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दुनिया का पहला क्रिकेटर जिसे दी गई थी फांसी, शानों शौकत के बावजूद इस चीज के पीछे था पागल

एक ऐसे ही किस्से के बारे में हम आज आपको बताने जा रहे हैं जहां एक क्रिकेटर को फांसी दे दी गई।

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Arijita Sen

Nov 19, 2018

फांसी

दुनिया का पहला क्रिकेटर जिसे दी गई थी फांसी, शानों शौकत के बावजूद इस चीज के पीछे था पागल

नई दिल्ली। कानून सबके लिए बराबर है चाहें वो कोई आम इंसान हो या कोई सेलेब्रिटी। यदि किसी ने गुनाह किया है तो उसे कानून उस अपराध की सजा जरूर देगी। एक ऐसे ही किस्से के बारे में हम आज आपको बताने जा रहे हैं जहां एक क्रिकेटर को फांसी दे दी गई। आइए इस घटना की पूरी जानकारी हम आपको देते हैं।

हम यहां लेस्ली जॉर्ज हिल्टन की बात कर रहे हैं जो वेस्ट इंडीज क्रिकेट टीम के पूर्व खिलाड़ी थे।लेस्ली साल 1935 से लेकर 1939 तक 6 टेस्ट मैच खेले हैं। लेस्ली की पहचान एक तेज गेंदबाज के रूप में थी। इस खिलाड़ी को 17 मई, 1955 को फांसी दे दी गई। अब सवाल यह आता है कि लेस्ली ने ऐसा भी क्या किया था कि उसे मौत की सजा दी गई।

दरअसल, लेस्ली ने अपनी पत्नी की बड़ी ही बेरहमी से हत्या कर दी थी। लेस्ली अपनी पत्नी लार्लीन से बहुत प्यार करते थे। दोनों की लव मैरिज थी। साल 1935 में लेस्ली हिल्टन अपना डेब्यू मैच खेल रहे थे और उस दौरान उनकी मुलाकात लार्लीन से हुई।

दोनों को एक-दूसरे का साथ भाया और साल 1942 में दोनों ने शादी कर ली। शादी के पांच साल बाद उनका एक बेटा भी हुआ। सबकुछ ठीक चल रहा था, लेकिन वक्त बीतने के साथ दोनों में दूरियां बढ़ने लगी। इसके पीछे कोई तीसरा था।

लार्लीन का कपड़ों का कारोबार था जिसके सिलसिले में उसे अकसर न्यूयॉर्क जाना पड़ता था। एक बार इसी काम के चलते लार्लीन न्यूयॉर्क गई थी।

इसी बीच लेस्ली को एक गुमनाम चिट्ठी मिला जिसके न्यूयॉर्क के एक व्यक्ति के साथ लार्लीन के अवैध संबंधों का जिक्र था। इस बात से लेस्ली इस कदर भड़क गया कि उसने अपनी पत्नी को तुरंत वहां से वापस बुलाया।

लार्लीन ने पहले इस बात से इंकार किया, लेकिन लेस्ली के सिर पर खून सवार था। वह सच्चाई जानने के लिए पागल था। इस वजह से उसने पोस्ट ऑफिस से कुछ और चिट्ठियां निकलवाई, जो लार्लीन के नाम लिखी गई थी। लरर्लीन को जब ये सबकुछ दिखाया गया तो उसके पास इस बात को कबूल करने के अलावा और कोई चारा नहीं था।

लार्लीन ने सफाई देते हुए कहा था कि, लेस्ली उनके लेवल के नहीं हैं, दोनों का कोई मेल नहीं है और इन्हीं वजहों के चलते वो हमेशा बीमार रहती है।लार्लीन की ये बातें लेस्ली को इस कदर चुभ गई कि उसने ऐन मौके पर लेस्ली पर अपनी बंदूक से 7 गोलियां दाग दी। मौके पर ही लार्लीन की मौत हो गई।

मामला अदालत पहुंचा और कोर्ट ने 20 अक्तूबर, 1954 को लेस्ली को उनकी पत्नी की हत्या के जुर्म में दोषी करार दिया गया और फांसी की सजा सुनाई गई। इसके एक साल बाद यानि कि 1955 को 17 मई के दिन इस पूर्व क्रिकेट खिलाड़ी को फांसी के तख्ते पे लटका दिया गया।

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