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इस गांव के हर घर में है गाय-भैंस, लेकिन दूध का इस्तेमाल करना देता है मौत को दावत! जानिए क्या है मामला…

ताजमहल से केवल दो किलोमीटर कुआ खेड़ा गांव है, हैरानी की बात है कि, यहां जनसंख्या का एक बड़ा हिस्सा मवेशी पालन करता है।

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इस गांव के हर घर में है गाय-भैंस, लेकिन दूध का इस्तेमाल करना देता है मौत को दावत! जानिए क्या है मामला...

नई दिल्ली। दुनिया का सातवां अजूबे ताजमहल से नवाज़े शहर आगरा में एक गांव बसा है जहां दूध बेचना पाप मन जाता है। एक गांव अपनी इस परंपरा के लिए काफी चर्चा में रहता है। जानकारी के लिए बता दें कि ये गांव, आगरा से महज 2 किलोमीटर की दूरी पर बसा है। लोग इस गांव को इसके अजीबोगरीब परंपरा के लिए जानते हैं। ताजमहल से केवल दो किलोमीटर कुआ खेड़ा गांव है, हैरानी की बात है कि, यहां जनसंख्या का एक बड़ा हिस्सा मवेशी पालन करता है। दिलचस्प बात यह है कि वाणिज्यिक उद्देश्यों के लिए दूध बेचना यहां एक पाप माना जाता है और लोग ज्यादातर अपने उपज को दुसरे गांवों में बांट देते हैं या सिर्फ उन लोगों को दान कर देते हैं जो इस गांव में आते हैं। यहां आपको बहुत घरों में गाय या भैंसे बंधी मिलेंगी। दूध का उत्पादन होता मिलेगा लेकिन दूध का व्यवसायीकरण आपको इस गांव में नहीं मिलेगा।

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यूं तो आज के समय में अपने देश के हर चौराहे या गली के नुक्कड़ पर चाय की दुकान आसानी से मिल जाती है। कुआं खेड़ा नाम के इस गांव की खासियत यह है की यहां पर चाय की एक दुकान तक नहीं है। गांव में चाय की दूकान न होने के बाद एक और तथ्य है जो इस गांव को भारत के अन्य स्थानों से अलग करता है। असल में इस गांव में दूध को बेचना भी पाप माना जाता है। विश्व दूध दिवस पर, कुआ खेड़ा के ग्रामीण, जो ज्यादातर जावत समुदाय से ताल्लुक रखते हैं, वे इस अवसर को एक दूसरे को दूध साझा करके मनाते हैं। गांव के स्थानीय लोगों की मान्यता है की यदि गांव में किसी ने दूध को पैसा लेकर किसी को बेचा तो गांव पर मुसीबतें आ जाएंगी। इस मान्यता के चलते ही इस गांव में दशकों से दूध को नहीं बेचा जाता है। बता दें कि, इस परंपरा को कोई ग्रामीण बदलना नहीं चाहता है। अधिकांश आबादी आजीविका कमाने के लिए किसी तरह के पेशे में लगी हुई है, इसलिए दूध उत्पादन न करने से परिवार की कमाई प्रभावित नहीं होती, बल्कि इससे उनके बीच अच्छा संबंध विकसित होता है।