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Obesity : एक किलोग्राम अधिक वजन भी दिल पर भारी

एक किलोग्राम वजन भी हार्ट पर भारी पड़ता है। सामान्य से अधिक वजन वाले ज्यादातर लोगों को हार्ट से जुड़ी समस्याएं होती हैं। वयस्कों में हृदय रोग की शुरुआत सांस में तकलीफ, सीने में दर्द व थकान से होती है। इलाज न कराने पर लक्षण बढ़ते जाते हैं और धीरे-धीरे यह दर्द आराम करने के दौरान भी होने लगता है। यह दर्द खाना खाने के बाद अक्सर बढ़ जाता है।

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हार्ट अटैक के हालात न बने इसके लिए सबसे पहले जरूरी है हृदय संबंधी कुछ जांचें करा लें। तीस साल की उम्र होने के बाद साल, दो साल या तीन साल में एक बार खून की जांच, इको, ईसीजी और ट्रेड मिल आदि जांच कराते रहना चाहिए। साथ ही विशेषज्ञ की सलाह से कोरोनरी आर्टरी संबंधी शुरुआती रोग का पता लगाने के लिए अल्ट्रा फास्ट सीटी स्कैन जिसे सीटी एंजिओ कहते हैं, कराते रहना चाहिए। एक बार यह शुरुआती जांचें होने के बाद इनकी रिपोट्र्स संभालकर रखें ताकि बाद में की जाने वाली जांचों से इनका तुलनात्मक अध्ययन किया जा सके।

तेल की मात्रा पांच-छह टी स्पून तक ही सीमित रखें

भारतीय आनुवांशिक रूप से डायबिटीज की चपेट में आ जाते हैं और डायबिटीज हृदय रोग को आमंत्रित करती है। इसलिए जरूरी है कि हर एक शख्स नियमित अंतराल में 30 साल की उम्र से पहले ब्लड शुगर की जांच कराता रहे। प्रतिदिन के भोजन में तेल की मात्रा पांच-छह टी स्पून तक ही सीमित रखें। रोजाना व्यायाम करें क्योंकि इससे हृदय एक्टिव बना रहता है। हृदय डिमांड और सप्लाई पर यकीन करता है। आप जितना श्रम करेंगे वह उतना ही अधिक खून आपको सप्लाई करेगा।
वजन न बढ़े, इसके लिए क्या करना चाहिए?
तले और वसायुक्त खानपान से बचें। रेड मीट हृदय के लिए नुकसानदायक है। ऑयली खानपान से बचें, डॉक्टर के बताए अनुसार व्यायाम करें। खाने के बाद अधिक परिश्रम न करें। धूम्रपान छोड़ें व डायबिटिक हैं तो शुगर कंट्रोल में रखें। अतिरिक्त एक किलो वजन भी दिल पर भार है इसलिए मोटापे से बचें व रोजाना घूमने जाएं।
युवाओं में हार्ट अटैक क्यों
आनुवांशिकता के चलते भारतीयों में हार्ट अटैक यूरोपियन लोगों की तुलना में तीन गुना ज्यादा होता है। भारतीयों में युवा अवस्था में ही हार्ट अटैक के मामले बढ़ते जा रहे हैं। इंग्लैंड के मेरे ज्यादातर रोगी बुजुर्ग हैं जबकि मेरे पास आने वाले भारतीय रोगी ज्यादातर युवा हैं। ज्यादातर भारतीय मरीजों में मेरे पास कोई जवान बेटा अपने बुजुर्ग पिता को हार्ट के ऑपरेशन के लिए नहीं लाता बल्कि बुजुर्ग पिता अपने जवान बेटे को हृदय के ऑपरेशन के लिए लाता है।
आर्टरी ब्लॉकेज बढ़ रहे
हृदय की ब्लॉकेज में एंजियोप्लास्टी व बाईपास की जाती है। दोनों तरीकों में ब्लॉकेज नहीं हटाए जाते। बाईपास सर्जरी में ब्लॉकेज एक तरफ छोड़ दिए जाते हैं जबकि एंजियोप्लास्टी में धातु की ट्यूब से ब्लॉकेज ढंक दिए जाते हैं।

एक्सपर्ट : डॉ गौतम शर्मा, कॉर्डियोलॉजिस्ट, एम्स नई दिल्ली


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