजनीतिक जीवन की शुरुआत 1977 में हरियाणा के अंबाला से विधायक के तौर पर की थी। वहीं चुनावी राजनीति से संन्यास की घोषणा मध्यप्रदेश में की। वे देश के छह राज्यों में राजनीतिक रूप से सक्रिय रहीं।

गजब की याददाश्त...

याददाश्त के मामले में भी सुषमा स्वराज ( Sushma Swaraj ) का कोई सानी नहीं। पहले ही चुनाव में जब वे विदिशा चुनाव लड़ने पहुंचीं तो बहुत कम समय में उन्हें एक-एक बूथ और एक-एक बूथ के कार्यकर्ता मंडल के अध्यक्ष पदाधिकारी से लेकर सारे कार्यकर्ताओं का नाम तक याद हो गया था। जब भी कोई सामने आता तो वह उसका नाम लेकर पुकारा करती थीं।

बोली थीं- आप देखना एक दिन चुपचाप चली जाऊंगी...
पत्रिका समूह में काजकाज के दौरान चार बार ऐसे अवसर आए, जब सुषमा स्वराज ( Sushma Swaraj ) से मिलने का अवसर मिला। उनसे सबसे बड़ी याद उदयपुर से जुड़ी हैं। यहां 'पत्रिका' ने पासपोर्ट सेवा केन्द्र की स्थापना के लिए बड़ी मुहिम छेड़ी थी।

खबरें प्रकाशित कर जनभावनाओं को विदेश मंत्रालय और विदेश मंत्री तक पहुंचाने और उनका ध्यान आकृष्ट करने का काम किया था। उस समय लगातार समाचारों को सुषमा के हैंडल पर ट्वीट करते थे। पूरी फाइल भी उन तक गई। उन्होंने मुझे फोन किया और कहा कि उदयपुर में पीएसके (पासपोर्ट सेवा केंद्र) जरूर स्थापित होगा और वे स्वयं इसके उद्घाटन के लिए आएंगी।

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यही भाव उन्होंने पीएसके के उद्घाटन अवसर पर दिखाया। करीब आधा घंटा उनके साथ रहा। सुषमा स्वराज ( Sushma Swaraj ) ने हल्की मुस्कुराहट के साथ धीमे से कहा, मैं इसी तरह जीना पसंद करती हूं, देखना एक दिन इसी तरह से चुपचाप चली भी जाऊंगी। 'पत्रिका' को लेकर बोला, यह तो अपना अखबार है। लोगों की आवाज बनता है। उन्होंने यह भी कहा कि आपके प्रधान संपादक गुलाब कोठारी को भी बोलना, 'पत्रिका के अभियान को मैंने परिणाम तक ला दिया। - राजेश कसेरा

विदिशा के मतदाताओं से बनाया था भाई-बहन का रिश्ता...
2009 में जब सुषमा स्वराज ( Sushma Swaraj ) पहली बार विदिशा आई थीं तो उन्होंने क्षेत्र के मतदाताओं से भाई-बहन का रिश्ता बनाया था। वह हर भाषण में इसे दोहरातीं थीं। वह क्षेत्र के लोगों से रक्षा का वचन भी मांगती थीं। यही वजह रही कि वह इस क्षेत्र की निवासी नहीं होने के बावजूद लोगों के दिलों में अपनी जगह बनाने में कामयाब रहीं।

उनका लोकसभा क्षेत्र विदिशा हो या मप्र का कोई भी कार्यकर्ता अथवा महिलाएं, सभी उन्हें दीदी कहकर पुकारा करते थे। 2009 में विदिशा लोकसभा क्षेत्र से रिकार्ड मतों से जीतने के बाद सुषमा स्वराज ( Sushma Swaraj ) लोकसभा में प्रतिपक्ष की नेता बनीं। लोकसभा में अत्यधिक व्यस्तता के बाद भी सुषमा अपने विदिशा लोकसभा क्षेत्र को हर महीने पांच दिन दिया करती थीं।

विदिशा के विकास को लेकर सुषमा स्वराज ( Sushma Swaraj ) हर महीने समीक्षा बैठक करती थीं। इसमें न सिर्फ पार्टी के कार्यकर्ता, बल्कि सरकारी अधिकारियों-कर्मचारियों से भी वे बात किया करती थीं। रक्षाबंधन का पर्व हमेशा सुषमा स्वराज ( Sushma Swaraj ) ने विदिशा में ही मनाया। अपने सारे कार्यकर्ताओं को रक्षाबंधन पर राखियां बांधा करती थीं।

विदिशा संसदीय क्षेत्र से लंबे समय तक सांसद रहने के बाद भाजपा ने शिवराज सिंह चौहान को मध्य प्रदेश का मुख्यमंत्री बनाया था। इसके बाद हुए उपचुनाव में रामपाल सिंह राजपूत सांसद बने। इसके बाद 2009 में आम चुनाव में भाजपा ने यहां से सुषमा स्वराज ( Sushma Swaraj ) को प्रत्याशी बनाया।

जब वह प्रचार के लिए गांवों में सभाएं करतीं थीं तो उनका भाषण राजनीतिक न होकर पूरी तरह भावनात्मक होता था। वह हर सभा में कहतीं थीं कि यहां के मतदाता उनके भाई हैं। एक बहन उनसे रक्षा का वचन लेने आई है।

वह कहतीं थीं कि इस क्षेत्र के मतदाताओं के सम्मान की वह भी रक्षा करेंगी। वह अपनी इस शैली से सीधे मतदाताओं के दिल में जगह बनाती गई। पहले चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी का फॉर्म निरस्त होने के बावजूद सतत प्रचार में जुटी रहीं। चुनाव जीतने के बाद वह जिले के अलग-अलग क्षेत्रों में आभार जताने पहुंचीं।

उन्होंने पहले चुनाव के बाद कहा था कि वह अपने संसदीय क्षेत्र में हर माह चार दिन रहेंगी, जिस पर उन्होंने पूरे पांच साल अमल किया। लेकिन, दूसरे कार्यकाल में सुषमा स्वराज ( Sushma Swaraj ) अस्वस्थता के कारण इसे कायम नहीं रख पाई। 2014 से 2016 तक वह क्षेत्र से सीधे जुड़ी रहीं। इसके बाद किडनी का ऑपरेशन होने पर वह करीब ढाई साल से विदिशा नहीं आईं थीं। आखिरी बार वह विदिशा पिछले साल ऑडिटोरियम के लोकार्पण कार्यक्रम में भाग लेने आई थीं।

मध्य प्रदेश से रहा है गहरा नाता...
देश की राजनीति मेंसुषमा स्वराज ( Sushma Swaraj ) का बड़ा नाम रहा है। वैसे तो सुषमा स्वराज का कई राज्यों से रहा है, मगर सियासी तौर पर मध्य प्रदेश से उनका नाता काफी मजबूत रहा है। क्योंकि सुषमा स्वराज ( Sushma Swaraj ) मध्य प्रदेश के विदिशा से एक बार नहीं, बल्कि दो बार चुनाव जीतकर लोकसभा पहुंची थीं। सुषमा स्वराज ( Sushma Swaraj ) साल 2009 और 2014 में विदिशा लोकसभा सीट से ही चुनाव जीतकर लोकसभा पहुंचीं थी।

2014 में चुनाव जीतने के बाद इन्हें मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में विदेश मंत्री बनाया गया था। बतौर विदेश मंत्री उन्होंने अपने कामों से कई कीर्तिमान स्थापित किए। अपने कार्यकाल के दौरान महज ट्वीट से लोगों की मदद करने का भी काम करती थीं सुषमा स्वराज ( Sushma Swaraj )। देश-विदेश में रह रहे भारतीयों के मदद के लिए वह ट्वीट का सहारा ही लेती थीं और सोशल मीडिया के जरिए तुरंत समस्या का निपटान कर देती थीं।

मध्यप्रदेश को दी भोपाल अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान ( aiims ) की सौगात...
सुषमा स्वराज ( Sushma Swaraj ) मप्र के विदिशा लोकसभा क्षेत्र से दो बार सांसद निर्वाचित हुईं। इससे पहले वे प्रदेश के कोटे से राज्यसभा में सदस्य भी रहीं।

2008 में सुषमा स्वराज ने भोपाल को अपना स्थाई ठिकाना बना लिया था और प्रोफेसर कॉलोनी स्थित सरकारी बंगले में रहने लगी थीं। भोपाल का अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) भी सुषमा स्वराज ( Sushma Swaraj ) की ही देन है। 2004 में तत्कालीन अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में स्वास्थ्य मंत्री रहते हुए सुषमा स्वराज ( Sushma Swaraj ) ने भोपाल में एम्स की आधारशिला रखी थी।

राजनैतिक कॅरियर: आपातकाल का विरोध करने के बाद आईं सक्रिय राजनीति में...

सुषमा स्वराज ( Sushma Swaraj ) आपातकाल का विरोध करने के बाद सक्रिय राजनीति में आईं। आपातकाल की के बाद जनता पार्टी की सदस्य बनीं। 25 साल की उम्र में हरियाणा की देवी लाल सरकार में कैबिनेट मंत्री बनने का रेकॉर्ड भी बनाया था। भारतीय जनता पार्टी के गठन में भी शामिल रहीं। 1990 में उन्हें राज्यसभा के सदस्य के रूप में निर्वाचित किया गया।

सुषमा 1996 में दक्षिण दिल्ली संसदीय सीट से सांसद निर्वाचित हुईं। 13 दिन की अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में सूचना प्रसारण मंत्री रहीं। अक्टूबर 1998 में उन्होंने केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया और दिल्ली की पहली महिला मुख्यमंत्री बनीं। 1999 में सुषमा स्वराज ( Sushma Swaraj ) एक बार फिर से केन्द्रीय राजनीति में लौंटी। उन्होंने कर्नाटक के बेल्लारी लोकसभा सीट से कांग्रेस की तत्कालीन अध्यक्ष सोनिया गांधी के खिलाफ चुनाव लड़ा।

हालांकि इस दौरान सुषमा चुनाव हार गईं। साल 2000 में वह उत्तर प्रदेश से राज्यसभा सदस्य निर्वाचित हुईं। 9 नवंबर 2000 को उत्तर प्रदेश के विभाजन पर, उन्हें उत्तराखण्ड में स्थानांतरित कर दिया गया। इस दौरान सुषमा स्वराज ( Sushma Swaraj ) केन्द्र में सूचना और प्रसारण मंत्री के साथ कई विभागों की जिम्मेदारी संभाली।

सुषमा स्वराज ( Sushma Swaraj ) 2006 में मप्र से राज्यसभा में तीसरे कार्यकाल के लिए निर्वाचित हुईं। वे 2009 में विदिशा से लोकसभा के लिए निर्वाचित हुईं और विपक्ष की नेता बनीं। 2014 में भाजपा ने फिर उन्हें विदिशा से मैदान में उतारा और उन्होंने जीत दर्ज की। उसके बाद वह मोदी सरकार में विदेश मंत्री बनीं।

मध्य प्रदेश के नेताओं ने दी श्रद्धांजलि...

मुख्यमंत्री कमलनाथ ने शोक व्यक्त करते हुए कहा कि पूर्व केंद्रीय मंत्री, बहन सुषमा स्वराज के निधन की खबर सुनकर स्तब्ध हूं। दिवंगत आत्मा को श्रद्धांजलि। ईश्वर से प्रार्थना है कि उनके परिजनों, समर्थकों को ये दु:ख सहन करने का संबल प्रदान करें।

पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने दु:ख व्यक्त करते हुए लिखा कि हमारी सुषमा दीदी हम सभी को छोड़कर चली गईं। अस्वस्थ होने के बावजूद भी वे विदिशा सहित प्रदेश की जनता की सेवा करती रहीं। मुझे उनसे हमेशा ही जनसेवा की प्रेरणा मिली। दीदी आप जहां कहीं भी हों, आपका आशीर्वाद सदैव मिलता रहे, यही ईश्वर से प्रार्थना है।