
विवेक के चचेरे भाई ने बताई परिवार के दिल्ली रुकने की वजह (Photo-IANS/Sanpgrab)
Delhi Hotel Fire Accident: दिल्ली के हौजरानी इलाके में हुए होटल अग्निकांड ने एक हंसते-खेलते परिवार की खुशियां छीन लीं। इस हादसे में गुरुग्राम के सीए विवेक अग्रवाल समेत उनके परिवार के 8 लोगों की जान चली गई। विवेक के पिता राधेश्याम अग्रवाल की तबीयत काफी खराब थी और उनका इलाज मैक्स अस्पताल में चल रहा था। परिवार के सभी लोग उनसे मिलने के लिए गए थे। विवेक के चचेरे भाई वैंकटेश ने बताया कि वह रोजाना अपने पिता को देखने के लिए दिल्ली जाते थे और वापस गुरुग्राम आ जाते थे। कभी-कभी ही दिल्ली रुकते थे। साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि चाचा आज भी हॉस्पिटल में विवेक को आवाज लगा रहे हैं।
विवेक के चचेरे भाई ने बताया कि हादसे के दो दिन पहले ही डॉक्टरों ने परिवार को सलाह दी थी कि राधेश्याम अग्रवाल को अब घर ले जाकर उनकी देखभाल की जाए। यह बात पता चलते ही परिवार और रिश्तेदार दिल्ली पहुंचने लगे। अगले दिन चाचा को घर लाना था इसलिए सभी ने सोचा कि देर रात गुरुग्राम जाने के बजाय दिल्ली में ही रुक जाते हैं। इसी वजह से सभी हौजरानी के होटल फ्लोरिश स्टे में रुके थे। आगे उन्होंने कहा कि अगर उस रात सभी गुरुग्राम लौट जाते तो शायद आज यह दिन नहीं देखना पड़ता।
वैंकटेश गर्ग ने भावुक होते हुए बताया कि उनके चाचा राधेश्याम अग्रवाल लगातार विवेक की आवाज लगा रहे हैं। उन्हें अब तक यह नहीं बताया गया है कि उनका बेटा विवेक अब इस दुनिया में नहीं है। उन्होंने आगे कहा कि केवल विवेक ही नहीं, बल्कि उनका पूरा वंश समाप्त हो गया है। परिवार के लोग समझ नहीं पा रहे हैं कि उन्हें यह सच कैसे बताया जाए।
उन्होंने बताया कि रिश्तेदारों ने सोचा था कि दिल्ली जाकर उनकी तबीयत का हाल भी जान लेंगे और अगर तबीयत में सुधार हुआ तो परिवार के साथ छोटा सा सेलिब्रेशन भी कर लेंगे। इसी वजह से परिवार के कई सदस्य और रिश्तेदार दिल्ली में इकट्ठा हुए थे। वहीं उन्होंने यह भी बताया कि चाचा की अगले साल शादी के 50 साल पूरे होने वाले थे और इससकी तैयारियों को लेकर परिवार ने प्लानिंग करनी शुरू कर दी थी।
विवेक अग्रवाल की बड़ी बेटी बेंगलुरु में पढ़ाई करती थी। घरवालों ने उसे दिल्ली आने से मना भी किया था, लेकिन वह दादाजी से मिलने की जिद करके पहुंच गई। उसने कहा था कि दादाजी को देखकर वापस चली जाएगी। वैंकटेश गर्ग ने बताया कि कुछ समय पहले तक पूरा परिवार हंस-खेल रहा था, लेकिन अब सब कुछ बदल गया है। परिवार के लोग सदमे में हैं और किसी को समझ नहीं आ रहा कि आखिर यह सब कैसे हो गया।
स्थानीय लोगों के अनुसार, विवेक अग्रवाल एक मल्टीनेशनल कंपनी में सीए के पद पर काम करते थे। वह समाज से जुड़े कामों में भी सक्रिय रहते थे। वह लोगों की मदद करने से पीछे नहीं हटते थे। उन्हें जानने वाले बताते हैं कि उनका स्वभाव बहुत मिलनसार था और उन्होंने कभी किसी की मदद के बदले कोई पैसा नहीं लिया। यही वजह है कि उनके निधन की खबर से इलाके में शोक का माहौल है।
Updated on:
05 Jun 2026 08:35 am
Published on:
05 Jun 2026 08:35 am
