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NEET Protest: सोनम वांगचुक ने क्यों तोड़ा अनशन? समझिए पर्दे के पीछे की पूरी कहानी

NEET Protest Sonam Wangchuk: आखिर किसके कहने पर सोनम वांगचुक ने अनशन तोड़ दिया? क्या कोई मध्यस्थता के लिए बीच में आया। जानिए पर्दे के पीछे क्या हुआ।
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Sonam Wangchuk

सोनम वांगचुक अनशन तोड़ते हुए। (सोर्स: ANI)

Sonam Wangchuk Hunger Strike: नीट पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर सोनम वांगचुक पिछले 26 दिन से अनशन पर बैठे थे। उनकी तबीयत लगातार बिगड़ रही थी। सवाल उठ रहा था कि आखिर उन्होंने अचानक अनशन खत्म क्यों कर दिया? इसके पीछे सिर्फ सरकार का आश्वासन नहीं, बल्कि कई दौर की बातचीत, नेताओं की मध्यस्थता और लद्दाख के लोगों की अपील भी बड़ी वजह बनी। करीब तीन दिनों तक चली बातचीत के बाद आखिरकार ऐसा रास्ता निकला, जिस पर सरकार और सोनम वांगचुक सहमत हुए।

कांग्रेस सांसद ने खोला बातचीत का रास्ता!

‘द इंडियन एक्सप्रेस’ के रिपोर्ट के मुताबिक, 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान हुए लाठीचार्ज के बाद सरकार ने सोनम वांगचुक से संपर्क करना शुरू किया। लेकिन बातचीत आसान नहीं थी। इसी दौरान कांग्रेस सांसद और वरिष्ठ वकील विवेक तन्खा ने अहम भूमिका निभाई। उन्होंने सरकार और वांगचुक के बीच बातचीत का रास्ता खोला। तन्खा पहले भी वांगचुक के कानूनी मामलों से जुड़े रहे हैं और दोनों के बीच अच्छे संबंध हैं।

सरकार शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर कोई वादा नहीं करना चाहती थी। वह चाहती थी कि वांगचुक अपना अनशन खत्म करें। तन्खा का कहना है कि वांगचुक की सेहत तेजी से बिगड़ रही थी। उनका 11 किलो से ज्यादा वजन कम हो चुका था। इसलिए उनकी जान बचाना सबसे बड़ी प्राथमिकता थी। ऐसे में दोनों पक्षों के बीच एक बीच का रास्ता निकाला गया।

सरकार का भरोसा और नेताओं की अपील बनी वजह

21 जुलाई को केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह मेदांता अस्पताल पहुंचे। उन्होंने वांगचुक से मुलाकात की और भरोसा दिलाया कि उनके उठाए गए मुद्दों पर संसद में चर्चा होगी। अगले दिन विवेक तन्खा, टीएमसी सांसद सागरिका घोष और CPI(M) सांसद जॉन ब्रिटास भी उनसे मिले। सभी नेताओं ने वांगचुक से अनशन खत्म करने की अपील की। सांसदों ने उन्हें एक पत्र भी सौंपा। उसमें लिखा था कि देश को उनके त्याग से ज्यादा उनकी सोच और मार्गदर्शन की जरूरत है। युवाओं और लद्दाख दोनों के लिए वांगचुक का स्वस्थ रहना जरूरी है। इसके बाद वांगचुक ने सरकार से सिर्फ एक लिखित भरोसा मांगा कि आंदोलन में शामिल युवाओं के खिलाफ कोई बदले की कार्रवाई नहीं होगी।

लद्दाख के नेताओं की अपील के बाद बनी अंतिम सहमति

इसी बीच लद्दाख से आए सिविल सोसाइटी नेताओं का प्रतिनिधिमंडल भी दिल्ली पहुंचा। उन्होंने भी वांगचुक से अनशन खत्म करने की अपील की। नेताओं ने कहा कि अब आंदोलन एक बड़े स्तर पर पहुंच चुका है। ऐसे में सरकार के साथ आगे की बातचीत का नेतृत्व करने के लिए वांगचुक का स्वस्थ रहना जरूरी है।

23 जुलाई की देर रात सरकार ने लिखित आश्वासन दिया। इसमें कहा गया कि जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वालों और संसद मार्च में शामिल लोगों के खिलाफ केस दर्ज नहीं करने पर सरकार सकारात्मक है। साथ ही संसद में चर्चा और पेपर लीक के मुद्दे पर आगे कार्रवाई का भी भरोसा दिया गया। इसी लिखित आश्वासन के बाद सोनम वांगचुक ने अपना अनशन खत्म करने का फैसला लिया। हालांकि उन्होंने साफ किया कि आंदोलन खत्म नहीं हुआ है। अब लड़ाई बातचीत और लोकतांत्रिक तरीके से आगे बढ़ेगी।