15 सितंबर 2026,

मंगलवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

ना रनिंग, ना एक्सरसाइज फिर भी कुछ दिनाें में आपको पतला कर देगा 5:2 का फंडा

पेट, पाचन और वजन से जुड़ी परेशानियों में उपवास या फास्टिंग एक कारगर उपाय है। फास्टिंग को लेकर पश्चिमी दुनिया में 5:2 की डाइट का फंडा मशहूर हुआ है
2 min read
Google source verification
5.2 diet plan

ना रनिंग, ना एक्सरसाइज फिर भी कुछ दिनाें में आपको पतला कर देगा 5:2 का फंडा

पेट, पाचन और वजन से जुड़ी परेशानियों में उपवास या फास्टिंग एक कारगर उपाय है। फास्टिंग को लेकर पश्चिमी दुनिया में 5:2 की डाइट का फंडा मशहूर हुआ है। इसमें दो दिन उपवास और पांच दिन सामान्य होते हैं। आप अपनी सुविधा से इस फास्टिंग को 6:1 या 4:3 में भी बदल सकते हैं। फास्ट वाले दिन आपको शरीर के अनुसार औसतन 2000 कैलोरी से कम आहार लेने की सलाह दी जाती है। साथ ही कभी भी 48 घंटों से ज्यादा फास्ट न करें।

कैसे काम करती है डाइट
इस डाइट में भी हर दूसरे दिन फास्ट करने की सिफारिश की जाती है। इसमें सप्ताह में दो दिन उपवास रखते हुए व्यक्ति विशेष की ऊर्जा ज़रूरत का मात्र २५ प्रतिशत के बराबर आहार लेने पर जोर दिया जाता है और बाकी के पांच दिन सामान्य आहार लेना होता है।

फायदे
इस तरह की फास्टिंग में लोगों को अपने खाने में भरपूर आजादी मिलती है और अन्य प्रचलित उपवासों की तुलना में इसमें बंधन कम से कम होते हैं। इस डाइट से भूख और उपवास दोनों की बीच संतुलन बनाते हुए अच्छी सेहत की ओर ध्यान दिया जाता है। एक दिन छोड़कर उपवास का तरीका लचीला है और इसकी आदत डालना आसान है।

कुछ शंकाएं
कुछ लोगों को यह तरीका अजीब लगा है क्योंकि इसमें शरीर के शुद्धीकरण पर विशेष ध्यान नहीं दिया जाता है। इसमें कैलोरी पर बंधन लगाया जाता है जो कुछ लोगों को अपने पसंदीदा खाने की चीजों को चुनने में समस्या पैदा करता है। इसमें लचीलापन तो है लेकिन वह सभी लोगों के लिए एक जैसी लागू नहीं होती क्योंकि खान-पान में विविधता बहुत है।

कौन है आविष्कारक
इस डाइट का श्रेय ब्रिटेन की लेखिका कैट हैरिसन को जाता है। कैट ने अपने फास्टिंग से फिटनेस को पाने में मिली सफलता को 5:2 डाइट नाम दिया है। कैट ने इस विषय पर एक किताब भी लिख डाली है।

डिस्क्लेमर
इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ओपिनियन का विकल्प नहीं है। पाठकों को सलाह दी जाती है कि वे कोई भी दवा, उपचार या नुस्खा अपनी मर्जी से ना आजमाएं। इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।