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गोद में कृष्ण को लेकर राधा से मिलाने लाईं उमा भारती

अपने गोपाल जी को राधा मंदिर में पहुंंचातीं उमा भारती

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गोद में कृष्ण को लेकर राधा से मिलाने लाईं उमा भारती

गोद में कृष्ण को लेकर राधा से मिलाने लाईं उमा भारती

विदिशा. राधाष्टमी पर राधारानी के दर्शन करनें बरसाने नहीं जा पाईं तो पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती राधा जी के दर्शन करने मंगलवार की रात ही विदिशा आ गईं। वे सुबह 5.30 बजे राधा जी के मंदिर जा पहुंचीं। पट खुलने और मंगला आरती होने में 30 मिनट का समय था, इस दौरान दरबार में पट खुलने का इंतजार करतीं उमा भारती ने खूब राधारानी के भजन गाए। पटख्खुलते ही वे एकचित्त राधाजी को देखती रहीं, हाथ जोड़े, मत्था टेका और फिर अपने बैग से कान्हा की प्रतिमा लाकर पुजारी मनमोहन शर्मा को दी कि ये मेरे गोपाल जी हैं, इन्हें राधाजी से मिलवा दो। वे कान्हा का मोरमुकुट, हार और बांसुरी भी साथ लाईं थीं। मंगला आरती के बाद उमा भारती ने भी राधाजी की आरती उतारी। प्रसादी अर्पित की और फिर वहीं बैठकर माला का जाप किया। चलते समय मीडिया से चर्चा करते हुए उमा भारती ने कहा कि हर बार राधाष्टमी पर बरसाने जाती थी, लेकिन इस बार जाना नहीं हो पा रहा था इसलिए चिंतित थी, इसी दौरान राजस्थान पत्रिका में खबर पढ़ी कि मुगलकाल में बरसाने से लाई गईं राधाजी विदिशा में विराजमान हैं तो बस चल पड़ी दर्शन करने। उन्होंने कहा कि राधा भगवान की शक्ति हैं। यदि कृष्ण तत्व सृष्टि की संपूर्णता है तो इस संपूर्णता में श्री यानी समृद्धि उत्पन्न होती है वह राधा तत्व के कारण ही होती है, इसलिए राधारानी श्री विद्या हैं। मैंने राधारानी से प्रार्थना की है कि कोरोना से धरती को मुक्त करें ौर मुझे गंगा का काम करने में सफलता दें। उन्होंने मंदिर सेवा से जुड़े लोगों के भाव और उनके कार्यों की प्रशंसा करते हुए कहा कि इतने वर्ष तक परंपराओं को कायम रखकर नियमित सेवा आसान नहीं है।