
VIDISHA का दुर्भाग्य, Medical college से वापस गई CT Scan मशीन
विदिशा. जब भारी मिन्नतों के बाद सवा तीन माह पहले मेडिकल कॉलेज में सीटी स्कैन मशीन आई थी तो पूरे जिले में खुशी का माहौल था कि अब सीटी स्कैन के लिए भोपाल नहीं भागना पड़ेगा। लेकिन मशीन भेजने में दो दिन लेट होने का बहाना लेकर विदिशा मेडिकल कॉलेज में मशीन को नहीं लगाने का फरमान भोपाल के आला अधिकारियों ने भेज दिया। यह बात मुख्यमंत्री की जानकारी मे भी दी गई, लेकिन कोई असर नहीं हुआ और 2 जनवरी को आई सीटी स्कैन मशीन मेडिकल कॉलेज में लगने के बजाय 14 अप्रेल को कांटे्क्टर वापस ले गया। विदिशा फिर खाली हाथ रह गया है। ये विदिशा का दुर्भाग्य ही है कि आने के बावजूद मशीन लगी नहीं और उसे वापस कर दिया गया।
बड़े नाम वाले जनप्रतिनिधियों के इस जिले के मरीजों को अब सीटी स्केन के लिए भोपाल नहीं रायसेन रेफर किया जा रहा है, क्योंकि रायसेन के जिला अस्पताल में सीटी स्कैन मशीन लग चुकी है। मप्र के नए खुले मेडिकल कॉलेज के लिए सीटी स्कैन मशीन को करीब एक साल पहले लगाने के लिए निर्देश हुए थे। लेकिन कोरोना काल में मशीनों को विदेश से आने मेंं विलंब हुआ और 31 दिसंबर की तारीख की जगह विदिशा मेडिकल कॉलेज में ये मशीन 2 जनवरी को आ सकी। यानी लेट लतीफी मात्र दो दिन की हुई। लेकिन अफशरशाही को यह रास नहीं आया और कॉलेज में यह मशीन स्थापित न करने के मौखिक आदेश दे दिए गए। कांट्रेक्टर को मशीन का भुगतान भी नहीं किया गया। इस बात को तीन माह से ज्यादा हो गए। मजबूर होकर कांट्रेक्टर 14 अप्रेल को अपनी मशीन वापस ले जाने आया ओर उसे लोड कराकर वापस ले गया। मेडिकल कॉलेज के डीन, रेडियोलॉजी विभाग का स्टॉफ और पूरा मेडिकल कॉलेज स्टॉफ ये तमाशा देखते हुए मायूस था कि इतनी बड़ी सुविधा बिना सामने से छीनी जा रही थी और कोई मुंह से आवाज निकालने वाला भी नहीं था। तमाम असुविधाओं और अव्यवस्थाओं पर पूरा जिला सिर पर उठा लेने वाले राजनीतिक दलों और संगठनों के नेता-कार्यकर्ता भी नहीं थे।
यहां बता दें कि अब मेडिकल कॉलेज और जिला अस्पताल से सीटी स्कैन के लिए मरीजों को भोपाल नहीं बल्कि रायसेन के जिला चिकित्सालय रेफर किया जा रहा है, क्योंकि वहां नई सीटी स्कैन मशीन लगा दी गई है, लेकिन विदिशा में लगने के लिए आई मशीन बिना किसी कारण के वापस कर दी गई। अब मेडिकल कॉलेज के रेडियोलॉजी विभाग मे भी सिर्र्फ सोनोग्राफी और एक्स रे जैसी वही जांच हो सकेंगी जो अब तक जिला अस्पताल में भी हो रही है। इस मायने में मेडिकल कॉलेज का लाभ ही क्या हुआ। इस बारे में चर्चा के लिए जब मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ सुनील नंदेश्वर से बात करना चाही तो उन्होंने कॉल रिसीव नहीं किया।
Published on:
15 Apr 2022 09:17 am
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