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बिहार का एक ऐसा गांव जहां 12 घंटे के लिए जंगल चले जाते हैं लोग, जाते वक्त घरों में ताले तक नहीं लगाते

बिहार के इस गांव में वर्षों पुरानी परंपरा आज भी जीवंत है। यहां बैसाख के नवमी तिथि को गांव के लोग अपना-अपना घर छोड़कर 12 घंटे के लिए गांव से बाहर जंगल में चले जाते हैं।
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नई दिल्ली

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Archana Keshri

•

Updated: 12 May 2022, 9:11 PM IST

बिहार का एक ऐसा गांव जहां 12 घंटे के लिए जंगल चले जाते हैं लोग, जाते वक्त घरों में ताले तक नहीं लगाते

बिहार का एक ऐसा गांव जहां 12 घंटे के लिए जंगल चले जाते हैं लोग, जाते वक्त घरों में ताले तक नहीं लगाते

भारत में ऐसी कई संस्कृतियां है जो आपको सोचने पर मजबूर कर देंगी, प्राचीन काल से ही अनेकों प्रथाओं का आज भी चलल है। ऐसी ही एक प्राचीन प्रथा के बारे में हम आपको बताने जा रहे है। जिसको आज भी लोग बड़ी शिद्दत के साथ निभाते हैं। बिहार के पश्चिमी चंपारण जिले के बगहा के नौरंगिया गांव में वर्षो पुरानी परंपरा आज भी चली आ रही है। इस गांव के लोग प्रत्‍येक साल के बैसाख के नवमी के दिन 12 घंटों के लिए अपना घर छोड़ देते हैं। लेकिन सवाल यहां ये है कि ये लोग ऐसा क्यों करते हैं और इसके पीछे क्या मान्यता छिपी हुई है?

ग्रामीणों का कहना है कि ऐसा देवी को प्रसन्‍न करने के लिए किया जाता है। इस दौरान गांव में सन्‍नाटा पसरा रहता है। इसका लोगों की प्राचीन मान्यता है। यहां के लोगों का कहना है कि ऐसा करने से देवी प्रकोप से निजात मिलती है। इस प्रथा के चलते नवमी के दिन लोग अपने साथ-साथ मवेशियों को भी छोड़ने की हिम्मत नहीं करते हैं। लोग जंगल में जाकर वहीं, पूरा दिन बिताते हैं।

आधुनिकता के इस दौर में इस गांव के लोग अंधविश्वास की दुनिया में जी रहे हैं। इस गांव की स्थानीय निवासी कौशल्या देवी के अनुसार, "यह पुरानी प्रथा है। जो वर्षों से चली आ रही है। आज अगर हम लोग इस प्रथा को नहीं मानेंगे और घर में ही रहेंगे तो घर में आग लग जाएगी। एक दो नहीं बहुत सारे घरों में एक साथ आग लग जाती है। इसलिए हर साल हमलोग यह प्रथा मनाते है। जो हमारे पूर्वजों ने बताया है, उसे हम लोग ईमानदारी से निभा रहे हैं।"

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बताया जाता है कि वर्षों पहले इस गांव में महामारी आई थी, उस दौरान गांव में आग लग जाती थी। चेचक, हैजा जैसी गंभीर बीमारियां फैल जाती थी। जिसके बाद वाल्मीकि टाइगर रिजर्व के जंगल में बसा नौरंगिया गांव के रहने वालों के अनुसार यहां रहने वाले बाबा परमहंस के सपने में देवी मां आई थीं। सपने में मां ने बाबा को गांव को बचाने का आदेश दिया था। सपने में देवी मां ने कहा था कि नवमी को गांव खाली कर पूरा गांव वनवास को जाए।

इसी दिन के बाद से यह परंपरा शुरू हो गई जो आज भी लोग निभाते आ रहे है। और इसी वजह से नवमी के दिन लोग अपने घर खाली कर भजनी कुट्टी में पूरा दिन बिताते हैं और मां दुर्गा की पूजा करते हैं। ये परंपरा वो पूरे उत्सव के साथ हर्षो-उल्लास से निभाते और मनाते हैं। जंगल में भी पिकनिक जैसा माहौल हो जाता है। और आपको बता दें जंगल में मेला भी लगाया जाता है। 12 घंटे गुजरने के बाद सभी अपने घर वापस आ जाते हैं। आपको बता दें, जब गांव के लोग जंगल में जाते हैं तो घर पर ताला भी नहीं लगा के जाते। पूरा घर खुला रहता है और हैरान करने वाली बात ये है कि तब यहां कोई चोरी भी नहीं होती।

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