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माचिस नहीं, बंदूक के फायर से होगा होलिका दहन, MP की ये परंपरा बनी चर्चा का विषय

Holika Dahan: इस अनूठी होलिका दहन की जिम्मेदारी पारंपरिक रूप से कानूनगो परिवार के पास है। इसका इतिहास करीब 100 साल पुराना है।

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unique holika dahan from gun shot of vidisha become topic of discussion mp news

unique holika dahan from gun shot (फोटो- AI)

MP News: मध्य प्रदेश की एक तहसील में आज एक ऐसी अनूठी परंपरा का निर्वहन किया जाएगा, जो पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय रहती है। यहां पचकुइयां क्षेत्र में होलिका दहन (Holika Dahan) माचिस से नहीं, बल्कि बंदूक के फायर से होगा। पूर्व में लोकसभा चुनाव की आदर्श आचार संहिता के बीच भी यह परंपरा कड़ी सुरक्षा और प्रशासन की विशेष अनुमति के साथ निभाई गई थी।

विदिशा जिले की सिरोंज की यह 'बंदूक वाली होली' न केवल आस्था का केंद्र है, बल्कि यह प्रशासन और जनता के बीच आपसी सामंजस्य की भी एक मिशाल है। होलिका दहन से पहले मुख्य पुजारी पंडित नलिनिकांत शर्मा द्वारा विशेष पूजा-अर्चना की जाएगी, जिसके बाद हवाई फायर के जरिए होली की ज्वाला धधकेगी। पचकुइयां स्थल पर आज शाम से ही विद्युत सज्जा और विशाल होलिका के निर्माण की तैयारियां पूरी कर ली गई है।

वर्षों पुरानी है परंपरा

ये रस्म सिरोंज के इस मुख्य होलिका दहन की जिम्मेदारी पारंपरिक रूप से कानूनगो एक परिवार के पास है। परिवार के सदस्य राजकुमार माथुर ने बताया कि उनके पूर्वजों के समय से यह परंपरा चली आ रही है। मान्यता है कि जब तक इस स्थान पर बंदूक के फायर से अग्नि प्रकट नहीं होती, तब तक शहर की अन्य होलिकाओं का दहन नहीं किया जाता है।। इसी अग्नि को मशालों के जरिए पूरे शहर में ले जाया जाता है। 100 वर्षों से अधिक पुरानी यह परंपरा, पहचान और सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जाती है। यह परंपरा माथुर परिवार द्वारा पूरी श्रद्धा और सुरक्षा व्यवस्था के साथ निभाई जाती है।

कैसे शुरू हुई गोली से होलिका दहन की परंपरा

यह परंपरा होलकर रियासत के समय आरंभ हुई, उस काल में रावजी की होली के नाम से प्रसिद्ध यह आयोजन शौर्य, आस्था और उत्साह का प्रतीक माना जाता था। होलिका के लिए सूखी घास,लकड़ी और रुई का ढेर बनाकर उसमें बंदूक की गोली दागी जाती थी जिससे निकली चिंगारी ही होलिका दहन होता था।

बाद में सिरोंज पर नवाबी शासन आया, जिसके दौरान इस अनोखी रस्म पर रोक लगाने का प्रयास किया गया लेकिन परंपरा निभाने वाले माथुर परिवार के पूर्वजों ने विरोध के रूप में घास के ढेर पर गोली चलाकर आग लगा दी। उसके बाद से यह परंपरा और भी मजबूत हो गई और पीढ़ी दर पीढ़ी चली आ रही है।

प्रशासन की निगरानी में होगा होलिका दहन

यह आयोजन परंपरागत रूप से होता आया है और प्रशासन की निगरानी में होगा। माथुर परिवार के गुरूजी ललिकांत शर्मा होलिका पूजन और शुरुआत करवाते है। विधायक उमाकांत शर्मा के सहयोग से यह आयोजन व्यवस्थित रूप से किया जा रहा है।- हरिशंकर विश्वकर्मा, एसडीएम, सिरोंज (MP News)