4 अप्रैल 2026,

शनिवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

विवाह में यूं ही नहीं किया जाता है कन्यादान, इसके पीछे की सच्चाई को जान पता चलेगा इसका महत्व

जिन माता पिता को यह दान करने का मौका मिलता है उनके स्वर्ग जाने का मार्ग खुल जाता है।

2 min read
Google source verification

image

Arijita Sen

Jan 24, 2019

Kanyadan

विवाह में यूं ही नहीं किया जाता है कन्यादान, इसके पीछे की सच्चाई को जान पता चलेगा इसका महत्व

नई दिल्ली। जिंदगी में एक निश्चित उम्र के बाद मां बाप अपने बच्चे की शादी करा देते हैं। धर्म के अनुसार हर शादी में कई सारे रस्मों रिवाजों का पालन किया जाता है, लेकिन एक बात तो हर शादी में कॉमन है और वह है धूमधाम, लोगों का आना- जाना, खाना-पीना और जमकर मस्ती। अगर हम हिंदुओं की शादी की बात करें तो इसमें वरमाला, फेरे, सिंदूर दान, मंगलसूत्र पहनाने की प्रथा का पालन सदियों से होता आ रहा है। इसके साथ एक और महत्वपूर्ण रस्म है और वह है कन्यादान।

इस रस्म के बिना विवाह सम्पन्न नहीं होता है। आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि क्यों इसका पालन किया जाता है और इसके पीछे की वजह क्या है? जैसा कि आप जानते हैं कि हिन्दूओं में लोग लड़की या कन्या को धनलक्ष्मी का स्वरूप मानते हैं। कन्यादान ? में पिता जब अपनी पुत्री को उसके पति को सौंपता है तो उनका यही मानना रहता है कि उसका वर ताउम्र उसे प्रेम और सम्मान देगा।

इस रस्म के द्वारा यह दर्शाया जाता है कि एक पिता, अपनी पुत्री से संबंधित हर जिम्मेदारी अब उसके पति को सौंप रहा है।

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, वर को विष्णु और वधु को लक्ष्मी का स्वरूप माना जाता है। जब कन्यादान किया जाता है तो विष्णु के स्वरूप में वर, कन्या के पिता की हर बात को मानता है और उन्हें यह आश्वासन देता है कि जिंदगी भर उनकी बेटी की वह रक्षा करेगा और जीते जी उस पर कोई आंच नहीं आने देगा।

कन्यादान एक बहुत बड़ा दान है। इसे निभाना कोई सामान्य बात नहीं है। हिन्दू धर्म की मान्यताओं के अनुसार कन्यादान को सबसे बड़ा दान माना गया है। ऐसा कहा जाता है कि यह किसी सौभाग्य से कम नहीं है। जिन माता पिता को यह दान करने का मौका मिलता है उनके स्वर्ग जाने का मार्ग खुल जाता है।