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कभी इस छोटे से चॉल में अंबानी परिवार के इतने सदस्य एक सा​थ करते थे गुजारा, तस्वीरें देख यकीन करना होगा मुश्किल

आज हम आपको इस परिवार से जुड़ी कुछ ऐसी बातें बताएंगे जिसके बारे में आपने शायद ही पहले कभी सुना होगा।

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Arijita Sen

Aug 10, 2018

Ambani family

कभी इस छोटे से चॉल में अंबानी परिवार के इतने सदस्य एक सा​थ करते थे गुजारा, तस्वीरें देख यकीन करना होगा मुश्किल

नई दिल्ली।अंबानी परिवार आज के दिन किसी पहचान का मोहताज नहीं है। देश के सबसे धनी लोगों में गिने जाने वाले इन दो भाइयों के पास आज अरबों की सम्पत्ति है। आज हम आपको इस परिवार से जुड़ी कुछ ऐसी बातें बताएंगे जिसके बारे में आपने शायद ही पहले कभी सुना होगा।

अनिल अंबानी और उनके बड़े भाई मुकेश अंबानी का बचपन मुंबई के भुलेश्वर और कोलाबा इलाके में बीता। जी हां, अंबानी परिवार कई साल पहले भुलेश्वर की एक चॉल में रहा करते थे। आज भले ही ये आलीशान बंगलों में रहा करते हैं, लेकिन उन्हें अपने पुराने घर की याद बहुत आती है जहां इन दो भाइयों ने अपना बचपन बिताया। यहीं से उनके पिता धीरूभाई ने अपने बिजनेस की शुरुआत की थी।

आपको बता दें कि मुंबई आने से पहले धीरूभाई अंबानी यमन के अदेन शहर में रहते थे जहां उन्होंने अपनी जिंदगी के 8 साल बिताए। इसके बाद वह मुंबई आकर बस गए और यहां उन्होंने मसालों का कारोबार शुरू किया।

उस दौरान धीरूभाई अंबानी अपनी पत्नी कोकिलाबेन, दोनों बेटियों दीप्ति और नीना, दोनों बेटों मुकेश और अनिल समेत भुलेश्वर के 'जय हिंद स्टेट' में दो कमरे के मकान में रहते थे। इस जगह वह साल 1970 तक रहे।

इसके बाद जब बिजनेस में उनकी मेहनत रंग लाने लगी तो वह कोलाबा के Sea Wind अपार्टमेंट में शिफ्ट हो गए। यहां उन्होंने 14 फ्लोर का पूरा एक ब्लॉक ही खरीद लिया।

पिता के इस व्यापार को दोनों भाइयों ने मिलकर धीरे-धीरे आगे बढ़ाया और वर्तमान सभी के सामने है। धीरूभाई अंबानी कामयाबी के लिए संघर्ष को अहम मानते थे।

उनका ऐसा मानना था कि इंसान जितना पढ़ाई से सीखता है, उससे कहीं ज्यादा संघर्षों से सीखता है। शायद यही वजह रही होगी कि उन्होंने अपने बड़े बेटे मुकेश की पढ़ाई बीच में ही छुड़वाकर उन्हें भारत में ही पॉलिएस्टर फिलामेंट यार्न (PFY) मैन्युफैक्चरिंग प्रोजेक्ट की कमान संभालने की जिम्मेदारी दी।

धीरूभाई का यह निर्णय मुकेश के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण था, लेकिन उन्होंने पूरे मन से इसे निभाया। अपनी मेहनत और लगन से उन्होंने अपने पिता के इस सपने को साकार किया और खूब तरक्की की।