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कूड़ा कहीं का भी हो, फेंका इसी शहर में जाता है! तस्वीर देख आपको होगा दुःख

इस गांव के आसपास का एरिया, सड़के और बालकनी सभी कचरे से भरी दिखती हैं। दरअसल, ये कचरा काहिरा मेट्रोपॉलिटन एरिया का नतीजा है जहां 20 मिलिनयन आबादी होने के बावजूद यहां कचरा इकट्ठा करने का कोई ठीक-ठाक सिस्टम नहीं है।

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manshiyat naser known as garbage City

कूड़ा कहीं का भी हो, फेंका इसी शहर में जाता है! तस्वीर देख आपको होगा दुःख

नई दिल्ली। सबसे कम कचरा स्वीडन में पाया जाता है लेकिन इजिप्ट के वॉर्ड मंशियत नासिर को 'गार्बेज सिटी' यानी 'कचरे का शहर' कहा जाता है। इस स्लम एरिया में तकरीबन 60 हजार की आबादी रहती है। इस गांव के आसपास का एरिया, सड़के और बालकनी सभी कचरे से भरी दिखती हैं। दरअसल, ये कचरा काहिरा मेट्रोपॉलिटन एरिया का नतीजा है जहां 20 मिलिनयन आबादी होने के बावजूद यहां कचरा इकट्ठा करने का कोई ठीक-ठाक सिस्टम नहीं है।

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पिछले 70 सालों से कचरा उठाने वाले लोग यहां के रहवासियों के दरवाजे-दरवाजे जाकर कचरा इकट्ठा कहते हैं और उसके बदले मामूली सा मेहनताना लेते हैं। ये कचरा इकट्ठा करके ट्रक के जरिए मंशियत नासिर तक लाया जाता है। इसके बाद महिलाएं और बच्चे उन कचरों को अलग-अलग करते हैं। मंशियत नासिर की स्थिति सेहत के लिहाज से भी बहुत अच्छी नहीं है। यहां के हालात देखते हुए काहिरा म्युनिसिपल गवर्नमेंट ने साल 2003 में डिस्पोजल कचरे के लिए प्राइवेट कंपनीज हायर की थी, जो कचरा उठाने वालों के लिए ठीक नहीं था। फिर यहां स्वाइन फ्लू का दौर चला जिसके चलते गवर्नमेंट ने सुअरों को मारने का आदेश दिया, जो ऑर्गेनिक वेस्ट मटेलियल साफ करने में अहम होते हैं।

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