
Green blood
अमरीकी डॉक्टर ए. विग्मोर ने गेंहू के पोषक और औषधीय गुणों पर लंबे शोध व गहन अनुसंधान के बाद पाया है कि शारीरिक कमजोरी, खून की कमी, दमा, खांसी, पीलिया, डायबिटीज और बवासीर जैसे रोगों में गेहूं के ज्वारे का रस काफी फायदेमंद हो सकता है।
एंटीऑक्सीडेंट का खजाना
कोशिकाओं को फिर से बनाने की क्षमता और उच्चकोटि के एंटीऑक्सीडेंट होने के कारण ये ज्वारे कैंसर जैसे घातक रोग की प्रारंभिक अवस्था में बहुत उपयोगी होते हैं। इन्हें पीसकर फोड़े-फुंसियों व घावों पर लगाने से यह एंटीसेप्टिक और एंटीइंफ्लैमेट्री की तरह काम करते हैं। इसके रस में मौजूद क्लोरोफिल काफी फायदेमंद होता है। यह शरीर से विषैले पदार्थों को बाहर निकालकर शरीर की सफाई करता है।
इससे पाचन प्रक्रिया में सुधार होता है।
ऐसे करें तैयार
मिट्टी के कुंडे में खाद मिली हुई मिट्टी लें और अब इसमें गेहूं बोएं। पानी डालकर इसे छाया में रखें। ध्यान रखें कि सूरज की रोशनी कुंडे पर ज्यादा और सीधी न लगेें। इसमें रोजाना पानी दें। आठ से नौ दिनों में इनमें आए हुए हरे ज्वारों को काटकर इस्तेमाल किया जा सकता है।
ऐसे करें प्रयोग
ज्वारे काटने के बाद इन्हें धो लें। फिर इन्हें पानी मिलाकर मिक्सी में ब्लैंड कर लें। इसमें शहद या अदरक भी डाल सकते हैं, छानकर इस जूस को पिएं। इसे हमेशा ताजा ही पिएं क्योंकि तीन घंटे में इसके पोषक तत्व नष्ट हो जाते हंै। खाली पेट यह रस पीने से ज्यादा लाभ होता है। इसे पीने के आधे घंटे पहले और बाद में कुछ न खाएं।
नैचुरल टॉनिक
ज्वारे में प्रोटीन, विटामिन, कार्बोहाइड्रेट, मिनरल्स आदि होते हैं जो शरीर को स्वस्थ और तंदुरुस्त बनाए रखने के लिए जरूरी होते हैं। शारीरिक कमजोरी दूर करने में ज्वारे का रस टॉनिक से कम नहीं। इसे किसी भी आयुवर्ग के स्त्री, पुरुष व बच्चे पी सकते हैं। इसी गुणवत्ता के कारण इसे ग्रीन ब्लड भी कहा जाता है।
ज्वारे का रस शरीर से विषैले पदार्थों को निकालकर पाचन प्रक्रिया में सुधार लाता है।
Published on:
02 Apr 2018 05:05 am
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