
विश्व एड्स दिवस की पहली बार अगस्त 1987 में थॉमस नेट्टर और जेम्स डब्ल्यू बन्न द्वारा कल्पना की गई थी।
पूरी दुनिया में एड्स सबसे जानलेवा और खतरनाक बीमारियों में से एक है, पूरे विश्व में लगभग 37 मिलियन लोग एड्स से ग्रस्त हैं। सिर्फ भारत में ही लगभग 2.1 मिलियन लोग एड्स के मरीज हैं। ऐसे में इसके प्रति जागरूकता बढ़ाने और मरीज के सही इलाजा देने की जरूरत है। विश्व एड्स दिवस हर साल 1 दिसंबर को दुनियाभर में मनाया जाता है।
एड्स संक्रमित बीमारी एचआईवी नामक वायरस की वजह से होती है, जो मानव शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली पर हमला करता है। एड्स का पूरा नाम इम्यून डेफिसिएंसी सिंड्रोम या एक्वायर्ड इम्यूनो डेफिसिएंसी सिंड्रोम है तथा इसके वायरस को ह्यूमन इम्यूनो वायरस कहते है। एड्स को पहली बार 1981 में मान्यता मिली। ये एड्स के नाम से पहली बार 27 जुलाई 1982 को जाना गया।
एचआईवी संक्रमण आसानी से एक व्यक्ति से दूसरे में प्रेषित हो जाता है यदि उन्होंने शारीरिक द्रव या रक्त श्लेष्मा झिल्ली के माध्यम से कभी सीधे संपर्क किया है। अनुमान के मुताबिक, ये उल्लेख किया गया है कि, 33 लाख लोग एचआईवी से संक्रमित हैं और 2 लाख लोग प्रत्येक वर्ष अपनी जीन गंवा देते हैं। एड्स की जागरूकता के लिए प्रत्येक साल 01 दिसंबर को विश्व एड्स दिवस के रुप में मनाया जाता हैं। विश्व एड्स दिवस की पहली बार अगस्त 1987 में थॉमस नेट्टर और जेम्स डब्ल्यू बन्न द्वारा कल्पना की गई थी। थॉमस नेट्टर और जेम्स डब्ल्यू बन्न विश्व स्वास्थ्य संगठन जिनेवा, स्विट्जरलैंड के एड्स ग्लोबल कार्यक्रम के लिए सार्वजनिक सूचना अधिकारी थे। वर्ष 1988 में 1 दिसंबर को विश्व एड्स दिवस के रुप में मनाना शुरु कर दिया।
एचआईवी/एड्स पर संयुक्त राष्ट्र कार्यक्रम, जो यूएन एड्स के रूप में भी जाना जाता है, वर्ष 1996 में प्रभाव में आया और दुनिया भर में इसे बढ़ावा देना शुरू कर दिया गया। एक दिन मनाये जाने के बजाय, पूरे वर्ष बेहतर संचार, बीमारी की रोकथाम और रोग के प्रति जागरूकता के लिये विश्व एड्स अभियान ने एड्स कार्यक्रमों पर ध्यान केंद्रित करने के लिए वर्ष 1997 में यूएन एड्स शुरु किया। विश्व एड्स दिवस को 2007 के बाद से व्हाइट हाउस द्वारा एड्स रिबन का एक प्रतिष्ठित प्रतीक देकर शुरू किया गया था। एड्स रिबन का प्रतीक 2007 मे व्हाइट हाउस द्वारा दिया गया।
Published on:
01 Dec 2017 09:15 pm
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