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UDAYGIRI का मेला और परम्पराओं की परिक्रमा

परिक्रमा पर निकले 76 मंदिरों के निशान

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UDAYGIRI का मेला और परम्पराओं की परिक्रमा

UDAYGIRI का मेला और परम्पराओं की परिक्रमा

विदिशा. अक्षय नवमी पर नगर में उदयगिरी परिक्रमा की परम्परा पूरे उल्लास के साथ पूरी की गई। उदयगिरी पहाड़ी की तलहटी में देहाती मेला लगा। हजारों लोगों ने पहाड़ी और पूरे परिसर का भ्रमण कर वहां आंवला वृक्षों की पूजा की और भोजन ग्रहण किया। दोपहर बाद से देर शाम तक यहां भारी भीड़ रही। लोगों को पहाड़ी के खतरनाक हिस्सों से हटाने में पुलिस को भी खासी मशक्कत करना पड़ी। वहीं उदयगिरी परिक्रमा में नगर के 76 मंदिरों के ध्वज शामिल हुए। शाम को परिक्रमा का समापन रामलीला परिसर में ध्वजों की आरती के साथ हुआ।

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ध्वजों की आरती-पूजा से शुरू हुई परिक्रमा

उदयगिरी परिक्रमा की शुरुआत बुधवार की सुबह 10:30 बजे चौपड़ा स्थित विश्वनाथपुरम से हुई। यहां कतारबद्ध खड़े मंदिरों के निशानों की रामलीला समिति के प्रधानसंचालक पं. चंद्रकिशोर मिश्र, डॉ सुधांशु मिश्र, सुरेश शर्मा शास्त्री, रामलीला मेला समिति के मानसेवी सचिव डॉ अनिल शर्मा, मनोज शर्मा, ज्ञानसिंह जाट, केएन शर्मा, विश्वेश्वर शर्मा, पूर्व नपाध्यक्ष मुकेश टंडन, सांसद प्रतिनिधि राकेश शर्मा सहित अनेक लोगों ने की। फिर गाजे बाजे के साथ परिक्रमा को रवाना किया गया।

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गणेश मंदिर का ध्वज लेकर शामिल हुए टंडन

यह पहला मौका था जब उदयगिरी परिक्रमा में बाढ़ वाले गणेश मंदिर का ध्वज लेकर स्वयं पूर्व नपाध्यक्ष मुकेश टंडन भी शुरुआत से ही शामिल हुए। उन्होंने ध्वज की पूजा की और कतार में शामिल हुए तथा आरती उतारी। ध्वज पर बाढ़ वाले गणेश मंदिर का नाम भी लिखा हुआ था।

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जगह-जगह पूजा, आरती

उदयगिरी परिक्रमा में पं. सुरेश शर्मा शास्त्री ने जगह-जगह मंदिरों की पूजा आरती कराई। उन्होंने भैरव मंदिर, शेषाशायी विष्णु, नृसिंह शिला, अमृत मंथन गुफा, जटाशंकर, बड़े गणेश मंदिर सहित अनेक देव स्थानों में पूजा कराते हुए आगे बढ़े। जहां जहां पूजा के लिए ध्वज रुकते वहां ध्वजधारी भजन कीर्तन में लग जाते। यह क्रम रामलीला परिसर में परिक्रमा के समापन तक चला।

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ठेठ देहाती मेला और पर्यटन का आनंद

उदयगिरी में अक्षय नवमी पर ठेठ देहाती मेले और पर्यटन का हजारों लोगों ने आनंद लिया। यहां मुख्य सडक़ और पहाड़ी की तलहटी में ग्रामीण उपयोग की चीजों की दुकानें सजीं थीं। लोग चाट, सोफ्टी के आनंद के साथ ही खिलौनों, मनिहारी, सिंदूर, माला, सजावटी सामान आदि की खरीदारी कर रहे थे। झूलों का आनंद भी बच्चे ले रहे थे। बड़ी संख्या में लोग यहां आने के बाद पहाड़ी के ऊपर तक चढ़े चले जा रहे थे। हर तरफ सेल्फी का जोर था। खतरनाक हिस्सों में चढकऱ भी युवा वर्ग सेल्फी लेने और फोटो खिंचवाने में मशगूल रहा। शाम होते ही पुलिसकर्मियों और पुरातत्व विभाग के स्टॉफ ने लोगों को बाहर निकालना शुरू किया।