
उदयगिरी की पहाड़ी यानी प्रकृति का सौंदर्य और गुफाओं में चौथी शताब्दी का शिल्प
विदिशा. विश्व पर्यटन स्थल सांची से मात्र 8 किमी की दूरी पर स्थित उदयगिरी की पहाड़ी प्रकृति, शिल्प, संस्कृति और इतिहास का खूबसूरत मिश्रण है। पहले इस पहाड़ी का नाम नीचैगिरी था, लेकिन 10 वीं शताब्दी में जब विदिशा परमार राजाओं के हाथ में आया तो राजा उदयादित्य के नाम से इसे उदयगिरी कहा जाने लगा। अब भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के अधीन इस पहाड़ी की खासियत है कि इसमें चौथी शताब्दी की चंद्रगुप्त द्वितीय के समय की कई प्रतिमाओं के लिए गुफाओं का निर्माण किया गया। यहां 20 गुफाएं हैं, हालांकि अब अधिकांश मूर्ति विहीन हैं, लेकिन इनमें से गुफा नंबर 5 नरवराह की विशाल और भव्य प्रतिमा के कारण सबसे ज्यादा प्रभावी और आकर्षक है। गुफा नंबर 6 के बाहर की ओर यहां महिषासुर मर्दिनी की बारह भुजी प्रतिमा अद्वितीय है। गुफा 6 के द्वार पर ही दोनों ओर द्वारपाल हैं जिनके बालों की शैली रोमन शैली दिखती है। यहीं पास में बाल गणेश की प्रतिमा है, जिसे मप्र की सबसे प्राचीन गणेश प्रतिमा माना जाता है। गुफा नंबर 13 में शेषाशायी विष्णु की विशाल प्रतिमा है। गुफा 4 में मुखलिंगी शिव की आकर्षक प्रतिमा है। इसके अलावा गुफाओं में अनेक प्रतिमाएं और शिल्प मौजूद है। पहाड़ी पर ऊपर तक जाने और पर्यटकों की सुविधा के लिए पूरा पाथवे बनाकर रैलिंग लगाई है। कुछ स्थानों पर बैठने के लिए बैंच की भी व्यवस्था है। पहाड़ी पर ही सिंधिया रियासत के निशान वाला एक विश्रामगृह भी बना हुआ है। पहाड़ी के पास ही बहती बैस नदी और पहाड़ी से चौतरफा हरियाली देखना मन को सुकून देने वाला है।
Published on:
26 Sept 2021 10:27 pm
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